Wednesday, 12 February 2025

NDTV Explainer: पंजाब और हरियाणा के लोग हो जाएं सतर्क, ज़मीन के अंदर का ज़हरीला पानी जान पर भारी

देश में खेती-किसानी के सामने संकट लगातार गहरा रहा है. किसान अपनी उपज के बेहतर दाम की मांग कर रहे हैं, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मांग रहे हैं. लेकिन उनकी इन मांगों के बीच वो तथ्य छुप जाते हैं जो किसानों के संकट को और गहरा कर रहे हैं. दरअसल देश के कई इलाकों में खेतिहर ज़मीन ही संकट में है. बीते छह सात दशक से रसायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और ज़मीन के नीचे के पानी के अत्यधिक दोहन से इन खेतों की जान निकल गई है. उनकी उर्वरता ख़त्म हो चुकी है. उर्वरता बढा़ने के लिए हर साल रसायनिक खाद का फिर इस्तेमाल इस कुचक्र को और बड़ा कर रहा है. आए दिन कई रिपोर्ट इसे लेकर सतर्क करती हैं. ऐसी ही एक ताज़ा रिपोर्ट केंद्रीय भूजल बोर्ड की है. 2024 के लिए Annual Ground Water Quality Report में पंजाब और हरियाणा को लेकर विशेष तौर पर सतर्क किया गया है.

Latest and Breaking News on NDTV
कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा के कई ज़िलों में ज़मीन के नीचे का पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है. इन ज़िलों के भूजल में यूरेनियम, नाइट्रेट्स, आर्सेनिक, क्लोराइड, फ्लोराइड जैसे ख़तरनाक रसायनों का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं ज़्यादा है.


इन तत्वों में अगर यूरेनियम की बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के 23 में से 20 ज़िलों और हरियाणा के 22 में से 16 ज़िलों में यूरेनियम का स्तर सुरक्षित सीमा 30 parts per billion (ppb) से कहीं ज़्यादा है. जबकि 2019 में पंजाब में ऐसे ज़िलों की संख्या 17 और हरियाणा में 18 थी. साफ़ है दोनों ही राज्यों में उन ज़िलों की संख्या बढ़ी है जहां भूजल में यूरेनियम सुरक्षित मात्रा से ज़्यादा है.

  • पानी में अगर यूरेनियम का स्तर 30 ppb से ज़्यादा हो तो वो पीने के लिए सुरक्षित नहीं होता. इतना यूरेनियम शरीर के अंदरूनी अंगों को नुक़सान पहुंचा सकता है और पेशाब की नली के कैंसर का ख़तरा रहता है और किडनी में भी toxicity बढ़ती है.
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक भूजल में यूरेनियम का स्तर इतना बढ़ने की कई वजह हैं. जैसे मानव जनित गतिविधियां, बढ़ता शहरीकरण और खेती में फॉस्फेट युक्त खाद का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल.

    अध्ययन बताते हैं कि फॉस्फेट युक्त खाद में यूरेनियम का घनत्व 1 mg/kg से 68.5 mg/kg तक होता है. फॉस्फेट युक्त खाद फॉस्फेट की चट्टानों - जिन्हें phosphorite कहा जाता है उनसे बनती है. वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन के मुताबिक फॉस्फेट की चट्टानों में यूरेनियम की मात्रा 70 से 800 ppm तक हो सकती है. फॉस्फेट की खाद के इस्तेमाल से ये यूरेनियम खेतों की ज़मीन से रिसकर नीचे के पानी में मिल जाता है. राजस्थान से 42 फीसदी सैंपल्स और पंजाब से 30 फीसदी सैंपल्स में यूरेनियम का concentrations 100 ppb से ज़्यादा पाया गया.

    इससे ये साफ़ है कि इन दोनों राज्यों में भूगर्भीय जल में यूरेनियम का स्तर बहुत ज़्यादा है. यूरेनियम की अधिक मात्रा उन जगहों पर ज़्यादा पाई गई जहां ज़मीन के अंदर का पानी काफ़ी कम हो चुका है. उस पानी को काफ़ी हद तक निकाला जा चुका है. इससे ज़मीन के नीचे के बचे हुए पानी में यूरेनियम जैसे तत्वों का कंसंट्रेशन यानी सघनता बढ़ गई है.

    लेकिन चिंता सिर्फ़ यूरेनियम की ही नहीं है. कई अन्य ज़हरीले रसायन भी भूजल में बढ़ते जा रहे हैं. इनमें से एक है नाइट्रेट. भूजल में नाइट्रेट का सुरक्षित मात्रा से ज़्यादा होना पर्यावरण और जनता की सेहत के लिए बड़ी चिंता की बात है. नाइट्रेट की मात्रा उन खेतिहर इलाकों में ज़्यादा पाई गई जहां नाइट्रोजन पर आधारित उर्वरकों का ज़्यादा इस्तेमाल हुआ जैसे synthetic ammonia, nitric acid, ammonium nitrate और urea. इसके अलावा जहां पशुओं से जुड़ा कचरा काफ़ी ज़्यादा है वहां भी ज़मीन के नीचे के पानी में नाइट्रेट का स्तर बढ़ा है.

    सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 21 ज़िलों और पंजाब में 20 ज़िलों के भूजल मेंं नाइट्रेट सुरक्षित स्तर से कहीं ज़्यादा है. हरियाणा में 14.56 % सैंपल्स यानी 128 सैंपल्स में नाइट्रेट का स्तर तय मात्रा 45 mg प्रति लीटर से ज़्यादा पाया गया.

पंजाब में 12.58% सैंपल्स यानी 112 सैंपल्स में नाइट्रेट का स्तर तय मात्रा 45 mg प्रति लीटर से ज़्यादा पाया गया. पंजाब के बठिंडा में तो स्थिति सबसे ज़्यादा ख़राब है. यहां 46% सैंपल्स में नाइट्रेट का स्तर सुरक्षित मात्रा से ज़्यादा था. बठिंडा इस मामले में देश के 15 सबसे प्रभावित ज़िलों में शामिल है.

Latest and Breaking News on NDTV



बठिंडा की बात कर रहे हैं तो आपको बता दें बठिंडा से बीकानेर ट्रेन को पंंजाब की कैंसर ट्रेन कहा जाता है क्योंकि इसमें कैंसर के सैकड़ों मरीज़ पंजाब से इलाज के लिए राजस्थान जाते हैं. ये बताता है कि ये ज़हरीले रसायन किस तरह पंजाब में कैंसर के लिए ज़िम्मेदार हैं. हम बात कर रहे थे नाइट्रेन की. तो भूगर्भीय जल में नाइट्रेट के स्तर का बहुत ज़्यादा होना. नवजात बच्चों में blue baby syndrome की वजह बन सकता है. blue baby syndrome में नवजात बच्चों की त्वचा नीली या पर्पल रंग की दिखती है. अगर पीने के पानी में नाइट्रेट की मात्रा तय स्तर से ज़्यादा होती है तो ये पीने लायक नहीं होता.

भूजल में घुलने वाला एक और ज़हर है आर्सेनिक. पंजाब के 12 ज़िलों और हरियाणा के 5 ज़िलों में आर्सेनिक का स्तर सुरक्षित स्तर 10 ppb से ज़्यादा है. पानी में आर्सेनिक के होने से त्वचा से जुड़ी बीमारियां और कैंसर तक हो सकता है. लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियां और डायबिटीज़ हो सकता है. ज़मीन के नीचे पानी में आर्सेनिक 100 मीटर की गहराई तक पाया गया है. इससे ज़्यादा गहराई में आर्सेनिक की मात्रा कम या नहीं पाई गई.

इसके अलावा भूजल में क्लोराइड की अधिक मात्रा भी चिंता की वजह है. कुदरती या मानवीय कारणों से क्लोराइड पानी में घुलता है. घर से निकलने वाले कचरे और उर्वरकों के इस्तेमाल से भूजल में क्लोराइड की मात्रा बढ़ती है. भूजल में अगर क्लोराइड की मात्रा 1,000 mg/L से ज़्यादा हो तो उसे पीने के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता. हरियाणा में 9.67% सैंपल्स और पंजाब में 2% सैंपल्स में क्लोराइड इस सुरक्षित सीमा से ज़्यादा पाया गया.

इसके अलावा पानी में फ़्लोराइड का सुरक्षित मात्रा से अधिक होना भी चिंता की बात है. इससे फ्लोरोसिस हो सकता है जिसका असर दांतों से लेकर शरीर की हड्डियों तक दिखता है. पानी में फ़्लोराइड की सुरक्षित सीमा 1.5mg/L है.पंजाब और हरियाणा के 17-17 ज़िलों में फ़्लोराइड की मात्रा इससे ज़्यादा पाई गई.


साफ़ है कि देश में हरित क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने वाले दोनों ही राज्य पंजाब और हरियाणा की ज़मीन के नीचे का पानी अधिकतर जगह ज़हरीला हो चुका है. पीने के लायक नहीं है. देश की खाद्य सुरक्षा में भूजल की बड़ी अहमियत है. कई इलाकों में सिंचाई भूजल के ही भरोसे होती है. इसका ज़हरीले होने की बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी. इस सिलसिले में पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट से लेकर नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल तक कई बार चेतावनी दे चुकी हैं. ऊपर से खेती, बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण इस पानी का भयानक दोहन हो चुका है.

आईआईटी दिल्ली और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी - नासा की हाइड्रोलॉजिकल साइंसेस लेबोरेटरी की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक 2003 से 2020 के बीच के 17 सालों में पंजाब और हरियाणा में भूजल में क़रीब 64.6 अरब घन मीटर की कमी आई है. ये पानी इतना है कि इससे 2.5 करोड़ ओलंपिंक के साइज़ के स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं. Hydrogeology Journal में Detection and Social Economic Attribution of Groundwater Depletion in India नाम से प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक गुड़गांव और फरीदाबाद में भूजल में बहुत ही ज़्यादा कमी देखी गई है. इन दोनों ही इलाकों में भयानक तेज़ी से शहरीकरण हुआ है. दरअसल जितना पानी रिचार्ज होता है, उससे कई गुना पानी ज़मीन से निकाल लिया जाता है. और जो पानी रिचार्ज होता भी है, वो अपने साथ कई ज़हरीले रसायनों को ज़मीन के अंदर के पानी में मिला देता है. इसका असर ये होगा कि देर सबेर कृषि की उत्पादकता घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता बेकार होगी.

ऐसा नहीं है कि भूजल में ये चिंताजनक गिरावट सिर्फ़ पंजाब, हरियाणा तक सीमित हो, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और केरल के भी कई इलाके ऐसे हैं जिन्हें इस लिहाज़ से हॉटस्पॉट माना गया है और जहां तुरंत इससे निपटने के उपाय किए जाने की ज़रूरत है. लेकिन पंजाब, हरियाणा में भूजल सिर्फ़ बहुत तेज़ी से कम नहीं हो रहा बल्कि भयानक ज़हरीला भी हो रहा है. ऊपर से लगातार रसायनों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता घट गई है, उसमें ज़हरीले रसायन बढ़ गए हैं. इससे पंजाब में ख़ासतौर पर खेती का संकट खड़ा हो गया है जो एक आर्थिक, सामाजिक संकट भी बन रहा है.

पंजाब की खेतीयोग्य ज़मीन का 93% हिस्सा अनाज उत्पादन में इस्तेमाल होता है. लेकिन ये ज़मीन रसायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल और मोनोकल्चर यानी एक ही पौध की लगातार उपज से ख़राब होती जा रही है. मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है.रसायनिक खाद, कीटनाशकों का इस्तेमाल इस कदर हुआ है कि लोगों की सेहत को गंभीर नुक़सान पहुंचा है. कई ज़िलों में कैंसर के मामले काफ़ी बढ़ गए हैं. पंजाब के मालवा इलाके में कैंसर की दर सबसे भयानक है. यहां प्रति एक लाख लोगों में से 100 से 110 लोग कैंसर से पीड़ित हैं जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है. पंजाब की खेतीयोग्य जम़ीन के 80% इलाके में भूजल का अत्यधिक दोहन हो चुका है.

.कई जानकार मानते हैं कि पंजाब अपनी खेती में असंतुलन से पैदा होने वाली इन तमाम समस्याओं से निपट सकता है अगर वो धान और गेहूं की पैदावार की ज़िद छोड़ दे. इन दोनों ही फसलों को ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है.
विज़ुअल्स इन - धान के खेत हों. धान की फसल को तो बहुत ही ज़्यादा पानी चाहिए. धान से चावल निकलता है. एक किलोग्राम चावल के लिए क़रीब 2500 लीटर पानी की ज़रूरत होती है. भारत में इससे भी ज़्यादा पानी धान में इस्तेमाल किया जा रहा है. अब आप समझ जाइए कि जो चावल आप खा रहे हैं, उसके लिए कितना पानी लगता है. ये पानी हमारे जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा रहा है. भारत में सबसे ज़्यादा पानी धान की सिंचाई में ही इस्तेमाल होता है.

जानकारों के मुताबिक धान और गेहूं के अलावा किसानों को crop diversification यानी अलग अलग तरह के अनाजों के उत्पादन पर ज़ोर देना चाहिए जिन्हें पानी की कम ज़रूरत हो और जिनसे ज़्यादा मुनाफ़ा मिले. हरियाणा ने इस दिशा में मेरा पानी, मेरी विरासत नाम से एक मुहिम शुरू की है जिसमें किसानों को ज़्यादा पानी की ज़रूरत वाली फ़सलों जैसे धान के बजाय कम पानी वाली फ़सलों जैसे मक्का और सोयाबीन उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इससे हरियाणा में धान की उपज एक लाख हेक्टेयर इलाके में घटी है. इसके अलावा जानकार रसायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करते हुए जैविक यानी ऑर्गैनिक फार्मिंग पर भी ज़ोर देते हैं. आंध्रप्रदेश में ऐसे ही एक कार्यक्रम का मक़सद 2027 तक 60 लाख किसानों को ऐसी फसलों की ओर मोड़ना है जो रसायन मुक्त हों और जिन पर पर्यावरण में बदलाव का ख़ास असर न पड़े.
 

पंजाब में कृषि की नीति को ऐसे उदाहरणों से सीख लेते हुए बदलाव करना ही होगा. ताकी किसानों को समय के साथ बेहतर उपज मिले और लागत भी कम आए.

भारत दुनिया के उन देशों में जहां पानी की कमी का दबाव बढ़ गया है. गर्मियां शुरू होने से काफ़ी पहले ही कई इलाकों से सूखे की मार ख़बर शुरू हो जाती है. इस सूखे की कई वजह हैं. मानवीय गतिविधियों से बढ़ रहा क्लाइमेट चेंज सबसे बड़ी वजह. ऐसे में ज़रूरी है कि सूखे का असर अनाज के मामले में आत्मनिर्भरता पर न पड़े, इसके लिए पहले ही सचेत हो जाना चाहिए. इसके लिए एक काम तो ये किया जा सकता है कि उन फसलों को कम किया जाए जो पानी बहुत ज़्यादा मांगती हैं. भारत में ऐसी पांच प्रमुख फ़सलें हैं धान, गन्ना, कपास, सोयाबीन और गेहूं. जो भारत के सिंचित इलाके के 70% से ज़्यादा हिस्से में उगाई जाती हैं.

.धान की बात करें तो दुनिया में सबसे ज्यादा खपत इसकी ही होती है और भारत इसके सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है. भारत में सबसे ज़्यादा उपज धान की ही होती है. लेकिन धान उगाने के लिए काफ़ी पानी चाहिए. पारंपरिक खेती के तहत एक किलो धान के लिए 3000 से 5000 लीटर पानी की ज़रूरत होती है. धान के लिए खेतों को पानी से भरना पड़ता है. लेकिन इतना पानी कब तक उपलब्ध होगा कहा नहीं जा सकता. इसलिए ज़रूरी है कि धान को कम कर उसकी जगह कुछ और विकल्पों पर भी ध्यान दिया जाए.

कॉटन यानी कपास को सफ़ेद सोना कहा जाता है. ख़रीफ़ की इस फसल के मामले में भारत दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक है. लेकिन ये फसल भी बहुत पानी खाती है. एक किलो कपास उगाने के लिए 22,500 लीटर पानी की ज़रूरत होती है. ख़ास बात ये है कि भारत में अधिकतर कपास उन राज्यों में उगाई जाती है जो अपेक्षाकृत सूखे हैं जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश वगैरह. .

गन्ना भी एक ऐसी फसल है जिसे उगने के लिए बहुत ज़्यादा पानी चाहिए. भारत इस नक़दी फसल यानी कैश क्रॉप का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. पानी की कमी से ये फसल ख़राब हो सकती है. एक किलो गन्ना उगाने के लिए 1500 से 3000 लीटर पानी की ज़रूरत होती है.
 

  • .सोयाबीन सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली फसलों में से एक है. भारत की मिट्टी के लिए ये काफ़ी मुफ़ीद फसल है. सोयाबीन उगाने के लिए भी काफ़ी पानी की ज़रूरत होती है. एक किलो सोयाबीन के लिए 900 लीटर पानी की ज़रूरत पड़ती है.
  • हरित क्रांति के बाद भारत में गेहूं के उत्पादन में ज़बर्दस्त तेज़ी आई. भारत में धान के बाद सबसे ज़्यादा गेहूं की ही खपत है. लेकिन गेहूं के उत्पादन में पानी की खपत काफ़ी ज़्यादा है लगभग उतनी ही जितनी सोयाबीन में. एक किलो गेहूं उगाने के लिए क़रीब 900 लीटर पानी की ज़रूरत पड़ती है.

    लेकिन ये सभी वो फसलें हैं जिनकी भारत में सबसे ज़्यादा खपत होती है. चिंता की बात ये है ये फसलें पानी तो ज़्यादा खाती ही हैं क्लाइमेट चेंज के तहत होने वाले बदलावों को लेकर भी संवेदनशील होती हैं. ऐसे में या तो इन फसलों की कम पानी वाली प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाए या फिर फसलों के विविधीकरण यानी Crop diversification की ओर तेज़ी से बढ़ा जाए. इस दिशा में श्रीअन्न के नाम से प्रसिद्ध मोटे अनाजों की ओर वापस लौटना होगा. ज्वार, बाजरा, रागी, सामा, कोदों, कुटकी, कुट्टू जैसी फसलों की ओर आगे बढ़ना होगा जो पानी भी कम लेती हैं, सेहत के लिए भी बेहतर होती हैं और जिन पर क्लाइमेट चेेंज का असर भी कम पड़ता है. 


from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/YJOwmfn

डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की से की बात, जंग रोकने के लिए चर्चा जल्द शुरू; जानें पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की फिर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ भी फोन पर बात की. बातचीत के दौरान ट्रंप ने युद्ध समाप्ति के मुद्दे पर चर्चा की. प्रेसिडेंट ट्रंप की इस बातचीत के बाद ऐसा माना जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच 3 सालों से चल रहा युद्ध अब खत्म हो सकता है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप से बातचीत को सार्थक बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर पूरी जानकारी दी है.

क्या कहा ट्रंप नेे?

ट्रंप ने कहा कि वह और पुतिन, यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए ‘‘बातचीत'' शुरू करने पर सहमत हो गए हैं और ‘‘साथ मिलकर, बहुत निकटता से काम करेंगे. उन्होंने कहा, मैंने अभी यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से बात की. बातचीत बहुत अच्छी रही. वह, राष्ट्रपति पुतिन की तरह, शांति बनाना चाहते हैं. हमने युद्ध से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की, लेकिन मुख्य रूप से, बैठक शुक्रवार को म्यूनिख में आयोजित की जा रही है, जहां उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और राज्य सचिव मार्को रुबियो प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. मुझे उम्मीद है कि उस बैठक के नतीजे सकारात्मक होंगे. अब इस युद्ध को रोकने का समय आ गया है, जहां बड़े पैमाने पर और पूरी तरह से अनावश्यक मौत और विनाश हुआ है. 

ट्रंप से बातचीत के ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स लिखा कि हमने शांति हासिल करने के अवसरों के बारे में लंबे समय तक बात की है. टीम स्तर पर एक साथ काम करने की हमारी तत्परता और यूक्रेन की तकनीकी क्षमताओं पर भी चर्चा की की गई है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन किया और यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर बात की. डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की जानकारी दी. ट्रंप इस बातचीत से बेहद खुश नजर आए. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ "लंबी और अत्यधिक सार्थक" बातचीत की, जिसमें वे यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए "तुरंत" बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए. 

ट्रंप ने क्या कहा

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि दोनों नेताओं ने "एक-दूसरे के देशों का दौरा करने" का निमंत्रण दिया और अब वे इस बातचीत के बारे में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को तुरंत कॉल कर सूचित करेंगे. क्रेमलिन ने भी अलग से कहा कि कॉल डेढ़ घंटे तक चली और पुतिन और ट्रंप इस बात पर सहमत हुए कि "एक साथ काम करने का समय आ गया है."

रूस ने क्या कहा

क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप से यह भी कहा कि रूस द्वारा 2022 में अपने पश्चिमी समर्थक पड़ोसी पर आक्रमण से उत्पन्न यूक्रेन संघर्ष का "दीर्घकालिक समाधान" संभव है और उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को मास्को में आमंत्रित किया.



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/1HLDtyJ

Tuesday, 11 February 2025

ललितपुर अस्पताल में कुत्तों ने नवजात का शव नोच-नोचकर खाया, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के महिला अस्पताल से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद खूंखार कुत्तों ने एक नवजात शिशु के शव को नोच-नोचकर खा गया. अस्पताल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और मृतक शिशु के परिजनों पर लापरवाही का आरोप लगाया.

ललितपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डी नाथ ने चार डॉक्टरों की समिति गठित कर नवजात शिशु से जुड़ी पूरी जांच रिपोर्ट 24 घंटे में जारी करने का आदेश जारी किया है.

 नवजात शिशु का जन्म 9 फरवरी को महिला अस्पताल में हुआ था. लेकिन आज दोपहर को अस्पताल परिसर में मौजूद कुत्ते नवजात शिशु को नोचते हुए नजर आए. मौके पर मौजूद लोगों ने जब तक कुत्तों को भगाया, तब तक कुत्ते शिशु का पूरा सिर खा चुके थे.

सीएमएस ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही छिपाते हुए मृतक शिशु के परिजनों पर नवजात शिशु के शव को फेंकने का आरोप लगाया है। सीएमएस के अनुसार, बच्चे की हालत जन्म के समय ठीक नहीं थी, जिससे उसे एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। उसकी मौत के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था, लेकिन परिजनों ने शव को कथित तौर पर अस्पताल परिसर में फेंक दिया, जिसे कुत्ते खा गए.
 



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/aOVF8l3

JEE Main 2025 में टॉप करने वाली एकमात्र महिला, साई मनोगना गुथिकोंडा, हर रोज करतीं मैथ की 1 घंटे से अधिक प्रैक्टिस 

JEE Main 2025 Result Declared: आंध्र प्रदेश के दो छात्रों ने जेईई मेन्स 2025 में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है. मंगलवार को घोषित परिणामों में, 14 उम्मीदवारों ने पूरे देश में परफेक्ट एनटीए स्कोर 100 हासिल किया है. इनमें आंध्र प्रदेश के गुंटूर की साई मनोगना गुथिकोंडा भी शामिल हैं, जो 100 अंक हासिल करने वाली 14 में से एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं. डेकन क्रोनिकल की रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने साई मनोगना की सफलता पर बधाई दी. JEE Main 2025 Result: डायरेक्ट लिंक

JEE Main 2025 में राजस्थान के पांच उम्मीदवारों को मिले 100 पर्सेंटाइल, जाने कौन हैं वे, लिस्ट में देखें नाम

मीडिया से बात करते हुए, साई मनोगना ने भाष्यम स्कूल में अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में बताया. उन्होंने कहा, "मेरे शिक्षकों ने मेरी तैयारी के दौरान बेहतरीन मार्गदर्शन दिया. हमने स्कूल में एक संरचित समय सारिणी का पालन किया. मैंने अपने शिक्षकों के निर्देशों और सुझावों के अनुसार तैयारी की." अपने परीक्षा अनुभव के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने भौतिकी और रसायन विज्ञान की तैयारी के लिए हर रोज एक-एक घंटा और गणित पर एक घंटा और बीस मिनट का समय दिया है. वहीं बाकी समय का उपयोग अपने उत्तरों की समीक्षा करने में किया है. साई मनोगना ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा कि वह एक प्रमुख आईआईटी संस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग (ईसीई) करना चाहती है. 

JEE Main 2025 रिजल्ट, राजस्थान के आयुष सिंघल ने किया टॉप, दूसरे नंबर पर कुशाग्र गुप्ता और तीसरे नंबर पर दिल्ली के दक्ष, Topper List देखें

कोटिपल्ली यशवंत सात्विक ने 99.9968125 के एनटीए स्कोर के साथ सामान्य-ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया. सात्विक ने हाल ही में आंध्र प्रदेश से अपनी कक्षा 12वीं की पढ़ाई पूरी की है. जेईई मेन सत्र 1 में आंध्र प्रदेश के भावेश जयंती और प्रणय साई मुकेश को 300 में से 295 अंक मिले हैं. 



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/ANwUD1Z

JEE Main 2025 रिजल्ट, पेपर 1 के लिए जनरल कैटेगरी के टॉपर्स की लिस्ट और एनटीए स्कोर

JEE Main 2025 General Category Toppers: जेईई मेन 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. जिन उम्मीदवारों ने जेईई मेन 2025 सत्र 1 की परीक्षा में भाग लिया है, वे अपना रिजल्ट जेईई की आधिकारिक वेबसाइट https://ift.tt/0bXGQkW के माध्यम से चेक कर सकते हैं. एनटीए ने 100 स्कोर पाने वाले उम्मीदवारों के साथ स्टेट वाइज टॉपर के साथ ही कैटेगरी वाइज टॉपर के नाम और लिस्ट जारी की है. जनरल कैटेगरी में राजस्थान के आयुष सिंघल टॉपर पर हैं. इसके बाद कर्नाटक के कुशाग्र गुप्ता, तीसरे नंबर पर दिल्ली (एनसीटी) हर्ष झा, चौथे नंबर पर राजस्थान के राजित गुप्ता औ पांचवें नंबर पर राजस्थान के सक्षम जिंदल का नाम है. JEE Main 2025 Result: डायरेक्ट लिंक

JEE Main 2025 में राजस्थान के पांच उम्मीदवारों को मिले 100 पर्सेंटाइल, जाने कौन हैं वे, लिस्ट में देखें नाम

जेईई मेन 2025 पेपर 1 (बी.ई./बी.टेक.) के लिए जनरल कैटेगरी के टॉपर्स और उनके एनटीए स्कोर (आवेदन संख्या के बढ़ते क्रम में नीचे दिए जा रहे हैं- 

आवेदन संख्या         कैंडिडेट्स का नाम           स्टेट ऑफ एलिजिबिलिटी          एनटीए स्कोर

  1. 250310009213         आयुष सिंघल                          राजस्थान                                       100

  2. 250310034720           कुशाग्र गुप्ता                         कर्नाटक                                        100

  3. 250310143408            हर्ष झा                            दिल्ली (एनसीटी)                                 100

  4. 250310150634            राजित गुप्ता                           राजस्थान                                      100

  5. 250310236696         सक्षम जिंदल                             राजस्थान                                      100

  6. 250310254844            सौरव                                  उत्तर प्रदेश                                    100

  7. 250310299968          विषाद जैन                              महाराष्ट्र                                        100

  8. 250310312145         अरनव सिंह                                राजस्थान                                  100

  9. 250310391420         शिवेन विकास तोषनीवाल                गुजरात                                    100

  10. 250310564942          साई मनोगना गुथिकोंडा                 आंध्र प्रदेश                                100

  11. 250310569571           ओम प्रकाश बेहेरा                      राजस्थान                                   100

  12. 250310746461            बानी ब्रता माजी                          तेलंगाना                                  100

JEE Main 2025 रिजल्ट, राजस्थान के आयुष सिंघल ने किया टॉप, दूसरे नंबर पर कुशाग्र गुप्ता और तीसरे नंबर पर दिल्ली के दक्ष, Topper List देखें



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/qkdmjxX

'उंगली नीचे कर...' : जब रणवीर इलाहाबादिया को लेकर डिबेट में भीड़ गए तहसील पूनावाला और सुनील पाल

इंडियाज गॉट लेटेंट शो में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया की टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है. अश्लील जोक्स को लेकर उनके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार द्वारा जांच के आदेश दे दिए गए हैं. वहीं, डिबेट शो में तहसील पूनावाला और सुनील पाल आपस में भिड़ गए.

कॉमेडियन सुनील पाल ने कहा कि लाफ्टर को दुनिया की सबसे बेहतरीन दवा माना जाता है, लेकिन कुछ लोग बिना सोचे-समझे बकवास करते हैं और इंसानियत से दूर होते हैं. उनके माता-पिता को भी उन पर शर्म आनी चाहिए. ऐसे लोग समाज के लिए हानिकारक होते हैं और उन्हें आतंकवादी जैसे शब्दों से जोड़ दिया.

इस पर तहसीन पूनावाला ने विरोध जताया और कहा कि आप ऐसे लोगों को आतंकवादी नहीं कह सकते. यह उचित नहीं है और इसके बाद दोनों के बीच डिबेट शो में तीखी बहस हुई.

स्टैंड कॉमेडियन समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट की वजह से मशहूर यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अलाहबादिया मुश्किलों में आ गए हैं. उन्होंने समय रैना के शो में भद्दे मजाक किए, जिसको देख लोग भड़क गए हैं. इतना ही नहीं रणवीर अलाहबादिया और समय रैना सहित शो के प्रोड्यूसर्स के खिलाफ मामला दर्ज हो गया है. हर ओर आलोचना को देखते हुए अब रणवीर अलाहबादिया ने लोगों से माफी मांगी है. उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है.

मामले के तूल पकड़ने पर रणवीर और समय रैना के साथ शो के आयोजकों पर शिकायत दर्ज की गई है. इंडियाज गॉट लेटेंट के वीडियो को देख लोग रणवीर की आलोचना कर रहे हैं और उनसे सवाल पूछ रहे हैं कि वो इतना घटिया कैसे सोच सकते हैं?
 
यूट्यूब ने हटाया वीडियो
यहां आपको यह भी बता दें कि इंडियाज गॉट लैटेंट के नए एपिसोड पर हुए विवाद के बाद यूट्यूब ने इस एपिसोड को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है.  



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/PLMNmYk

Monday, 10 February 2025

5100 से अधिक पक्षियों की मौत के पीछे एवियन फ्लू का खौफ या कुछ और, क्या है इसकी वजह, पढ़ें

झारखंड में रांची के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के एक कुक्कुट फार्म में एवियन फ्लू का मामला सामने आने के बाद सोमवार को रांची में कुल 5,163 पक्षियों को मार दिया गया. पिछले दो दिनों के भीतर बीएयू में 5,488 पक्षियों को मारा गया है और पूरे प्रभावित क्षेत्र का संक्रमणरोधन किया गया है.

जिला पशुपालन अधिकारी (डीएएचओ) कवींद्र नाथ सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘रविवार को कुल 325 ‘गिनी फाउल' (पक्षी) को मारा गया था, जबकि सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में 5,163 पक्षियों को मारा गया.''

उन्होंने कहा कि अब 10 किलोमीटर के दायरे के सभी स्थानों पर नजर रखी जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि बीएयू के पशु चिकित्सा महाविद्यालय स्थित फार्म में पिछले 20 दिनों में करीब 150 ‘गिनी फाउल' की मौत हो चुकी हैं.

रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) को भेजे गए नमूनों में ‘एवियन इन्फ्लूएंजा ए वायरस' के प्रकार एच5एन1 की मौजूदगी की पुष्टि हुई है.

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने राज्य को इसके प्रसार को रोकने के लिए सभी उपाय करने के निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों में संक्रमित और निगरानी क्षेत्र घोषित करने, प्रभावित परिसरों तक पहुंच प्रतिबंधित करना और पक्षियों को मारना आदि शामिल है. राज्य पशुपालन विभाग ने शनिवार को एक परामर्श और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर क्षेत्र में पक्षियों की बिक्री और खरीद पर रोक लगा दी.



from NDTV India - Pramukh khabrein https://ift.tt/fUeVwHb