Friday, 20 September 2024

QUAD में भारत का रोल कितना? क्यों चिढ़ता है चीन... जानिए PM मोदी के अमेरिकी दौरे से भारत को क्या मिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 21 से 23 सितंबर तक अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं. पीएम मोदी वहां क्वॉड समिट (QUAD Summit 2024) में शिरकत करेंगे. इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के साथ पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात भी होनी है. ये क्वॉड का पांचवां एडिशन है. अमेरिका के डेलावेयर में यह समिट होगी. डेलावेयर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का होमटाउन है. PM मोदी के अमेरिकी दौरे का ये सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है. अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान PM मोदी और जो बाइडेन के बीच कई समझौते भी होंगे. वहीं, कैंसर से निपटने के लिए अहम पहल की शुरुआत भी हो सकती है.

आइए जानते हैं क्या है क्वॉड? ये क्यों अस्तित्व में आया? क्वॉड में भारत का रोल कितना अहम? पीएम मोदी के दौरे के क्या हैं मायने:-

क्या है क्वॉड?
क्वाड शब्द QUADRILATERAL यानी चतुर्कोणीय शब्द का छोटा नाम है. जैसा कि नाम से जाहिर होता है, इसमें चार मुल्क शामिल हैं. 'क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग' में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. इसका गठन 2007 में हुआ था, लेकिन बीच में ऑस्ट्रेलिया के इससे बाहर आने के बाद ये प्रभाव में नहीं आ सका. इसके बाद 2017 में इसे दोबारा एक्टिव किया गया. 

क्वॉड का क्या है मकसद?
इस संगठन का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को रोकना है. क्वाड भारत को अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और संचालन में शामिल होने का एक प्लेटफॉर्म देता है. इससे भारतीय नौसेना की कुशलता और क्षमता दोनों बढ़ती है. इसके साथ ही नौसेनाओं का आपसी तालमेल करके समुद्री ताकत बढ़ाया जा सकता है. चूंकि, चीन लगातार QUAD का विरोध करता आ रहा है. इसलिए यह भी माना जाता है कि क्वाड चीन को जवाब देने का एक जरिया है. QUAD की वजह से भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री चुनौतियों का जवाब देने में सक्षम हो रहा है. 

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QUAD न सिर्फ सुरक्षा, बल्कि आर्थिक से लेकर साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन, महामारी और शिक्षा जैसे अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी फोकस करता है.

अब तक क्वॉड के कितने समिट हुए?
2017 में रिएक्टिव होने के बाद क्वॉड के अब तक 4 समिट हो चुके हैं. 12 मार्च 2021 में क्वॉड की पहली लीडर्स मीटिंग हुई थी. ये एक वर्चुअल मीटिंग थी. इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिडे सुगा शामिल हुए थे. दूसरी मीटिंग 24 सितंबर 2021 को अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में हुई. इस मीटिंग में भी ये चारों लीडर शामिल हुए थे. क्वॉड की तीसरी मीटिंग 24 मई 2022 को जापान की राजधानी टोक्यो में हुई थी. इस मीटिंग में बाकी तीन लीडर के साथ जापान के नए पीएम फुमियो किशिदा ने शिरकत की थी. चौथी मीटिंग 19 मई 2023 को जापान में ही हुई थी. क्वॉड की पांचवीं मीटिंग अमेरिका में 21 से 23 सितंबर 2024 को आयोजित हो रही है. जबकि पांचवीं मीटिंग 2025 में दिल्ली में प्रस्तावित है.

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भारत के लिए क्यों जरूरी है QUAD?
माना जाता है कि QUAD रणनीतिक तौर पर चीन के आर्थिक और सैन्य उभार को काउंटर करता है. इसलिए ये गठबंधन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है. इंटरनेशनल मामलों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन का भारत के साथ लंबे समय से सीमा विवाद रहा है. ऐसे में अगर सीमा पर उसकी आक्रामकता ज्यादा बढ़ती है, तो इस कम्युनिस्ट देश को रोकने के लिए भारत QUAD के अन्य देशों की मदद ले सकता है. भारत क्वॉड में अपना कद बढ़ाकर चीनी की चालबाजी पर अंकुश लगा सकता है.

चीन क्यों करता है क्वॉड का विरोध?
चीन शुरू से ही QUAD का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसे वह अपने वैश्विक उभार को रोकने वाली रणनीति के रूप में देखता है. चीनी विदेश मंत्रालय का आरोप है कि QUAD उसके हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहा है. कई मौकों पर चीन QUAD को एशियाई NATO तक कह चुका है. चीन को डर है कि अगर भारत अन्य महाशक्तियों के साथ गठबंधन बनाता है, तो वह भविष्य में उसके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है.

क्वॉड समिट 2024 का क्या है एजेंडा?
-यूक्रेन-गाजा जंग में शांति का समाधान ढूंढने की कोशिश होगी.
-‘ग्लोबल साउथ' की चिंताओं को दूर करने पर चर्चा होगी.
-कैंसर से निपटने के लिए अहम पहल की शुरुआत हो सकती है.
-राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात होनी.
-कम से कम दो अहम समझौते होंगे
-पहला समझौता इंडो पैसेफिक इकोनॉमिक स्ट्रक्चर पर होगा.
-दूसरा समझौता इंडिया-अमेरिका ड्रग फ्रेमवर्क पर होगा.

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PM मोदी के US दौरे का शेड्यूल
21 सितंबर
-PM मोदी दिल्ली से रवाना होंगे.
-फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट पर उनका स्वागत होगा.
-राष्ट्रपति जो बाइडेन से द्विपक्षीय मुलाकात होगी.
-QUAD समिट में हिस्सा लेंगे.
- इसके बाद न्यूयॉर्क रवाना हो जाएंगे.

22 सितंबर 
-नासाउ कॉलेजियम की मीटिंग होगी. 
-पीएम मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे.
-टॉप अमेरिकी CEO से भी उनकी मुलाकात होगी.

23 सितंबर
-पीएम मोदी समिट ऑफ द फ्यूचर में शिरकत करेंगे.
-भारत के लिए रवाना हो जाएंगे. 

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पीएम मोदी के दौरे के क्या हैं मायने?
-QUAD समिट में शामिल हो रहे दुनिया के 4 बडे देशों में भारत के प्रधानमंत्री ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने युद्ध में जानी दुश्मन बने यूक्रेन और रूस के राष्ट्रपतियों से उनके देश में जाकर मुलाकात की है. 

-वन टू वन बातचीत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडोमिर जेलेंस्की से जंग खत्म करने की अपील की है. प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई में  रूस और फिर अगस्त में यूक्रेन का दौरा किया था. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि क्वॉड समिट में पीएम मोदी एक बार फिर से शांति कि पहल कर सकते हैं.

-भारत लगातार कहता आ रहा है कि रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास के बीच जंग खत्म करने और शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटा हुआ है. अब क्वाड समिट में भी इस पर अहम बातचीत हो सकती है.

-इन दोनों मुल्कों की सफल यात्रा के बाद पीएम मोदी पहली बार क्वाड के राष्ट्र प्रमुखों से मिलने वाले हैं. ऐसे में आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल होने की भी उम्मीद है.

-22 सितंबर को न्यूयॉर्क में रहते हुए प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय की एक सभा को भी संबोधित करेंगे. डायस्पोरा इवेंट 'मोदी एंड यूएस प्रोग्रेस टुगेदर', न्यूयॉर्क के उपनगर यूनियनडेल में आयोजित होगा. इस कार्यक्रम के टिकट के लिए 25,000 से अधिक लोगों ने आवेदन किया है.

-प्रधानमंत्री मोदी 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'भविष्य के शिखर सम्मेलन' को संबोधित करेंगे. इसका विषय इस बार 'बेहतर कल के लिए बहुपक्षीय समाधान' रखा गया है. 

-अपनी अमेरिकी यात्रा और क्वॉड समिट में शिरकत के दौरान पीएम मोदी AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के CEO के साथ बातचीत करेंगे.

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भारत को क्वाड से क्या-क्या फायदा हुआ? 
-क्वाड से भारत को कई तरह के फायदे हुए हैं. हिंद महासागर में हमारी समुद्री ताकत बढ़ी है. चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने की स्थितियां मजबूत हुईं. 

-क्वॉड भारत के आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अपने उद्योगों का समर्थन करने के लिए भी अहम प्लेटफॉर्म है. क्वाड में भारत की मौजूदगी क्षेत्रीय भू-राजनीति का एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में गिना जाता है. 

-ये भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ ज्यादा असरदार तरीके से जोड़ने की स्थितियां बनाता है. 

भारतीय प्रधानमंत्रियों के अमेरिकी दौरे पर एक नजर
प्रधानमंत्री मोदी का ये 9वां अमेरिकी दौरा है. इससे पहले डॉ. मनमोहन सिंह 8 बार (2004-2014) अमेरिका का दौरा कर चुके हैं. अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएम रहते हुए 4 बार (1998-2004) अमेरिका की यात्रा की थी. राजीव गांधी ने 3 बार (1984-1989) अमेरिका का दौरा किया था. इंदिरा गांधी ने 3 बार (1966-1977, 1980-1984) अमेरिका की यात्रा की थी. पंडित जवाहर लाल नेहरू 4 बार (1947–1964) अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं.

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Thursday, 19 September 2024

ग्रीस में भारतीयों ने क्यों खरीदी ताबड़तोड़ प्रॉपर्टी? वजह जान कहेंगे ये है बिनजेस माइंड

Greece Property Boom: ग्रीस में जुलाई और अगस्त के बीच भारतीय निवेशकों द्वारा संपत्ति खरीद में 37 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. दरअसल, 2013 में ग्रीस ने गोल्डन वीजा कार्यक्रम लॉन्च किया था. इसके तहत ग्रीस दूसरे देशों के नागरिकों को उसके यहां प्रॉपर्टी में निवेश करने पर स्थाई नागरिकता प्रदान करता था. इस स्कीम की शुरुआती सीमा €250,000 (2.2 करोड़ रुपये) थी. यह यूरोप में निवेश कर नागरिकता लेने की सबसे कम सीमा थी. 1 सितंबर से इस स्कीम में ग्रीस कुछ बड़े बदलाव करने जा रही थी. इसी के चलते भारतीयों ने ताबड़तोड़ प्रॉपर्टी ग्रीस में खरीद लिए और नागरिकता वहां की ले ली.   

क्या बदलाव किया ग्रीस ने?

2013 के बाद से ग्रीस में काफी लोगों ने प्रॉपर्टी में निवेश किया और इसके कारण वहां की संपत्ति की कीमतें बढ़ने लगीं. खासकर एथेंस, थेसालोनिकी, मायकोनोस और सेंटोरिनी जैसे समृद्ध इलाकों में. इसे रोकने के लिए, ग्रीस की सरकार ने 1 सितंबर 2024 से इन क्षेत्रों में संपत्तियों के लिए निवेश सीमा को €800,000 (लगभग ₹ 7 करोड़) तक बढ़ा दिया. अब जाहिर तौर पर जो प्रॉपर्टी 2 करोड़ रुपये में अब तक मिल रही थी, वो 1 सितंबर से 7 करोड़ रुपये की हो जाती तो लोगों ने जुलाई-अगस्त में जमकर खरीददारी कर ली. मतलब एक महीने में 5 करोड़ का फायदा.

लेप्टोस एस्टेट्स के वैश्विक विपणन निदेशक संजय सचदेव ने हाल के महीनों में मनीकंट्रोल को बताया, "कई निवेशकों ने इस दौरान छह-बारह महीने की हैंडओवर अवधि के साथ निर्माणाधीन परियोजनाएं खरीदीं हैं." लेप्टोस एस्टेट्स भी अब प्रॉपर्टी में उछाल के कारण ग्रीस में अपने उपलब्ध आवासीय स्टॉक को बेचना चाह रही है.

ग्रीस ने क्यों कीमतें बढ़ाईं

- तेजी से बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए.

- समान विकास को बढ़ावा देने के लिए.

- कम डेवलप क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए.

भारतीय निवेशकों के लिए ग्रीस के गोल्डन वीज़ा कार्यक्रम की अपील


 



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सोनपुर में नाव पलटने से 4 लोग लापता, एसडीआरएफ के गोताखोर कर रहे तलाश

सोनपुर के जैतिया के समीप बाढ़ के पानी में नाव के अनियंत्रित होकर पलट गई‌. नाव पर 16 व्यक्ति सवार थे. 16 व्यक्ति में से चार व्यक्तियों का अब तक पता नहीं चल सका है. एसडीआरएफ के स्थानीय गोताखोर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं. अंधेरा होने के कारण सर्च ऑपरेशन में काफी परेशानी हो रही है. घटना गुरुवार देर शाम की है.

जैतीया से बाढ़ग्रस्त गंगाजल पंचायत बाबुरानी के लिए 19 पर करीब डेट दर्जन लोग अपने दैनिक कामकाज के साथ ही ड्यूटी कर वापस घर लौट रहे थे. नाव पर एक पहलेजा शाहपुर दियारा का भी एक व्यक्ति सवार हो गया था, जिसे उतारने के लिए नाविक नाव को साइड कर रहा था कि बिजली के हाई टेंशन तार के संपर्क में आने से बाबू रानी निवासी भूषण प्रसाद बुरी तरह झुलस गए. साथ ही एक रेल यात्री कमलेश्वर राय भी जख्मी हुए. इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी से नाव गहरे पानी में पलट गई और नाव पर सवार सभी लोग डूबने लगे.

अनुमंडल अस्पताल में भर्ती घायल भूषण प्रसाद ने बताया कि अचानक करंट का झटका लगा और नाव पलट गया. पानी के नीचे भी एक तार था, जिसके कारण वह जख्मी हुए. फिर भी तैर कर बाहर निकल आए. हालांकि उनके पुत्र मुकेश का अभी पता नहीं चल सका है. नाव पर सवार रेल कर्मी संतोष कुमार राय ने बताया कि नाव पर 15 से 16 लोग थे. नाव पर सवार एक लड़के को उतारने के लिए नाव दूसरी दिशा में बढ़ा था. नीचे तार लटक था. हालांकि नाव पर सवार कुछ लोगों ने लाइट कटे होने की बात बताई, लेकिन नाव जैसे ही वहां से गुजरी करंट के झटके से हो हल्ला के बीच नाव पलट गई. इस घटना में एक और घायल रेलकर्मी कामेश्वर राय का इलाज रेलवे अस्पताल में जारी है. वहीं लापता लोगों में वीरेंद्र राय का पुत्र मृत्युंजय कुमार तथा देवशरण राय का पुत्र नागेंद्र राय बताया जाता है.



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चांद पर रखा कदम, सूरज से मिलाई आंखें, अब स्पेस में अपना 'घर' बनाने जा रहा भारत... समझें कैसा होगा हमारा स्पेस स्टेशन?

भारत के स्पेस प्रोग्राम ने बीते 8 दशकों में बड़ी तरक्की की है. भारत चांद पर कदम रख चुका है. उस जगह को चूम चुका है, जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया. भारत ने मिशन आदित्य के जरिए सूरज से भी आंखें मिला ली हैं. अब हम स्पेस में अपना खुद का घर बनाने जा रहे हैं. 'गगनयान' नाम से ह्यूमन मिशन लॉन्च करने के बाद ISRO साल 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है. इसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) कहा जाएगा. अभी अंतरिक्ष में दो स्पेस स्टेशन काम कर रहे हैं. एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है, जिसे रूस, अमेरिका के सहयोग से बनाया गया है. दूसरा, चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन है. अपना स्पेस स्टेशन बनाने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसी इंटरनेशनल स्पेस प्लेयर की लिस्ट में शामिल हो जाएगा.

आइए समझते हैं क्या होता है स्पेस स्टेशन? इसमें एस्ट्रोनॉट्स कैसे दिन गुजारते हैं? स्पेस स्टेशन में कौन-कौन सी सुविधाएं होती हैं? भारत का स्पेस स्टेशन कैसा होगा? ये कब तक तैयार हो जाएगा? इसे तैयार करने में क्या-क्या चुनौतियां आएंगी:-

स्पेस स्टेशन क्या होता है?
स्पेस स्टेशन को ऑर्बिटल स्टेशन कहते है. इसे एस्ट्रोनॉट्स के रहने के लिए सभी सुविधाएं हो ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. यानी ये स्पेस में मैन मेड स्टेशन होता है, जहां धरती से कोई एस्ट्रोनॉट जाकर रह सकता है. इस स्टेशन में इतनी क्षमता होती है कि इस पर स्पेसक्राफ्ट उतारा जा सके. इन्हें पृथ्वी की लो-ऑर्बिट कक्षा में ही स्थापित किया जाता है. 

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अभी कितने स्पेस स्टेशन हैं?
अप्रैल 2018 तक दो स्पेस स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में हैं. पहला- इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और दूसरा- चीन का Tiangong-2. 
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA और रूस की स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस की अगुवाई में तैयार किया गया है. अलग-अलग देशों के एस्ट्रोनॉट और साइंटिस्ट इसमें काम करते हैं. जबकि चीन के स्पेस स्टेशन Tiangong का मतलब आकाश महल है.
Tiangong पृथ्वी की कक्षा से 340 से 450 किलोमीटर दूर है. आने वाले समय में चीन अपने स्टेशन का आकार बड़ा करने वाला है.

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में क्या-क्या सुविधाएं हैं?
-इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 2011 में बनकर तैयार हुआ. इसमें एक साथ 6 एस्ट्रोनॉट रह सकते हैं.
-ISS को अमेरिका, रूस, फ्रांस समेत कुल 18 देशों ने मिलकर तैयार किया है. इसके कंट्रोल यूनिट को रूस के रॉकेट से लॉन्च किया गया था. 
-इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की लंबाई 109 मीटर है. ISS न्यूनतम 330 किलोमीटर और अधिकतम 435 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगा रहा है.
-धरती पर ISS का वजन 4 लाख 20 हजार किलोग्राम होगा. इसे बनाने में 15 हजार करोड़ डॉलर खर्च हुए हैं.
-ISS में एस्ट्रोनॉट के रहने के लिए 6 स्लीपिंग रूम होते हैं. इसमें दो बाथरूम और एक जिम भी है.
-ISS के जिम को एडवांस रेजिस्टिव एक्सरसाइज डिवाइस (ARED) कहते हैं. यहां अंतरिक्ष यात्री वर्कआउट कर सकते हैं. लेकिन वर्कआउट करते समय वैक्यूम सिलिंडर का इस्तेमाल करना पड़ता है, ताकि वजन सिमुलेट हो. ISS में अंतरिक्ष यात्री स्कॉट, डेडलिफ्ट और बेंच प्रेस कर सकते हैं. इससे अंतरिक्ष यात्रियों का मसल मास और बोन डेन्सिटी मेंटेंन रहता है
-ISS में एस्ट्रोनॉट के खाने-पीने, पढ़ने-लिखने, सोने का सारा इंतजाम होता है. उनकी हर एक्टिविटी को धरती से मॉनिटर किया जाता है.
-ISS अभी पृथ्वी के चारों ओर 28 हजार 163 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्कर लगा रहा है.

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को बनाने में किस मेटल का हुआ इस्तेमाल?
-इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में सबसे प्रमुख धातु एल्यूमीनियम और स्टील का इस्तेमाल किया जाता है.
-एल्यूमीनियम हल्की होती है, लेकिन कई उपकरणों में मजबूती की अधिक जरूरत होती है. इस लिहाज से स्टील का भी इस्तेमाल किया जाता है.
-इनके अलावा केवलार (ऊष्मा प्रतिरोधी सिंथेटिक फाइबर) और सिरेमिक का भी खासा इस्तेमाल हुआ. ISS में टाइटेनियम, कॉपर, के साथ कई मिश्रधातु और पॉलीमर का भी इस्तेमाल हुआ है.

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कैसा होगा भारत का स्पेस स्टेशन?
-भारत के स्पेस स्टेशन में 5 मॉड्यूल होंगे. इन्हें अलग-अलग मकसद जैसे एस्ट्रोनॉट के रहने, रिसर्च के लिए, कम्युनिकेशन के लिए किया जाएगा. शुरू में इसे 3 एस्ट्रोनॉट के रहने के लिए डिजाइन किया जाएगा. बाद में इसकी कैपासिटी बढ़ाई जाएगी.
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन कुल मिलाकर 27 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा होगा. यानी इसका साइज एक फुटबाल मैदान (100.58 मीटर लंबा और 64.01 मीटर चौड़ा) के चौथाई हिस्से के बराबर होगी.
-इस स्पेस स्टेशन का वजन 52 टन होगा. ये पृथ्वी की निचली कक्षा में 400 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा. 
-भारत के स्पेस स्टेशन में कई तरह के रिसर्च वर्क के लिए इंटिग्रेटेड रूम होंगे. इसमें एक लिविंग क्वार्टर्स होगा, जहां 3-4 एस्ट्रोनॉट के रहने की जगह होगी. इसका लैबोरेटरी स्पेस साइंटिफिक प्रयोगों के लिए होगा. इसके कंट्रोल सेंटर में स्टेशन की मॉनिटरिंग और आपरेशंस को देखने के साथ एक्सपेरिमेंट्स को चलाने के काम होगा.
-ISS की तरह भारत के स्पेस स्टेशन में भी एक कपोल होगा. यानी बड़ी सी खिड़की. इससे एस्ट्रोनॉट स्पेस से धरती को देख सकेंगे. साथ ही स्पेस में हो रही एक्टिविटी की मॉनिटरिंग कर सकेंगे.
-BAS डॉकिंग और बर्थिंग सिस्टम से भी लैस होगा. इससे स्पेसक्राफ्ट बड़ी आसानी से स्टेशन से जुड़ जाएंगे.
-यही नहीं, BAS बिजली पैदा करने के लिए रोल-आउट सोलर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा.

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शिव शक्ति प्वाइंट को चूमेगा भारत का चंद्रयान-4, ISRO चीफ ने बता दिया पूरा प्लान

ISRO के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स क्या हैं?
-ISRO ने मार्च 2028 में वीनस मिशन यानी शुक्र ग्रह पर एक स्पेस क्राफ्ट भेजने का लक्ष्य बनाया है. इस स्पेस क्राफ्ट का नाम शुक्रयान होगा. किसी ग्रह की ओर भारत का ये दूसरा मिशन होगा. इससे पहले भारत 2014 में मार्स ऑर्बिटर मिशन भेज चुका है.
- शुक्रयान मिशन के लिए 1236 करोड़ रुपये मंज़ूर किए गए हैं. शुक्रयान शुक्र ग्रह के चारों ओर चक्कर लगाने के बाद उसकी सतह की स्टडी करेगा. उसके वायुमंडल, बादलों, उसकी धूल, उसमें उठने वाले ज्वालामुखियों का अध्ययन करेगा.
-इसके अलावा चंद्रयान 4 मिशन के तहत अगले 36 महीनों में 2014 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं. इस मिशन के तहत पांच मॉड्यूल होंगे, जिन्हें दो अलग-अलग समय पर लॉन्च किया जाएगा.
-चंद्रयान 4 मिशन चांद की सतह पर स्पेसक्राफ्ट उतारने, चांद की मिट्टी के सैंपल जुटाने, उन्हें वैक्यूम कंटेनर में स्टोर कर वापस लाने से जुड़ा है. ये मिट्टी उस जगह से लाई जाएगी, जहां चंद्रयान 3 उतरा था. इस जगह को शिव शक्ति पॉइंट कहा जाता है. 
-इसी के तहत चांद की कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों के एक दूसरे से जुड़ने और अलग होने की प्रक्रिया भी शामिल होगी, जिसकी कोशिश भारत ने अभी तक नहीं की है. ये सभी कोशिशें 2040 तक चांद पर किसी भारतीय को उतारने की दिशा में की जा रही हैं.

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-केंद्रीय कैबिनेट ने इसके अलावा किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजने से जुड़े गगनयान मिशन को जारी रखने और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने  लिए 20,193 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
-भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को शुरू करने के लिए दिसंबर 2029 तक की समय सीमा रखी गई है, जिसके तहत सभी लॉन्च और ऑपरेशन पूरे करने होंगे.
-इससे पहले गगनयान मिशन के तहत दो मानवरहित और एक मानवयुक्त मिशन को मंज़ूरी दी जा चुकी है.
-जिस चौथी परियोजना को सरकार ने मंज़ूरी दी है वो है Next Generation Launch Vehicle सूर्य है. ये लॉन्च व्हीकल मौजूदा GSLV और PSLV की जगह लेगा. अभी भारत 10 टन वजन तक के उपग्रहों को भेजने की क्षमता रखता है, जो अगली पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल से 30 टन हो जाएगा.

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क्या कहते हैं ISRO चीफ?
भारत सरकार ने अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा में जो ये लक्ष्य तय किए हैं, वो काफी महत्वाकांक्षी हैं. इन्हें पूरा कैसे किया जा सकेगा? इसी सिलसिले में NDTV ने ISRO के चेयरमैन डॉ. एस सोमनाथ से खास बात की. चंद्रयान-4, चंद्रयान-3 से कितना अलग होगा? इसके जवाब में एस सोमनाथ कहते हैं, "चंद्रयान-3 में हमने चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की. प्रज्ञान रोवर ने कई साइंटिफिक एक्सपीरिमेंट किए. चंद्रयान-3 ने चांद के जिस जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी, चंद्रयान-4 का मिशन वहीं से शुरू होगा. चंद्रयान-4 शिव शक्ति पॉइंट (चंद्रयान-3 के सॉफ्ट लैंडिंग वाली जगह) की मिट्टी, चट्टानों और धूल के सैंपल कलेक्ट करेगा. 2040 तक चांद पर भारतीय को उतारने की दिशा में चंद्रयान-4 अहम मिशन है."

डॉ. एस सोमनाथ ने कहा, "चंद्रयान-3 धरती पर वापस नहीं आया. लेकिन चंद्रयान-4 वापस लौटेगा. पहली बार हम चांद की सतह से कुछ पत्थर और मिट्टी के सैंपल भारत लेकर आएंगे. हालांकि, चंद्रयान-4 मिशन इतना आसान भी नहीं होगा. इसके मॉड्यूल का डिजाइन करना है, दो अलग-अलग लॉन्चिंग है. डॉकिंग भी एक बड़ा चैलेंज है. उसके बाद चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करना है. फिर रोबोटिक आर्म्स से सैंपल कलेक्ट करना, उसके बाद टेक-ऑफ करके धरती पर वापस आना. ये बहुत चुनौतीभरा काम है. लेकिन हम इसके लिए तैयार हैं."

नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल क्या है?
इसके जवाब में एस सोमनाथ कहते हैं, "अभी हम दो तरह के लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करते हैं. PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) और GSLV (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल). अब हम नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल यानी NGLV के निर्माण पर विचार कर रहे हैं. इसे जियो स्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट में 10 टन की पेलोड कैपासिटी के साथ लाया जाएगा. ये मिथेन-इथेन और क्रायोजेनिक गैस से चलेगा."
 


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Wednesday, 18 September 2024

एयरपोर्ट पर सेकंडों में क्लियर होगा इमिग्रेशन, नहीं लगना होगा लंबी कतार में; जानिए क्या है प्रोसेस

इमिग्रेशन (Immigration) की प्रक्रिया को पूरा करने में लगने वाले समय को न्यूनतम 30 मिनट से घटाकर मात्र कुछ सेकंड करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. केंद्र ने दिल्ली एयरपोर्ट पर एक फास्ट-ट्रैक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसे जल्द ही 20 अन्य शहरों में विस्तारित किया जाएगा.  22 जून को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा शुरू किए गए फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम (FTI-TTP) के तहत, पूर्व-सत्यापित यात्रियों को इमिग्रेशन के लिए एक आसान बायोमेट्रिक्स का उपयोग किया जा रहा है. यह प्रक्रिया यात्रियों के आने और जाने दोनों ही समय लागू होगी. 

7 प्रमुख एयरपोर्ट पर जल्द होगी शुरुआत
इस कार्यक्रम को सात प्रमुख एयरपोर्ट मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, अहमदाबाद  - तक विस्तारित करने के लिए काम शुरू हो गया है और यह जल्द ही देश भर के 21 एयरपोर्ट पर उपलब्ध होगा. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी के साथ बात करते हुए कहा कि जिन यात्रियों ने पहले ही प्रक्रिया को पूरा कर लिया होगा उन्हें स्वचालित गेट (ई-गेट) का उपयोग करने और इमिग्रेशन के लिए लगी लंबी कतार में लगने की प्रक्रिया से छुट्टी मिल जाएगी. 

यह प्रोसेस जल्द ही मुंबई, चेन्नई और कोलकाता और फिर अन्य शहरों में शुरू होगा. इसके तहत, पूर्व-सत्यापित भारतीय नागरिकों और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों की इमिग्रेशन प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाती है. इसका उद्देश्य तेज, सहज और अधिक सुरक्षित इमिग्रेशन मंजूरी के साथ अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को सुविधाजनक बनाना है.  अधिकारी के अनुसार, एफटीआई-टीटीपी दिल्ली एयरपोर्ट पर पहले ही सफल हो चुका है और 18,400 व्यक्तियों (भारतीय पासपोर्ट और ओसीआई कार्ड धारक) ने इसके लिए रजिस्टर करवाया था. 

यह कैसे काम करता है? 
एफटीआई-टीटीपी को एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है और इमिग्रेशन ब्यूरो इस कार्यक्रम के तहत यात्रियों की विभिन्न श्रेणियों के फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन के लिए नोडल एजेंसी है. आवश्यक सत्यापन के बाद, यात्रियों को ई-गेट के माध्यम से वाइट लिस्ट में डाल दिया जाता है. इस तरह के यात्रियों को 'विश्वसनीय यात्री' के तौर पर इमिग्रेशन की प्रक्रिया के दौरान देखा जाता है. 

जब पंजीकृत यात्री ई-गेट पर पहुंचते हैं, तो वे अपनी उड़ान का विवरण प्राप्त करने के लिए एयरलाइंस द्वारा जारी बोर्डिंग पास को स्कैन करते हैं. पासपोर्ट को भी स्कैन किया जाता है और यात्री के बायोमेट्रिक्स को प्रमाणित किया जाता है. एक बार जब यात्री की पहचान स्थापित हो जाती है और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण हो जाता है, तो ई-गेट स्वचालित रूप से खुल जाता है और इमिग्रेशन को मंजूरी दी गई मानी जाएगी.

कैसे करें अप्लाई?
योग्य व्यक्तियों को www.ftittp.mha.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और आवश्यक विवरण प्रदान करना होगा, जिसे इमिग्रेशन ब्यूरो द्वारा सत्यापित किया जाएगा. उनके आवेदन स्वीकृत होने के बाद, उन्हें अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट या निकटतम विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में अपने बायोमेट्रिक्स प्रदान करने के लिए नियुक्ति निर्धारित करने के लिए एक संदेश प्राप्त होगा. 

एफटीआई पंजीकरण अधिकतम पांच साल या पासपोर्ट की वैधता तक, जो भी पहले हो, वैध होगा. अधिकारियों ने कहा कि बायोमेट्रिक्स प्रदान करना अनिवार्य है और आवेदकों को एफटीआई-टीटीपी के लिए आवेदन करते समय कम से कम छह महीने की न्यूनतम पासपोर्ट वैधता सुनिश्चित करनी होगी. 

एक अधिकारी ने कहा, यह कार्यक्रम, जो इमिग्रेशन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को भी कम करेगा, दो चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्डधारकों को शामिल किया जाएगा और अगले चरण में विदेशियों को शामिल किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक हेल्पडेस्क ईमेल आईडी भी साझा की है: india.ftittp-boi@mha.gov.in



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Tuesday, 17 September 2024

साल में केवल 15 दिन खुलता है बिहार का ये रेलवे स्टेशन, देशभर से आते हैं लोग

देश में आपने एक से एक बड़े और छोटे से छोटे रेलवे स्‍टेशन देखे होंगे. उनमें कुछ में जरूर आपको कुछ न कुछ खास लगा होगा. हालांकि बिहार (Bihar) का एक स्‍टेशन अपने आप में सबसे अलग है. कारण है कि यह स्‍टेशन साल भर में बिलकुल सुनसान रहता है. यहां न ट्रेन रुकती है और न कोई यात्री ही नजर आता है. हालांकि साल भर में 15 दिन ऐसे होते हैं, जब इस स्‍टेशन पर ट्रेनें रुकती हैं. 

औरंगाबाद के अनुग्रह नारायण रोड के पुनपुन घाट रेलवे स्टेशन पर महज 15 दिनों के लिए सवारी गाड़ियों का ठहराव होता है. यहां पर पितृपक्ष के दौरान गयाजी में श्राद्ध से पूर्व पिंडदान करने के लिए बड़ी संख्‍या में लोग आते हैं और अपने पितरों को प्रथम श्राद्ध अर्पण करते हैं. 

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17 सितंबर से ट्रेनों के ठहराव के आदेश 

गया-डीडीयू रेलखंड पर स्थित इस पुनपुन घाट रेलवे स्टेशन पर रेलवे विभाग ने इस बार भी 17 सितंबर से 9 जोड़ी गाड़ियों के ठहराव का आदेश जारी कर दिया है. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी देश के कोने कोने से आने वाले पिंडदानियों के लिए जिला प्रशासन के द्वारा कोई भी सुविधा उपलब्‍ध नहीं कराई जा रही है. 

यहां आने वाले यात्रियों के लिए न किसी तरह की सुरक्षा है और न ही स्‍टेशन पर एक अदद टिकट काउंटर तक का प्रबंध किया गया है, जबकि पुनपुन नदी में श्राद्ध अर्पण को लेकर बड़ी संख्या में पिंडदानी यहां पहुंचते हैं. 

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तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर व्‍यवस्‍थाओं की जरूरत 

ग्रामीण रंजन कुमार ने कहा कि यहां पर रोड की हालत खराब है. यहां पर रोड बेहतर होनी चाहिए. साथ ही उन्‍होंने कहा कि यहां पर आने वाले लोगों के लिए पेयजल की व्‍यवस्‍था और चेंजिंग रूम होना चाहिए. बहुत सी ऐसी व्‍यवस्‍थाएं हैं, जो तीर्थयात्रियों के लिए बेहद जरूरी है. 

इस रेलवे स्टेशन की जब शुरुआत हुई थी, तब रेलवे की तरफ से यहां हर तरह का इंतजाम किया जाता था. हालांकि धीरे-धीरे यह सब कुछ समाप्त हो गया. वहीं औरंगाबाद जिला प्रशासन भी इसे लेकर उदासीन ही नजर आता है. हालांकि औरंगाबाद के डीएम का कहना है कि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्‍यान रखा जाएगा. 
 



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Monday, 16 September 2024

बिहार के जमुई जिले में बने बेली ब्रिज का एक हिस्सा झुका, पिछले साल ही हुआ था निर्माण

Bailey Bridge Tilted : बिहार (Bihar) के जमुई जिले में बरनार नदी पर बने बेली ब्रिज का एक हिस्सा सोमवार को अचानक एक तरफ झुक गया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. जमुई की जिलाधिकारी (डीएम) अभिलाषा शर्मा ने कहा, ‘‘यह घटना सोमवार सुबह हुई, जब बरनार नदी पर बने बेली ब्रिज का एक हिस्सा अचानक एक तरफ छह इंच झुक गया. पुल पर यातायात की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है और तकनीकी विशेषज्ञ इसकी मरम्मत में लगे हुए हैं.''उन्होंने बताया कि पुल पांच दिनों में पूरी तरह से चालू हो जाएगा.

गौरतलब है कि इस बेली ब्रिज का निर्माण पिछले वर्ष पथ निर्माण विभाग द्वारा कराया गया था. यह घटना हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में एक दर्जन से अधिक पुलों के ढह जाने की पृष्ठभूमि में सामने आई है. बिहार के सीवान, सारण, मधुबनी, अररिया, पूर्वी चंपारण और किशनगंज आदि जिलों से हाल के दिनों में छोटे पुलों के ढहने की घटनाएं सामने आईं थीं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबंधित विभागों की हाल ही में समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों को राज्य के सभी पुराने पुलों का सर्वेक्षण करने और मरम्मत की आवश्यकता वाले सभी पुलों की पहचान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था. मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को राज्य में पुलों के रखरखाव की नीति तुरंत तैयार करने के लिए भी कहा था.



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