Wednesday, 15 January 2025

महिलाओं, दिव्यांगों, ट्रांसजेंडरों के लिए अलग-अलग शौचालय हों : SC का सभी हाईकोर्ट को निर्देश

देश के अदालतों और ट्रिब्यूनलों में महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर के लिए शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी हाईकोर्ट चार महीने में दिशा-निर्देशों का पालन करें. SC ने कहा कि शौचालय/वाशरूम/रेस्टरूम केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि एक बुनियादी आवश्यकता है जो मानवाधिकारों का एक पहलू है. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित स्वच्छता तक पहुंच को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, जो जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है.

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में अदालतों के लिए कहा, 'हाईकोर्ट और राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश देश भर की सभी अदालत परिसरों और ट्रिब्यूनलों में पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग-अलग शौचालय सुविधाओं का निर्माण और उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे. हाईकोर्ट यह सुनिश्चित करेंगे कि ये सुविधाएं जजों, वकीलों, वादियों और अदालत कर्मचारियों के लिए स्पष्ट रूप से पहचान योग्य और सुलभ हों.'

SC ने कहा कि उपर्युक्त उद्देश्य के लिए हर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी. इसके सदस्य हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल /रजिस्ट्रार, मुख्य सचिव, लोक निर्माण सचिव और राज्य के वित्त सचिव, बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी होंगे. यह समिति छह सप्ताह की अवधि के भीतर गठित की जाएगी. समिति एक व्यापक योजना बनाएगी, निम्नलिखित कार्य करेगी और उसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी.

अदालतों में शौचालयों की कमी! सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश

  • कोर्ट ने कहा कि औसतन प्रतिदिन अदालतों में आने वाले लोगो की संख्या का आंकड़ा रखना और यह सुनिश्चित करना कि पर्याप्त अलग- अलग शौचालय बनाए गए हैं और उनका रखरखाव किया गया है.
  • शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे में कमी और उनके रखरखाव के बारे में सर्वेक्षण करना, मौजूदा शौचालयों का सीमांकन करना और उपर्युक्त श्रेणियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मौजूदा शौचालयों को परिवर्तित करने की आवश्यकता का आकलन करना.
  • नए शौचालयों के निर्माण के दौरान मोबाइल शौचालय जैसी वैकल्पिक सुविधाएं प्रदान करना, रेलवे की तरह न्यायालयों में पर्यावरण अनुकूल शौचालय (बायो-शौचालय) उपलब्ध कराना.
  • महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए, कार्यात्मक सुविधाओं के साथ-साथ स्पष्ट संकेत और संकेत प्रदान करें, जैसे कि पानी, बिजली, संचालन फ्लश, हाथ साबुन, नैपकिन, टॉयलेट पेपर और अद्यतित प्लंबिंग सिस्टम का प्रावधान.
  • शेष रूप से, दिव्यांग व्यक्तियों के शौचालयों के लिए, रैंप की स्थापना सुनिश्चित करें और यह सुनिश्चित करें कि शौचालय उन्हें समायोजित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं.
  • मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई आदि जैसे हेरिटेज कोर्ट रूम के संबंध में वास्तुशिल्प अखंडता को बनाए रखने के बारे में एक अध्ययन करें.
  • शौचालय बनाने के लिए कम उपयोग किए गए स्थानों का उपयोग करके मौजूदा सुविधाओं के साथ काम करना, पुरानी एल प्लंबिंग प्रणालियों के आसपास काम करने के लिए मॉड्यूलर समाधान, स्वच्छता सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए समाधानों का आकलन करने के लिए पेशेवरों को शामिल करना.
  • एक अनिवार्य सफाई कार्यक्रम को प्रभावी बनाना और स्वच्छ शौचालय प्रथाओं पर उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ रखरखाव और सूखे बाथरूम के फर्श को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को सुनिश्चित करना.
  • बेहतर स्वच्छता और उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक सफाई विधियों और मशीनरी को नियोजित करके, अनुबंध के आधार पर पेशेवर एजेंसियों को आउटसोर्स करके शौचालयों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना.
  • एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जाए, जिसमें इन शौचालयों की कार्यक्षमता का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए और प्रभारी व्यक्ति को विशिष्ट अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए.
  • खराब शौचालयों की शीघ्र रिपोर्टिंग तथा उनकी तत्काल मरम्मत के लिए शिकायत/निवारण प्रणाली तैयार की जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर शौचालयों में सैनिटरी पैड डिस्पेंसर काम कर रहे हों और स्टॉक में हों.
  • रखरखाव की निगरानी करने, शिकायतों का समाधान करने तथा पीठासीन अधिकारी या उपयुक्त समिति से संवाद करने के लिए उच्च न्यायालय/जिला न्यायालय/सिविल न्यायालय/ट्रिब्यूनल के प्रत्येक परिसर में नोडल अधिकारी के रूप में किसी व्यक्ति को विशेष रूप से नामित या नियुक्त किया जाए.
  • ऐसे प्राधिकारी को शिकायतों का समाधान करना चाहिए और उक्त शौचालयों के रखरखाव, कार्य करने के संबंध में लिखित रूप में स्थायी निर्देश देने चाहिए. अदालत परिसरों में शौचालयों के निर्माण तथा रखरखाव के लिए पारदर्शी तथा अलग फंड होना चाहिए.
  • फैमिली कोर्ट परिसरों में बच्चों के लिए सुरक्षित शौचालय होने चाहिए, जिनमें प्रशिक्षित कर्मचारी हों, जो बच्चों को सुरक्षित तथा स्वच्छ स्थान प्रदान करने के लिए सुसज्जित हों.
  • स्तनपान कराने वाली माताओं या शिशुओं वाली माताओं के लिए अलग कमरे (महिलाओं के शौचालय से जुड़े हुए) उपलब्ध कराएं, जिनमें फीडिंग स्टेशन और नैपकिन बदलने की सुविधा उपलब्ध हो.
  • स्तनपान कराने वाली माताओं की सहायता के लिए स्तनपान सुविधाओं को शामिल करने पर विचार करना, रखरखाव की गुणवत्ता को विकसित करने और बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय अपने पर्यवेक्षण के तहत जिला न्यायालयों और अन्य न्यायालयों/फोरमों के लिए एक ग्रेडिंग प्रणाली बना सकते हैं.
  • अदालत परिसर में शौचालय सुविधाओं के निर्माण, रखरखाव और सफाई के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी उच्च न्यायालयों द्वारा गठित समिति के परामर्श से समय-समय पर समीक्षा की जाएगी.
  • सभी उच्च न्यायालयों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा चार महीने की अवधि के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट दायर की जाएगी. 


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Tuesday, 14 January 2025

मुंबई में फिर दिखा रफ्तार का कहर! तेज रफ्तार कार ने पैदल जा रहे 2 लोगों को कुचला, एक की मौत

नवी मुंबई के तलोजा MIDC क्षेत्र में एक भयावह हिट एंड रन हादसा हुआ है, जिसमें तेज रफ्तार वाहन चालक ने दो लोगों को अपनी गाड़ी से कुचल दिया. इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया है. हादसे का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है.

वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला सड़क के किनारे चल रही थी और एक युवक भी उसी रास्ते पर जा रहा था. अचानक पीछे से एक कार तेज गति से आती है और दोनों को इतनी जोरदार टक्कर मारती है कि वे काफी दूर जाकर गिर जाते हैं. इस हादसे में 27 वर्षीय लालू दास की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 44 वर्षीय प्रमिला दास को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं.

तलोजा पुलिस ने हिट एंड रन के आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है. कुछ दिन पहले, इसी तरह एक स्कोडा कार ने आग से आ रही स्कूटी को टक्कर मारी थी, जिसमें दो युवतियों की जान चली गई थी.

बीते 26 दिसंबर को भी मुंबई के पास वसई में एक कार ने 6 साल के बच्चे को कुचल दिया था. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि कार बच्चे को टक्कर मारती है, उसे घसीटती है और फिर पिछले पहिये से उसे कुचल देती है. 



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Monday, 13 January 2025

बाड़ से क्यों बिलबिला रहा बांग्लादेश, JNU के एक्सपर्ट से समझिए

भारत में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त नूरुल इस्लाम को सोमवार को दिल्ली में विदेश मंत्रालय में तलब किया गया. इससे पहले रविवार को यही कहानी ढाका में दोहराई गई थी, ढाका में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय में भारत के उच्चायुक्त को तलब किया. मुद्दा भारत-बांग्लादेश की सरहद पर 5 जगहों पर लगाई जा रही फेंसिंग का था. बांग्लादेश को इस बात पर एतराज था कि भारत ऐसा क्यों कर रहा है. बांग्लादेश अब बाड़ की आड़ ले रहा है, क्योंकि यह  मुद्दा पुराना है लेकिन विवाद नया है. इससे पहले  बांग्लादेश ने भारत में अपने कार्यालयों पर प्रदर्शन को लेकर विरोध जताया था. शेख हसीना को लेकर वो लगातार इसी तरह का रुख दिखा रहा है. आइये जानते हैं कि बॉर्डर पर क्‍यों जरूरी है फेंसिंग और क्‍या है बांग्‍लादेश को इससे दिक्‍कत. 

भारत और बांग्लादेश 4156 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं और इसमें से 3217 किलोमीटर पर बाड़ लगाई जा चुकी है. अब 885 किलोमीटर में ये काम होना है. भारत के 5 राज्यों की सीमा बांग्लादेश के साथ मिलती है. 

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किस राज्‍य से कितनी मिली है सीमा 

2216 किलोमीटर बंगाल में
856 किलोमीटर त्रिपुरा में
443 किलोमीटर मेघालय में
262 किलोमीटर असम में और 
180 किलोमीटर मिज़ोरम में

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फेंसिंग को लेकर खड़ा हो रहा विवाद 

2010 से 2023 के बीच भारत ने 160 जगहों पर फेंसिंग लगाई, जिसे लेकर विवाद खड़ा किया गया. इनके अलावा 78 और जगहों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ, लेकिन फेंसिंग का काम इसलिए जरूरी हो जाता है कि कई जगहों से बड़ी संख्या में घुसपैठ की आशंका हमेशा बनी रहती है. ये घुसपैठिए बाद में नकली कागज़ातों के सहारे दिल्ली से लेकर मुंबई तक फैल जाते हैं और तरह-तरह की समस्याएं खड़ी करते हैं. 

बांग्‍लादेश बॉर्डर पर क्‍यों जरूरी है फेंसिंग?

जेएनयू के प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने कहा कि बांग्‍लादेश से लगते बॉर्डर को सुरक्षित करना मुश्किल काम है, लेकिन भारत सरकार ने बॉर्डर डवलपमेंट प्रोग्राम के माध्‍यम से यहां पर फेंसिंग की कोशिश की है. उन्‍होंने कहा कि 2001 से 2006 के बीच व्‍यापक पैमाने पर आतंकवादियों, उग्रवादियों, कट्टरपंथियों की बहुत बड़ी आवाजाही इस बॉर्डर के माध्‍यम से भारत के पूर्वोत्तर राज्‍यों में देखने को मिली है. इसे ध्‍यान में रखते हुए भारत सरकार ने करीब 3200 किमी लंबे बॉर्डर पर फेंसिंग की. इसके जरिये कोशिश की गई कि आतंकवाद, कट्टरपंथियों और उग्रवादियों को रोका जाए.  

उन्‍होंने कहा कि अवैध गतिवधियों जैसे ड्रग्‍स की तस्‍करी, मानव तस्‍करी, करेंसी रैकेट दोनों देशों के बीच चल रहा था. उसे रेगुलेट करके बंद करने का प्रयास किया गया. 

बांग्‍लादेश को फेंसिंग से आखिर दिक्‍कत क्‍या है?

उन्‍होंने कहा कि मोहम्‍मद यूनुस के पीछे जो ताकते हैं, वो कट्टरपंथी ताकते हैं. वो अपने बिजनेस को चलाने के लिए और  खुद को मजबूत करने के लिए इस तरह की अवैध गतिविधियों का सहारा लेते हैं और भारत के पूर्वोत्तर राज्‍यों को अस्थिर करने की उनकी मंशा है. 

उन्‍होंने कहा कि 2001 से 2006 के बीच ऐसे बहुत से सबूत मिले हैं, जिनमें पाकिस्‍तान की आईएसआई का नाम सामने आया है. वह ताकतें एक बार फिर मजबूत हो गई हैं और वो नहीं चाहती है कि फेंसिंग की जाए. 



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Sunday, 12 January 2025

सुपरस्टार वेंकटेश, राणा दग्गुबाती और परिवार के अन्य सदस्यों पर केस दर्ज, जानिए क्या है मामला

FIR Against Venkatesh And Rana Daggubati: अभिनेता वेंकटेश दग्गुबाती, उनके भतीजे एवं अभिनेता राणा दग्गुबाती और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दग्गुबाती परिवार से पट्टे पर लिये गए भूखंड पर एक व्यवसायी द्वारा संचालित होटल को ध्वस्त करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी.

स्थानीय अदालत के निर्देश के बाद 11 जनवरी को फिल्मनगर थाने में वेंकटेश, राणा और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक साजिश, मकान में जबरन घुसने और अन्य आरोपों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.

शिकायतकर्ता भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों की खरीद-फरोख्त के कथित प्रयास से संबंधित मामले में आरोपियों में से एक है और उसे अक्टूबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिल गई थी.

क्या है शिकायत में

शिकायतकर्ता के अनुसार, दग्गुबाती परिवार ने 2014 में फिल्मनगर में एक भूखंड पट्टे पर दिया था और पंजीकृत ‘लीज डीज' के निष्पादन के बाद उन्होंने वहां एक होटल संचालित करना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि ‘लीज डीड' के अस्तित्व में होने के बावजूद वेंकटेश और अन्य लोगों ने उन्हें भूखंड से बेदखल करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने मुकदमा दायर किया, जो सिटी सिविल कोर्ट में लंबित है. उन्होंने कहा कि रोक के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया गया था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता है.

शिकायतकर्ता ने कहा कि हालांकि, आरोपी व्यक्तियों ने कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर पट्टे पर दिए गए भूखंड में प्रवेश किया और जनवरी 2024 में ढांचे को ध्वस्त कर दिया. शिकायतकर्ता ने कहा कि इसके बाद उसने नामपल्ली अदालत का रुख किया, जिसने पुलिस को मामला दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 11 जनवरी को मामला दर्ज किया गया और मामले में जांच की जा रही है.



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उत्तराखंड : पौड़ी में 100 फीट गहरी खाई में गिरी बस, 6 लोगों की मौत, 22 घायल

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक सड़क दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हुए हैं. पौड़ी से देहलचौरी जा रही एक बस दुर्घटनाग्रस्‍त होकर गहरी खाई में जा गिरी. हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई. गंभीर घायलों को श्रीनगर बेस अस्‍पताल में रेफर किया गया है, जबकि अन्‍य मरीजों का जिला अस्‍पताल में इलाज किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है. 

राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआएफ) से मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना दहलचौरी के पास हुई जहां बस अनियंत्रित होकर सड़क से 100 मीटर नीचे खाई में जा गिरी. दुर्घटना में चार व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्‍य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. 

गंभीर रूप से घायलों को श्रीनगर किया रैफर 

दुर्घटना के बाद बचाव अभियान संचालित करने में स्थानीय लोगों ने भी मदद की और घायलों को निकाल कर पौड़ी के जिला अस्पताल पहुंचाया गया. घायलों में से आठ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें श्रीनगर के लिए रेफर किया गया है. 

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पौड़ी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी निगरानी में तेजी से बचाव अभियान चलवाया. उन्होंने दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. 

दुर्घटना के बाद मरीजों की तीमारदारों ने अस्‍पताल की खराब व्‍यवस्‍थाओं पर सवाल उठाए हैं. हालांकि पौड़ी के अपर जिलाधिकारी अनिल गबरियाल ने व्‍यवस्‍थाओं को दुरुस्‍त बताया है. 

सीएम धामी ने जताया दुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने शोक संवेदना प्रकट करते हुए हादसे में दिवंगत हुए व्यक्तियों के परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की ईश्वर से कामना की धामी ने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की. 



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Saturday, 11 January 2025

राजस्थान में बाइक चोरी के संदेह में व्यक्ति को उल्टा लटकाया गया, पिटाई की गई

पुलिस ने शनिवार को बताया कि राजस्थान के बाड़मेर जिले में बाइक चोरी के संदेह में लोगों के एक समूह ने एक व्यक्ति को पेड़ से उल्टा लटका दिया और बेरहमी से पीटा. यह घटना शुक्रवार को गुढ़ा मालानी इलाके के भाखरपुरा गांव में हुई, जब श्रवण कुमार नामक दलित व्यक्ति चोरी के एक अलग मामले में जमानत पर रिहा हुआ था.

एक बयान में, बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र सिंह मीना ने कहा कि कुमार को 29 दिसंबर को एक स्थानीय मेले में बाइक चोरी करते हुए पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था. सूत्रों ने कहा कि कुछ दिन पहले कुमार को जमानत पर रिहा होने के बाद, ग्रामीणों ने उस पर एक और बाइक चोरी करने का आरोप लगाया. हालांकि, उस व्यक्ति ने अपने ऊपर लगे नये आरोप से इनकार किया है.

शुक्रवार को, ग्रामीणों ने कुमार को पकड़ लिया, उसके हाथ बांध दिए और उसे एक पेड़ से उल्टा लटका दिया. एक सूत्र ने कहा, "ग्रामीणों ने उस व्यक्ति की पिटाई की. उन्होंने हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की, जो अब वायरल हो गई है." 

गुड़ामालानी के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सुखराम बिश्नोई ने कहा कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और पुलिस ने 53 सेकंड की क्लिप का संज्ञान लिया है.

बिश्नोई ने कहा, "शुक्रवार को चोरी के संदेह में कुमार पर ग्रामीणों द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था. उस पर पहले एक अन्य चोरी का मामला दर्ज किया गया था. पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और विस्तृत जांच चल रही है."



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Friday, 10 January 2025

सुप्रीम कोर्ट की पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में मुख्‍य न्‍यायाधीश के कोर्ट रूम के बाहर बरामद बनाने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) द्वारा चंडीगढ़ प्रशासन को मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट रूम के बाहर बरामदा बनाने के निर्देश पर रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर यह आदेश पारित किया है. चंडीगढ़ प्रशासन की दलील थी कि इस तरह के निर्माण से चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स की यूनेस्को विरासत स्थिति प्रभावित होगी. हाई कोर्ट चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है. 

आदेश का पालन न करने पर चंडीगढ़ के मुख्य अभियंता को हाई कोर्ट द्वारा जारी अवमानना ​​नोटिस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. कोर्ट ने प्रशासन की याचिका पर हाई कोर्ट और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है. 

29 नवंबर को दिया था निर्देश

दरअसल पिछले साल 29 नवंबर को हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह दो हफ्ते के भीतर कोर्ट रूम नंबर 1 के सामने बरामदे का निर्माण शुरू करें. उसके बाद चार सप्ताह के भीतर निर्माण की प्रक्रिया पूरी करें. यह आदेश परिसर में बुनियादी ढांचे से संबंधित एक मामले में पारित किया गया था. 

यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व धरोहर का दर्जा 

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अथॉरिटी इमारत की अंतरराष्ट्रीय विरासत की स्थिति को लेकर चिंतित हैं. बरामदे का निर्माण हमारे लिए अहंकार का विषय नहीं बन सकता है. मेहता ने कहा कि इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है. 



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