जी20 में भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने महामारी की स्थिति में वैश्विक तैयारी की व्यवस्था विकसित करने की कोशिशें परवान नहीं चढ़ने का जिक्र करते हुए कहा है कि भावी संकट की स्थिति में स्वास्थ्य आपूर्ति शृंखला के कारगर ढंग से काम करने के लिए सशक्त राजनीतिक इच्छा और निवेश का होना जरूरी है. कांत ने ‘भारत-अमेरिका बायोफार्मा हेल्थ समिट' में एक परिचर्चा में शिरकत करते हुए कहा कि अलग-अलग इलाकों में औषधि विनिर्माण के भौगोलिक विविधीकरण की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने दवाओं के भंडारण में सुधार और बेहतर प्रबंधन पर भी बल दिया.
नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कांत ने स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को साझा करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक मंच की जरूरत बताते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान इसका अभाव देखा गया था. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच सूचनाओं को साझा करने के लिए प्रयास करने होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, महामारी के दौरान साझेदारियों और राष्ट्रीय प्रयासों से आपूर्ति शृंखला संबंधी खामियों की गंभीरता काफी हद तक कम की जा सकी लेकिन महामारी के लिए तैयार रहने की वैश्विक व्यवस्था बनाने की पहल अभी अंजाम तक पहुंचनी बाकी है.''
कांत ने अमेरिकी दवा उद्योग को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमें सशक्त राजनीतिक इच्छाशक्ति और निवेश की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित हो जाए कि भावी संकट के समय स्वास्थ्य आपूर्ति शृंखला प्रभावी रूप से काम करे.'' उन्होंने कहा कि जी20 समूह का अध्यक्ष रहते समय भारत भावी महामारियों से निपटने के लिए इस तरह की वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में प्रयास करेगा.
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