बिल्डिंग मालिक का दावा है कि उन्होंने नगर निगम से अनुमति ली थी और एक लाख चालीस हज़ार रुपए जमा कराए थे, हालांकि, भूखंड का एरिया जेडीए के अधीन बताया जा रहा है. इस गंभीर मामले पर पुलिस और जेडीए (जयपुर विकास प्राधिकरण) दोनों चुप हैं.
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