कांग्रेस महासचिव कुमारी शैलजा ने जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि महंगाई से आम लोग पिस रहे हैं. शैलजा ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘जरूरी वस्तुओं की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं. अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,100 रुपये से अधिक है जबकि वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपये से ज्यादा है. अन्य जरूरी चीज़ों की कीमतें भी कई लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं. अगर किसी ने प्रगति की है तो वह महंगाई है. आम जनता और मध्यम वर्ग पिस रहा है.''
बुधवार को रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील (संप्रग) की सरकार के दौरान घरेलू सिलेंडर की कीमत में मामूली वृद्धि पर भी भाजपा नेता विरोध-प्रदर्शन करते थे, लेकिन भाजपा के वे नेता अब एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘जब विपक्ष ज्वलंत मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाता है तो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार उनके खिलाफ बोलने वालों की आवाज दबा देती है.''
उन्होंने हरियाणा में भाजपा-जन नायक जनता पार्टी (जजपा) सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ई-निविदा नीति का विरोध करने वाले सरपंचों पर पंचकूला में लाठीचार्ज किया गया. शैलजा ने पंचकूला में प्रदर्शन कर रहे सरपंचों के समूह से मुलाकात की और कहा, ‘‘लोकतंत्र में, आपको बातचीत के माध्यम से समाधान खोजना होता है. सरकार को समाधान तलाशने के लिए उनसे बात करनी चाहिए.'' उन्होंने कहा, ‘‘उनकी मांग क्या है, वे चाहते हैं कि सरकार ई-निविदा नीति पर पुन:विचार करे.''
कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली पर शैलजा ने कहा कि राज्य सरकार कह रही है कि अगर इसे लागू किया गया तो वह दिवालिया हो जाएगी. उन्होंने कहा, “जब हमने उनसे पूछा कि राज्य का कर्ज तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपये हो गया है और जमीन पर कोई विकास नहीं दिख रहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं है. लेकिन ओपीएस बहाल करने पर, वे कहते हैं कि इससे भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा.”
शैलजा ने कहा, “कांग्रेस- शासित राज्यों ने ओपीएस को बहाल कर दिया है और जब हम हरियाणा में सत्ता में आएंगे तो यहां भी इसे बहाल करेंगे.” हरियाणा के मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले पर शैलजा ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री को निष्पक्ष जांच के लिए अपने मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए था या उन्हें बर्खास्त करना चाहिए था, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह अपने मंत्री का इस्तीफा नहीं मांगेंगे. उनका रवैया उनकी मानसिकता को दर्शाता है.'
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