Friday, 16 August 2024

भारत-बांग्लादेश सीमा का वो इलाका जहां लागू होते हैं दोनों देशों के कानून, जानें क्या है वजह

बांग्लादेश अब धीरे-धीरे हिंसा और उथल-पुथल के दौर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है. भारत से सटी सीमा पर भी तनाव साफ झलकता है, लेकिन इसी सीमा पर एक अनोखा इलाका है, जहां दोनों देशों के कानून लागू होते हैं और लोग बिना पासपोर्ट और वीजा के स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं.

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में तीन बिगहा कॉरिडोर को 1974 में बांग्लादेश को सौंपा जाना था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बांग्लादेशी समकक्ष मुजीबुर रहमान के बीच एक संधि के हिस्से के रूप में, भारत को तीन बिगहा की संप्रभुता सौंपनी थी. इसके बदले में बांग्लादेश तक गलियारा और दक्षिण बेरूबारी मिलता. इसका उद्देश्य बांग्लादेश की दाहरग्राम-अंगरपोटा परिक्षेत्रों तक और भारत के लिए दक्षिण बेरुबारी के निकट परिक्षेत्रों तक पहुंच को सुविधाजनक बनाना था.

हालांकि बांग्लादेश ने समझौते का अंत बरकरार रखा, लेकिन भारत ऐसा नहीं कर सका, क्योंकि इसके लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होती. बाद में 1992 में एक समझौता हुआ और तीन बिगहा कॉरिडोर बांग्लादेश को पट्टे पर दे दिया गया.

इसने एक अनोखी स्थिति पैदा कर दी, जहां इस पट्टे की वजह से बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय धरती पर प्रवेश की अनुमति मिल गई वो भी बिना वीजा या पासपोर्ट के. समझौते की शर्तों के तहत, गलियारे से गुजरने वाले बांग्लादेशियों की तलाशी नहीं ली जाती है और न ही कोई चेकिंग होती है. 

वहां एक चौराहा भी है, जिसके माध्यम से भारत और बांग्लादेश दोनों देशों का यातायात संचालित होता है. बांग्लादेश के लिए पूर्व से पश्चिम और भारत के लिए उत्तर से दक्षिण, और ये ऐसा स्थान भी है जहां दोनों देशों के कानून लागू होते हैं. यदि कोई भारतीय किसी भी नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर भारतीय कानून लागू होगा और इसी तरह उस देश के नागरिक के लिए बांग्लादेशी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

भूमि की पट्टी भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश, दोनों संचालित करते हैं. यातायात पुलिसकर्मियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है.

गलियारा जिस बांग्लादेशी परिक्षेत्र की ओर जाता है, उसका क्षेत्रफल 19 वर्ग किलोमीटर है और ये चारों तरफ से भारत से घिरा हुआ है.

बांग्लादेश में अब नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार है. शेख हसीना ने नौकरियों में विवादित आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और देश छोड़कर पांच अगस्त से भारत में हैं.

जून में विरोध प्रदर्शनों की ताज़ा लहर शुरू होने के बाद से 450 से अधिक लोग मारे गए हैं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की भी खबरें आई हैं.

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने शुक्रवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है और बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा का भरोसा दिलाया.

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट कर जानकारी दी, "बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस का  टेलीफोन आया, बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया. लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत ने अपना समर्थन दोहराया. उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया."

बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद आठ अगस्त को मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी.
 



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Thursday, 15 August 2024

उत्तराखंड में अस्पताल से लौटते वक्त नर्स से रेप, 9 दिन बाद यूपी में मिला शव

उत्तराखंड (Uttarakhand) में कार्यरत एक नर्स की रेप के बाद हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार महिला एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कार्यरत थी और वो उत्तराखंड- उत्तर प्रदेश के बॉर्डर के निकट ही रहती थी.  वह 30 जुलाई की शाम को अस्पताल से निकली और सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) में रुद्रपुर के इंद्रा चौक से ई-रिक्शा लेते देखी गई, लेकिन उत्तर प्रदेश के बिलासपुर में काशीपुर रोड पर अपने किराए के आवास पर नहीं पहुंची, जहां वह अपने 11 साल की बेटी के साथ रहती थी.

अगले दिन, पीड़िता की बहन ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई.  आठ दिन बाद 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश पुलिस को उसका शव डिबडिबा गांव में उसके घर से लगभग 1.5 किमी दूर एक खाली प्लॉट में मिला.  पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गयी है.जांच टीम ने पीड़िता की चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाया है. 

मोबाइल फोन की बरामदगी के बाद पुलिस आरोपी तक पहुंची. आरोपी उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाला है. आरोपी दिहाड़ी मजदूर है पुलिस ने उसे राजस्थान से गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया है कि नशे में धुत धर्मेंद्र ने पीड़िता को देखा, उसका पीछा किया और उस पर हमला कर दिया जब वह अपने अपार्टमेंट की इमारत में प्रवेश करने वाली थी. घटना को लेकर उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी ने कहा कि आरोपी उसे पास की झाड़ियों में खींच ले गया था. उसके साथ उसने बलात्कार किया और उसके दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया.  पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने पीड़िता का फोन और पर्स से 3,000 रुपये भी चुरा लिए. 

कोलकाता की घटना को लेकर देश भर में आक्रोश
कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई निर्ममता को लेकर दिल्ली एम्स में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है. महिला डॉक्टर को न्याय दिलाने के लिए आज एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कैंडल मार्च निकाला. प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर ने कहा कि आज के समय में डॉक्टरों की सुरक्षा बड़ा सवाल बन गई है, ऐसे में सरकार बिना किसी देरी के तुरंत सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करें. जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि हमें न्याय चाहिए क्योंकि हम समाज की सेवा करते हैं. ऐसे में अगर हमारे साथ इस प्रकार घटना होगी तो कोई भी डॉक्टर बनने का सपना नहीं रख पाएगा.

बता दें कि महिलाओं ने बुधवार की रात को 'वूमन, रिक्‍लेम द नाइट' विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान कोलकाता में रात करीब 11 बजे कुछ लोग आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में घुस गए थे, जहां पर उन लोगों ने वाहनों पर हमला किया गया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे थे. 

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Wednesday, 14 August 2024

34 साल पहले भारत ने किया था आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण

5 अगस्त 1990 को देश स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मना रहा था. दूसरी तरफ, इसी दिन भारत ने आकाश मिसाइल की सफल लॉन्चिंग कर दुनिया को यह बता दिया था कि आने वाला समय उनका है. भारतीय सेना में शामिल इस मिसाइल आकाश के आने से सेना की ताकत में काफी इजाफा हुआ है. वहीं, साल दर साल इस मिसाइल को अपग्रेड किया गया, जिसने इसे दुनिया का सबसे ताकतवर मिसाइल बना दिया है. आज भारत आत्मनिर्भर अभियान के तहत कई मिसाइल का निर्माण कर दुनिया में अपनी धाक जमा रहा है. आकाश मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है.

यूं तो आकाश मिसाइल को समय-समय पर अपडेट किया गया, साथ ही उसका परीक्षण भी किया गया. लेकिन, मार्च में हुए एक सफल परीक्षण के दौरान, चीन और पाकिस्तान में खलबली मच गई.

सेना की ओर से एक वीडियो शेयर किया गया. सेना ने इस वीडियो को शेयर कर बताया था कि यह मिसाइल एक बार में चार टारगेट को ध्वस्त कर सकता है. इस मिसाइल की खास बात यह है कि हवा में यह 25 किलोमीटर की रेंज तक निशाना लगा सकता है. इससे सेना की ताकत बढ़ी है.

खास बात यह है एक बार में चार टारगेट को ध्वस्त करने वाला यह मिसाइल सिर्फ भारत के पास है. भारत में फिलहाल इसके तीन वैरिएंट मौजूद हैं. पहला आकाश एमके- जिसकी रेंज 30 किलोमीटर है, दूसरा आकाश एमके-2 जिसकी रेंज 40 किलोमीटर है और तीसरा आकाश-एनजी, इसकी रेंज 80 किलोमीटर है.

हवा में घात लगाए बैठे दुश्मनों को आकाश एनर्जी 25 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर ध्वस्त कर सकता है. इस मिसाइल के होने से दुश्मन को छुपने का मौका भी नहीं मिलेगा.
 



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15 अगस्त की आजादी से जुड़ी उन उम्मीदों की कहानी जिनकी तरफ हिंदुस्तान देख रहा

India Success story : आज़ादी के बाद इन 78 साल के सफर में भारत ने कई बड़ी लकीरें खींची हैं ज़मीन से लेकर आसमान तक कई कीर्तिमान बनाए हैं. विकास यात्रा के इस क्रम में भारत अब उस रास्ते पर है, जहां दुनिया भारत की ओर देख रही है. अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम इसी की मुनादी कर रहे हैं. चंद्रयान, मंगलयान के बाद अब गगनयान की तरफ तेज़ी से भारत के मजबूत कदम बढ़ रहे हैं. कभी विज्ञान की रवायतों में, कभी इंसान की रुमानी खयालों में बसने वाला चांद दूर से जितना खूबसूरत लगता है, वो नजदीक से कैसा है, ये जानने की दिलचस्पी सदियों से जमाने को रहा. तभी तो भारत ने 2023 में अपना चंद्रयान चंद्रमा पर पहुंचा दिया, लेकिन चांद को लेकर हर हिंदुस्तानी की आंखों में बसने वाला सपना तो काफी बड़ा है. चांद पर किसी हिंदुस्तानी के कदमों के निशान का सपना कब अपना होगा?

जानें 2035 तक क्या होगा?

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अब इस दिशा में भी भारत विचार कर रहा है. 1961 में सोवियत संघ के वोस्तोक 1 ने अंतरिक्ष में पहला मानवयुक्त मिशन शुरू किया था. 1984 में तो अंतरिक्ष में पहले भारतीय के रूप में विंग कमांडर राकेश शर्मा पहुंचे थे. जब अंतरिक्ष से उन्होंने दुनिया को देखा तो उनके मुंह से इतना ही निकला- 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा'. 1984 में अंतरिक्ष में एक भारतीय के पहुंचने से शुरू हुआ सफर 2040 तक चांद पर अंगद की तरह पांव जमा देने तक पहुंच सकता है. भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर मनुष्यों को उतारना है. चांद पर भारत के कदम तभी पड़ेंगे, जब अंतरिक्ष में भारत का अपना स्टेशन हो. यूं तो अंतरिक्ष की सच्चाई से भारत काफी पहले ही वाकिफ हो चुका था, लेकिन दूसरे के अंतरिक्ष स्टेशन की मदद से. 1984 में, विंग कमांडर राकेश शर्मा सैल्यूट-7 स्टेशन पर पहुंचे थे, जो भारत का नहीं था. इसी साल प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी बीएएस के प्रस्ताव को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य पृथ्वी से 400 किमी ऊपर परिक्रमा करना और 2035 तक बीएएस को स्थापित करने का है. 

गगनयान की तैयारी शुरू

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Photo Credit: ANI

उम्मीदों की ये कड़ी गगनयान मिशन तक जाती है. इसके लिए इस साल के अंत तक एक परीक्षण उड़ान शुरू होने वाली है. इसमें तीन सदस्यीय दल को पृथ्वी की कक्षा में तीन दिनों की अवधि के लिए 400 किमी की ऊंचाई तक उड़ान भरना है. इस गगनयान मिशन में मानव सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरिंग सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है. साथ ही जीएसएलवी एमके III, जिसे एलवीएम-3 भी कहा जाता है, उसका उपयोग गगनयान को लॉन्च करने के लिए किया जाएगा. इसके लिए चार पायलटों ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला में से केवल तीन ही मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाएंगे. मिशन की अनुमानित लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये है.

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गरीबी मुक्त होगा भारत

जब देश की फिजा में आजादी घुली है तो उस आजादी के साथ उम्मीदें भी लहलहा रही हैं. अपनी विकास यात्रा में भारत चौमुखी लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है. हम विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं और 2047 तक हमने इस संकल्प की सिद्धि का लक्ष्य रखा है. विकसित भारत मतलब ऐसा भारत जो गरीबी से मुक्त होगा. जहां कोई अशिक्षित नहीं होगा. बेहतरीन स्वस्थ्य सेवाओं का इतना विस्तार होगा कि वो सबको सुलभ होंगी. हर हाथ को रोज़गार मिलेगा. उम्मीदों का आसमान बड़ा है और भारत पंख फैलाकर उड़ने को तैयार है. आजादी का असली आनंद तभी है जब हर पेट में भोजन हो, हर बदन पर कपड़ा हो और हर सिर पर एक छत हो. इसीलिए 15 अगस्त के जश्न में देश इस उम्मीद भरा है कि जब 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो भारत गरीबी मुक्त होगा.

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शिक्षा-स्वास्थ्य पर काम की जरूरत

गरीबी से ये लड़ाई तब तक बेमानी है जब तक हर हिंदुस्तानी के लिए बेहतरीन शिक्षा की गारंटी ना मिले. दरअसल, शिक्षा ही गरीबी मिटाने की सबसे बड़ी गारंटी है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ उसी दिशा में बढ़ा एक मजबूत कदम है. सबका शिक्षित होना क्यों जरूरी है? इसको आप विश्व साक्षरता शिखर सम्मेलन की रिपोर्ट से समझ सकते हैं. उसके मुताबिक निरक्षता से ही भारतीय अर्थव्यवस्था को सालाना करीब 53 बिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है.

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आजादी की खुली हवा में एक उम्मीद सबको बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधा को लेकर भी रहती है. भारत सरकार ने छह साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी, जिसमें 5 लाख रुपये तक निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा दी जाती है. इस योजना के तहत 34 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं. आजादी के 77 साल बाद भी भारत में 16.6 फीसदी लोग कुपोषित हैं. हर हिंदुस्तानी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए इस बार बजट में 90 हजार 958 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

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अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या?

हर हाथ को रोजगार देना आजादी की उम्मीदों में अहम है.भारत रोजगार रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत की कामकाजी आबादी 2011 के 2036 में 65 प्रतिशत फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. जाहिर है कि इन हाथों को मिलने वाला काम ही आजादी के एहसास को मीठा बनाएगा. भारत आज दुनिया की पाचंवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, लेकिन ये मंज़िल नहीं है. हमारी मंजिल तो दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर अर्थव्यवस्था बनना है और इस दिशा में सधे कदमों के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं. उम्मीद है कि 2030 तक हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन जाएंगे और हमारी अर्थव्यस्था का साइज़ 7 ट्रिलियन डॉलर तक हो जाएगा. इस विकास क्रांति का हिस्सा केवल शहर ही नहीं, हमारे गांव भी होंगे. देश में डिजिटल क्रांति का विस्तार हमारी विकास यात्रा की अहम कड़ी साबित होगा.

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2047 तक ऐसा होगा भारत

दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतों से हाथ मिलाना भारत का लक्ष्य नहीं है बल्कि भारत का लक्ष्य खुद ही सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन जाना है. इस दिशा में दो स्तरों पर काम हो रहा है. पहले चरण में 2030 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की उम्मीद है. लगातार आर्थिक सुधारों से भारत की इकोनॉमी 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है लेकिन ये एक पड़ाव भर है, मंजिल नहीं. असली मंजिल तो दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने का है. इस दिशा में बढ़ते कदम को तेजी से होता शहरीकरण भी दर्शाता है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक दिल्ली के इस धरती पर सबसे अधिक आबादी वाला शहर बनने का अनुमान है. वही विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2036 तक, इसके कस्बे और शहर 600 मिलियन लोगों या 40 प्रतिशत आबादी का घर होंगे. नीति आयोग के सीईओ परमेश्वरन अय्यर के मुताबिक 2047 तक भारत की 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहेगी. आबादी का शहरों की तरफ रुख करना डिजिटल इंडिया में नई क्रांति की भी उम्मीद जगाता है.यानी भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार डिजिटल क्रांति और जनसंख्या के सही इस्तेमाल से मिल सकती है.

सैन्य ताकत बनने की ओर बढ़े

विकसित भारत के लिए सुरक्षित भारत पहली शर्त है और सुरक्षा के लिए ज़रूरी है सैन्य ताकत. ऐसी सैन्य ताकत जो दूसरों पर निर्भर ना हो. लिहाज़ा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत तेज़ी से आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक सुखद पहलू ये भी है कि भारत आज 85 देशों अपने रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है. मसला केवल देश की सुरक्षा का नहीं है. देश की सीमाओं के भीतर महिलाओं की सुरक्षा भी बहुत अहम है. कभी भारत की सेना विदेशी मदद पर निर्भर करती थी लेकिन अब अपने पैरों पर खड़ा होने का कौशल इसे आ गया है. 2022-23 में भारत का रक्षा उत्पादन पहली बार एक लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार कर गया. आलम ये है कि अब भारत 85 देशों को डिफेंस प्रोडक्ट निर्यात करता है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है. भारत को उम्मीद है कि जल्द ही वो जश्ने आजादी आएगी, जब भारत ना सिर्फ सैनिक उत्पादों में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत भी हो सकता है.

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बेटियों की सुरक्षा जरूरी

एक तरफ सेना का बल देश को मजबूत बनाता है तो दूसरी तरफ महिलाओं की ताकत से देश को ताकत मिलती है. उस महिला शक्ति के लिए जरूरी है कि उनकी सम्मान और सुरक्षा की व्यवस्था मुकम्मल हो. महिला आयोग के मुताबिक 2023 में महिला से बलात्कार और बलात्कार की कोशिशों की 1539 घटनाएं हुईं. जबकि 2024 में 12 अगस्त तक ऐसी 900 घटनाएं हो चुकी हैं. कोलकाता में एक महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या की घटनाओं से आप समझ सकते हैं कि आजादी की सबसे बड़ी उम्मीदों में एक महिलाओं की सुरक्षा क्यों है? हिंदुस्तान की बेटियां ऐसी हैं कि जहां मौका मिले, वहां कामयाबी का झंडा गाड़ देती हैं. खेलों में भी उनके हुनर का सिक्का चलता है. 

खेल से लेकर ग्लोबल वार्मिंग

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भारत अपनी आजादी के मौके पर जहां खेलों में महिला भागीदारी और बेहतर होते देखना चाहता है. युवा यह टकटकी लगाए देख रहे हैं कि कब भारत में ओलंपिक होगा? पेरिस ओलंपिक में भारत ने करीब 470 करोड़ रुपये खर्च किये और उसे कुल 6 मेडल मिले, जबकि 6 एथलीट चौथे नंबर पर रहे. 2032 तक तो ओलंपिक की जगह तय हो चुकी है, लेकिन उम्मीद है कि भारत 2036 की ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकता है. देश की बागडोर संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का संकल्प लिया था. उसका लक्ष्य 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक देश को खुले में शौच से मुक्ति दिलाना था. इसके तहत 14 मार्च, 2024 तक करीब 12 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि वो दिन भी जल्द आएगा, जब हर घर में शौचालय होगा. वही स्वच्छता का एक सिरा साफ सुथरी हवाओं से भी जुड़ता है. ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला करने के लिए पूरे भौगोलिक क्षेत्र के कम से कम 33 फीसदी हिस्से में जंगल जरूर होना चाहिए. अभी भारत के पास करीब 22 फीसदी क्षेत्र में जंगल है. जाहिर है कि अभी पचास फीसदी और जंगल की उम्मीद देश कर रहा है.



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SC के फैसले के बाद झारखंड को केंद्र से मिलेंगे बकाया 1.36 लाख करोड़, CM हेमंत बोले- ऐतिहासिक फैसले से पूरी हुई हमारी मांग

खदानों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद झारखंड को केंद्र से बकाया एक लाख 36 हजार करोड़ रुपए मिलने की राह प्रशस्त हो गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज संपन्न राज्यों को बड़ी राहत दी है. संविधान पीठ ने राज्यों को खनिजों और खनिज-युक्त भूमि पर केंद्र सरकार से बकाया रॉयल्टी और टैक्स लेने की अनुमति दी है.

कोर्ट ने आदेश में कहा कि राज्य एक अप्रैल 2005 की तारीख से केंद्र के पास बकाया राशि 12 वर्ष में क्रमबद्ध तरीके से प्राप्त कर सकेंगे. इससे पहले 25 जुलाई को संविधान पीठ ने 8-1 के बहुमत से दिए अपने फैसले में खदानों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने का विधायी अधिकार राज्यों को दिया था.

सीएम हेमंत सोरेन ने क्या कहा? 
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, "बड़ी जीत! माननीय सुप्रीम कोर्ट का आभार. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से हमारी लगातार मांग सफल हुई है. अब झारखंड को केंद्र से मिलेंगे अपने बकाये के 1 लाख 36 हज़ार करोड़ रुपये! हर झारखंडी के इस बकाये/अधिकार को लेकर आपकी अबुआ (अपनी) सरकार लगातार आवाज बुलंद कर रही थी."

सोरेन ने आगे लिखा है, "अब हमें 2005 से खनिज रॉयल्टी का बकाया मिलेगा. यह भुगतान 12 साल में चरणबद्ध तरीके से होगा. राज्यवासियों के हक सुरक्षित होने के साथ इन पैसों का उपयोग जन-कल्याण में होगा, और हर झारखंडवासी को इसका पूरा लाभ मिलेगा!"

राज्य के विकास में लिखे जाएंगे नये आयाम:हेमंत सोरेन
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘2005 से झारखंड का बकाया 1 लाख 36 हज़ार करोड़ रुपये देने का निर्देश माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया है. आज इस ऐतिहासिक फैसला को सुनाने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का राज्य की जनता के तरफ से आभार और धन्यवाद! यह पैसा झारखंड को खनिज रॉयल्टी के बकाये के तौर पर मिलेगा जिससे राज्य के विकास में नये आयाम लिखे जायेंगे और झारखंड विकास की ओर अग्रसर होगा! जय संविधान! जय झारखंड!'

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Tuesday, 13 August 2024

'उर्दू से क्या दिक्कत है?' : पातुर नगर परिषद के साइन बोर्ड हटाने की मांग वाली याचिका पर SC ने पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पातुर नगर परिषद के उर्दू साइन बोर्ड को हटाने की मांग वाली याचिका पर सवाल उठाया. साइन बोर्ड पर नगर निकाय का नाम मराठी के साथ-साथ उर्दू में भी लिखा हुआ था. जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि उर्दू भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से एक है और साइन बोर्डों पर उर्दू को लेकर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. खासकर उन क्षेत्रों में जहां उर्दू बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है.

पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि उर्दू से आपको क्या दिक्कत है? ये समझिए कि ये आठवीं अनुसूची की भाषा है. नगर निगम ने इसे पूरे राज्य पर नहीं थोपा, ⁠हो सकता है कि उस क्षेत्र में सिर्फ़ वो ख़ास भाषा ही समझी जाती हो.

दरअसल पीठ बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के 10 अप्रैल के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य की आधिकारिक भाषा मराठी के अलावा किसी भी भाषा में नगर पालिका परिषदों के साइन बोर्ड लगाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.

याचिकाकर्ता ने अकोला जिला मराठी भाषा समिति के अध्यक्ष को संबंधित बोर्ड को हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी.

उच्च न्यायालय के समक्ष यह दलील दी गई थी कि महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण (राजभाषा) अधिनियम, 2022, सिविल प्राधिकरणों के साइनबोर्ड पर मराठी के अलावा अन्य भाषाओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है.

अब सुप्रीम कोर्ट ने  महाराष्ट्र सरकार को जवाब दाखिल करने और अपना रुख स्पष्ट करने के लिए समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी.



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Monday, 12 August 2024

स्थिरता, हिंदुओं पर अटैक, भारत के खिलाफ सेंटीमेंट... आखिर बांग्लादेश में कब शांति लाएंगे 'शांतिदूत' यूनुस?

हमारा पड़ोसी बांग्लादेश (Bangladesh Violence)इन दिनों संक्रमण यानी Transition के दौर से गुजर रहा है. शेख हसीना (Sheikh Hasina) सरकार के तख्तापलट के बाद भी बांग्लादेश के कई इलाकों में हिंसा खत्म होने में नहीं आ रही है. ये बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद युनूस (Muhammad Yunus) के सामने एक बड़ी चुनौती के तौर पर आई है. मोहम्मद यूनुस एक जाने माने अर्थशास्त्री हैं. एक नायाब पहल ग्रामीण बैंक के ज़रिए लाखों गरीब लोगों की ज़िंदगी बदलने के कामयाब प्रयोग के लिए उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. सवाल ये है कि ये शांतिदूत बांग्लादेश में कब तक शांति बहाल कर पाएंगे? वो भी ऐसे समय में, जब वहां कई जगहों पर अल्पसंख्यकों खासतौर पर ख़ासतौर पर हिंदू इस हिंसा का निशाना बन रहे हैं.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू समुदाय की भारी भीड़ सरकार से मांग करने के लिए सड़कों पर उतरी है कि उन्हें हिंसा से बचाया जाए. शेख हसीना के तख्तापलट के बाद हुई हिंसा में कोई तो है, जो जानबूझकर हिंदू समुदाय को निशाना बना रहा है. क्या छात्रों के ये आंदोलन कुछ ऐसी ताकतों के हाथ में चला गया है, जो इस बहाने अपने कट्टरपंथी एजेंडा पर अमल कर रही हैं. 

ये कैसा बांग्लादेश है? पाक के सरेंडर वाले आजादी के जिस लम्हे पर था नाज, दंगाइयों ने उसे ही मिटा डाला

हसीना के देश छोड़ने के बाद हिंदुओं पर महले की 205 घटनाएं 
क्या ऐसी ताकतों को भारत विरोधी ताकतों का समर्थन मिल रहा है. ताजा खबरों के मुताबिक, शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश के 52 जिलों में अब तक अल्पसंख्यक समुदाय खास तौर पर हिंदुओं पर हमलों की कम से कम 205 घटनाएं हो चुकी हैं. बांग्लादेश की 17 करोड़ की आबादी में करीब 8 फीसदी हिंदू आबादी है, लेकिन तख्तापलट के बाद जो हिंसा हुई उसमें हिंदुओं, उनके घरों और संस्थानों को निशाना बनाया गया. हालांकि, इस तरह की भी खबरें आई हैं कि कई जगहों पर आंदोलन में शामिल छात्रों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के साथ मिलकर हिंदुओं के घरों और मोहल्लों की सुरक्षा के लिए मिलकर पहरा दिया है. 

ये एक अच्छा संकेत ज़रूर है, लेकिन बांग्लादेश जैसी आबादी के बीच ऐसे उदाहरण बस गिने चुने ही दिखे. ऐसे में सवाल यही है कि हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं पर पूरी तरह काबू कब पाया जा सकेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री से फोन पर हुई पहली बात में ही ये चिंता स्पष्ट तौर पर जता दी है. 

अंतरिम सरकार ने शेख हसीना से लौटने को कहा
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना को वापस लौटने को कहा है. हसीना के इस्तीफे के बाद बनी सरकार में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत ने कहा है कि उन्हें देश से निकाला नहीं गया था, वे खुद भागीं थीं. सखावत ने कहा है कि वे वापस लौट सकती हैं, बस देश में फिर से हालात न बिगाड़ें.

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 ढाका की सड़कों पर लौटी पुलिस
इस बीच एक राहत की बात ये हुई है हिंसा के बाद सड़कों से गायब हुई बांग्लादेश की पुलिस ढाका की सड़कों पर लौट आई है. दरअसल, शेख हसीना के तख्तापलट के बाद जो हिंसा हुई उसमें पुलिस को भी दंगाई तत्वों ने निशाना बनाया. उनका आरोप था कि हसीना के दौर में पुलिस ने छात्रों पर ज़ुल्म किया. इसके बाद पुलिस महकमे के लोग कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय सड़कों से गायब हो गए. क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही थी.

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक प्रदर्शन में मारे गए 450 लोगों में से 42 पुलिसकर्मी भी थे. प्रदर्शन के दौरान 600 में से 450 पुलिस थानों में हिंसा और आगज़नी की घटनाएं हुई थीं. ऐसे में पुलिस महकमे के नुमाइंदों ने कहा था कि जब तक पुलिसकर्मियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक वो काम पर नहीं लौटेंगे. हालांकि, सोमवार को अंतरिम सरकार से बातचीत के बाद पुलिस काम पर लौट आई है.

यूनुस कर रहे बांग्लादेश में जल्द शांति बहाली की कोशिश
इस बीच भारत के लिए एक चुनौती शरणार्थी समस्या की भी खड़ी हो सकती है. इसलिए ये ज़रूरी है कि बांग्लादेश में जल्द से जल्द शांति बहाली हो. इसके लिए अंतरिम सरकार के चीफ मोहम्मद यूनुस ने लोगों से शांति की अपील की है. उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की. यूनुस ने छात्रों से कहा कि वो उनकी हिफ़ाज़त करें. मोहम्मद यूनुस ने कहा, "बहुत सारे लोग छात्रों की कोशिश को नाकाम बनाने में लगे हैं. ये अल्पसंख्यक भाई हैं. उन्होंने बांग्लादेश के लिए बराबरी की लड़ाई लड़ी है."

अल्पसंख्यक छात्र संगठनों के नुमाइंदों से भी कर रहे बात
मोहम्मद यूनुस इस दौरान अल्पसंख्यक छात्र संगठनों के नुमाइंदों से भी मिलने की बात कर रहे हैं. इन संगठनों ने भी अपना पूरा एजेंडा तैयार रखा है. उन्होंने 8 सूत्री मांग पत्र भी तैयार रखा है. इनमें अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए अलग कानून बनाने की मांग है. हाल के हमलों के केस के लिए फास्ट ट्रैक ट्रिब्यूनल बनाने की मांग है. अल्पसंख्यक हितों के लिए अलग मंत्रालय बनाने की भी मांग है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में गृह मंत्रालय से जुड़े सलाहकार रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल सख़ावत हुसैन ने भरोसा दिलाया कि बांग्लादेश हमेशा से सेक्युलर रहा है और सेक्युलर बना रहेगा. 

भारत के खिलाफ ज़्यादा सेंटीमेंट 
इस बीच सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश में भारत के खिलाफ सेंटीमेंट ज़्यादा हैं. पाकिस्तान के पक्ष में लोगों की भावनाएं कम हैं. सवाल ये है कि क्या इसके लिए भारत द्वारा शेख हसीना को शरण देना भी एक वजह है? तख्तापलट के बाद आठ दिन से शेख हसीना भारत में हैं. उन्हें लेकर आने वाले दिनों में क्या योजनाएं हैं. 

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
बांग्लादेश में अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस कब तक शांति बहाली कर पाएंगे? ये समझने के लिए NDTV ने सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मचेल्लानी और बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार फ़रीद हुसैन से बात की. बांग्लादेश में ताजा हालात पर वरिष्ठ पत्रकार फ़रीद हुसैन कहते हैं, "अभी सिचुएशन नॉर्मल होने में कुछ वक्त लगेगा. अभी अल्पसंख्यकों और खासतौर पर हिंदुओं पर हमले बंद हुए हैं. नया कोई अटैक रिपोर्ट नहीं हुआ है. अंतरिम सरकार के चीफ मोहम्मद यूनुस से अल्पसंख्यकों समुदायों के नेताओं के साथ मीटिंग की थी. इसके बाद यूनुस ने अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा का भरोसा दिया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि देश में अब उनपर हमले नहीं होंगे."

शेख हसीना पिछले एक हफ्ते से भारत में हैं. उन्हें सेफ हाउस में रखा गया है. इसे बांग्लादेश की नई हुकूमत किस तरीके से ले रही है? इसके जवाब में फ़रीद हुसैन कहते हैं, "हसीना के इस्तीफे के बाद बनी सरकार में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत ने कहा है कि अगर कोई भारत में गेस्ट बनकर रह रहा है, तो इससे बांग्लादेश के भारत के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा."

ढाका में सोमवार को अल्पसंख्यक हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया. क्या मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में नई हुकूमत अल्पसंख्यकों का भरोसा जीत पा रही है? इसपर सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मचेल्लानी बताते हैं, "पहली बात तो अंतरिम सरकार के पास कोई संवैधानिक जनादेश नहीं है. ये एक कमजोर सरकार है. मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार हैं. वो प्रधानमंत्री नहीं हैं. अंतरिम सरकार में सिर्फ सलाहकार हैं. सलाहकार नीति निर्माता नहीं होते हैं."

ब्रह्मचेल्लानी कहते हैं, "बांग्लादेश के राष्ट्रपति के पास भी कोई खास पावर नहीं है. असलियत ये है कि मुख्य ताकत तो आर्मी के पास है. इस समय क्रैकडाउन चल रहे हैं. जिस तरीके से बांग्लादेश के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे सीनियर जजों पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया. यूनिवर्सिटी के चांसलर को निकाला गया... इससे समझा जा सकता है कि पड़ोसी मुल्क में कितनी अस्थिरता है. ऐसी स्थिति में आर्मी ही मजबूत है, अंतरिम सरकार नहीं."

ब्रह्मचेल्लानी ने बताया, "शेख हसीना के गृहजिले गोपालगंज में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले हुए. वहां हिंदुओं के खिलाफ आर्मी का ही अत्याचार है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जब असली सत्ता आर्मी के पास है और वही इस तरह की कार्रवाई कर रही है, तो हिंदु कैसे खुद को महफूज महसूस करेंगे."

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