Saturday, 5 October 2024

क्या एग्जिट पोल के नतीजों से बढ़ा है कुमारी शैलजा का सीएम पद पर दावा, क्या हैं समीकरण

हरियाणा विधानसभा चुनाव का मतदान आज पूरा हुआ. चुनाव आयोग के मुताबिक 61.61 फीसदी मतदान हुआ है.इसके साथ ही विभिन्न सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल के नतीजे भी जारी किए.इनके पोल्स ऑफ पोल्स के मुताबिक राज्य में बहुमत के साथ सरकार बनाती हुई नजर आ रही है. उसे 55 सीटें मिलती हुई नजर आ रही हैं. इससे उसे वहां सरकार बनाने में कोई परेशानी नहीं पेश आएगी. हरियाणा में सरकार बनाना भले ही कांग्रेस के लिए आसान हो,लेकिन मुख्यमंत्री चुनना उसके लिए कठिनाई लेकर आएगा क्योंकि राज्य में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं. 

कौन बनेगा हरियाणा का अगला मुख्यमंत्री

हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं. वो राज्य में लगातार दो बार कांग्रेस की सरकार चला चुके हैं. इस बार भी उन्होंने काफी मेहनत की है. इसमें उनके बेटे दिपेंद्र हुड्डा का भी साथ मिला है. बाप-बेटे की इस जोड़ी ने इस बार जमकर पसीना बहाया है. लेकिन हुड्डा परिवार के लिए मुख्यमंत्री के कुर्सी तक जाने की राह आसान नहीं है. क्योंकि उनको कई लोगों से चुनौती मिल सकती है. इसमें एक बड़ा नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा का है. दलित समाज से आने वाली शैलजा राज्य की वरिष्ठ नेता हैं. 

राज्य में चुनाव प्रचार के जोर पकड़ने से पहले शैलजा इस बात से नाराज थीं कि उनके समर्थकों को टिकट बंटवारे में तवज्जो नहीं दी गई. सारा का सारा टिकट हुड्डा के कहने पर दिए गए.सिरसा की सांसद खुद विधानसभा का टिकट मांग रही थीं, लेकिन उन्हें टिकट मांग रही थीं. लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. इस बात से वो काफी नाराज थीं. इस बीच रही-सही कसर हुड्डा के एक समर्थक ने उनके खिलाफ जातिगत टिप्पणी करके पूरी कर दी. शैलजा को मनाने के लिए कांग्रेस आलाकमान तक को दखल देना पड़ा. यहां तक की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने अपनी दो रैलियों को स्थगित कर दिया. शैलजा को मनाने के लिए राहुल गांधी ने हरियाणा में अपने चुनावी दौरे की शुरूआत उस असंध सीट से की, जहां से शैलजा का समर्थक कांग्रेस उम्मीदवार था. दरअसल शैलजा विधानसभा चुनाव इसलिए लड़ना चाहती थीं ताकि मुख्यमंत्री पद पर उनकी दावेदारी मजबूत हो सकी.विधानसभा चुनाव में एक और बड़ा नेता टिकट का दावेदार था. वह हैं रणदीप सिंह सुरजेवाला. वो अभी राज्य सभा के सदस्य हैं. शैलजा और सुरजेवाला हुड्डा विरोधी खेमे के नेता माने जाते हैं. 

हरियाणा में कांग्रेस को कितनी सीटें मिल सकती हैं

एग्जिट पोल में जितनी सीटें कांग्रेस को मिलती दिखाई गई हैं, वो अकेले हुड्डा के जाट बिरादरी के बल पर नहीं मिल सकती हैं. आजकल हरियाणा में हुड्डा जाट बिरादरी के निर्विवाद नेता हैं. हरियाणा में जाट बिरादरी की आबादी करीब 27 फीसदी है. वहीं दलित वोट भी 20 फीसदी से अधिक है. इसके बाद करीब 30 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग का वोट है. ओबीसी हरियाणा में बीजेपी का वोटर है. लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद से दलित भी कांग्रेस से जुड़े हैं. इसी वजह से 2019 के लोकसभा चुनाव में शून्य सीटें जीतने वाले कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में नौ सीटों पर लड़कर पांच सीटें जीतने में कामयाब रही. कांग्रेस की इस जीत में जाट के साथ-साथ दलितों का भी योगदान माना गया.

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हरियाणा में दलित वोट और कांग्रेस

हरियाणा में दलित वोट कांग्रेस के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह समझ सकते हैं कि कांग्रेस पिछले दो दशक से वहां अपना अध्यक्ष पद दलित को ही सौंप रही है. इस क्रम में फूलचंद मुलाना, अशोक तंवर, कुमारी शैलजा और अभी के प्रदेश अध्यक्ष उदय भान का नाम आता है. कांग्रेस अभी राष्ट्रीय राजनीति में जिस हालात में है, वह अपना कोई भी समर्थक वर्ग नहीं खोना चाहती है. इसलिए मतदान से 48 घंटे पहले कांग्रेस ने बीजेपी के दलित नेता अशोक तंवर को अपने पाले में कर लिया. हालांकि तंवर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी. लेकिन हुड्डा से मतभेद की वजह से कांग्रेस छोड़ गए थे. वो फिर कांग्रेस में वापस आ गए हैं. कांग्रेस के इस कदम को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर को जवाब माना जा रहा है, जो नाराजगी की खबरों के बीच उन्होंने शैलजा को बीजेपी में आने का न्योता दिया था. कांग्रेस हर चुनाव में संविधान को खतरे का मुद्दा या आरक्षण के खतरे का मुद्दा दलितों को अपने पाले में ही करने के लिए उठा रही है.

कुमारी शैलजा की दावेदारी

इस राजनीतिक हालात को देखते हुए कुमारी शैलजा हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद की प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं. अभी यह पता नहीं चल पाया है कि वो किन शर्तों पर अपनी नाराजगी छोड़ के चुनाव प्रचार करने आई हैं. लेकिन मतदान के दिन भी कुमारी शैलजा ने इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री पद पर  अपना दावा ठोक ही दिया. हिसार में जब उनसे यह पूछा गया कि हर नेता का वक्त आता है तो उनकी बारी आने में किसी को क्या परेशानी है? पार्टी नेतृत्व के फैसले से आपको कोई परेशानी है? इस पर शैलजा ने कहा कि किसी को कोई परेशानी नहीं हैं. हमारी पार्टी बड़ी पार्टी है. पार्टी हाईकमान जो फैसला करता है हम उसे मानता हैं. यह हमारी परंपरा है.शैलजा का यह बयान बताता है कि मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा उन्होंन अभी छोड़ा नहीं है.आगे-आगे देखिए होता है क्या. 

ये भी पढ़ें: EXIT POLL: हरियाणा में कांग्रेस की आंधी, आखिर बीजेपी क्यों हो गई फेल?



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Friday, 4 October 2024

Haryana Assembly Election 2024 Voting: हरियाणा चुनाव में राजनीतिक दलों के साथ-साथ रिश्ते भी दांव पर

Haryana Polls 2024:  वैसे तो हर चुनाव राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले नेताओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 (Haryana Assembly Election 2024) भाजपा (BJP), जजपा (JJP), कांग्रेस (Congress), आम आदमी पार्टी (AAP) सहित इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. यह चुनाव इन राजनीतिक दलों का भविष्य तय करेगा. ऐसा क्यों है, यह जानने से पहले ये जान लें कि पिछले हरियाणा विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं थीं.

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भाजपा के लिए क्यों जरूरी?

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भाजपा के लिए हरियाणा चुनाव साख बचाने का सवाल है. अगर वो हार गई तो देश में ये मैसेज चला जाएगा कि भाजपा का स्वर्णिम युग अब ढलान पर है. विपक्ष मजबूत हो जाएगा और उसके गठबंधन में शामिल साथी दल भी उससे दूर होने लगेंगे. आगे आने वाले चुनावों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हो जाएगा. इससे भी बढ़कर देश पर इसका असर पड़ेगा. केंद्र सरकार कमजोर हो जाएगी और बड़े फैसले लेने से बचेगी. साथ ही मध्यावधी चुनाव का खतरा भी बढ़ जाएगा. कारण ये है कि अभी केंद्र में भाजपा गठबंधन सहयोगियों के कारण सत्ता में है. लोकसभा चुनाव में पुराना प्रदर्शन नहीं दोहरा पाने के बाद हरियाणा में हार भाजपा के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगी.

कांग्रेस का क्या दांव पर?

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कांग्रेस लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद से काफी जोश में है. हरियाणा को तो वो जीता हुआ मानकर चल रही है. जम्मू-कश्मीर में तो वो नेशनल कांफ्रेंस की जूनियर पार्टनर बनकर मैदान में है. हरियाणा में हार या जीत ही कांग्रेस की प्रतिष्ठा को तय करेगा. अगर वह जीत गई तो विपक्षी गठबंधन इंडिया एकजुट होकर आगे भी मोदी सरकार की परेशानी बढ़ाएगा और अगर हार गई तो फिर उससे अन्य दल पीछा छुड़ाएंगे. आप ने तो पहले ही किनारा कर लिया है.इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए भी ये करो और मरो वाला चुनाव है. अगर कांग्रेस हार गई तो उनके पास रिटायर होने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा. वहीं अगर जीत गई तो मुख्यमंत्री की कुर्सी के सबसे बड़े दावेदार वो ही रहेंगे.

चौटाला परिवार का क्या होगा? 

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दुष्यंत चौटाला और अभय सिंह चौटाला के लिए भी ये चुनाव करो या मरो की तरह है. दुष्यंत चौटाला पिछले पांच साल तक सत्ता में रहकर मजबूत हो चले थे, लेकिन भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद उनके अपने सहयोगी भी उनका साथ छोड़ गए. अगर इस चुनाव में वो 8-10 सीटें भी नहीं जीत पाए तो उनके लिए पार्टी बचाए रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा. वहीं उनके चाचा अभय सिंह चौटाला के लिए भी ये चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है. अगर इस चुनाव में इनेलो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई तो उसका भविष्य अंधकार में चला जाएगा. इस चुनाव में हार के बाद उसे प्रत्याशी भी आगे के चुनावों में उतारना मुश्किल हो जाएगा.  हालांकि, सत्ता की इस लड़ाई में खिलाड़ियों के साथ-साथ कई परिवारों के सदस्य भी आमने-सामने हैं.

आम आदमी पार्टी का क्या?

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अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी इस बार ये उम्मीद पाले हुए है कि वह किंगमेकर बनकर उभरेगी. इसके लिए अरविंद केजरीवाल समेत उनकी पूरी टीम पूरा जोर लगाए हुए है. अगर वो सफल हो गए तो उनकी पार्टी का कद बढ़ जाएगा और आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके लिए माहौल सेट हो जाएगा. इससे उन्हें भाजपा के खिलाफ मनोवैज्ञानिक जीत भी हासिल हो जाएगी. आप यह दावा कर पाएगी कि उसने हरियाणा से भाजपा को सत्ता से बाहर करवा दिया. हालांकि, अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के लिए मुश्किल और बढ़ जाएगी. दिल्ली की जनता के सामने वो एक हारे हुई नेता और पार्टी के रूप में विधानसभा चुनाव में जाएंगे. साथ ही अरविंद केजरीवाल की छवि पर भी बट्टा लगेगा.

चाचा-भतीजे की लड़ाई

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इस चुनाव में सबसे रोचक मुकाबला पंजाब से लगती डबवाली सीट पर हुआ.यहां चौटाला परिवार के दो सदस्य आदित्य देवीलाल चौटाला और दिग्विजय चौटाला आमने-सामने है. ये दोनों रिश्ते में चाचा-भतीजे लगते हैं. देवीलाल की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल से निकलकर बनी जन नायक जनता पार्टी (जजपा) ने डबवाली सीट पर अपने प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतारा है. आदित्य आईएनएलडी से चुनाव लड़ रहे हैं.  

भाई-बहन का मुकाबला

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भिवानी जिले की तोशाम विधानसभा सीट पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. वहीं कांग्रेस ने बंसीलाल के पोते और रणबीर महेंद्रा के बेटे अनिरुद्ध चौधरी को टिकट दिया है.तोशाम में दोनों बंसीलाल की राजनीतिक विरासत हासिल करने की लड़ाई में हैं. 

दादा-पोते का रण

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सबसे दिलचस्प मुकाबला सिरसा जिले की रानियां विधानसभा क्षेत्र में हो रहा है.रानियां में 2019 में रणजीत सिंह चौटाला निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते थे.उन्होंने बीजेपी को समर्थन दिया था. वो बीजेपी सरकार में पांच साल तक बिजली व जेल जैसे विभागों के मंत्री रहे. रानियां में इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) ने अपने वरिष्ठ नेता अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला को उम्मीदवार बनाया है. अर्जुन का यह पहला चुनाव है. वो पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं. रणजीत चौटाला रिश्ते में अर्जुन के दादा लगते हैं.वो ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई हैं.

जानिए किस सीट से कौन उम्मीदवार-

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इन दो पर भी खास नजर

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कांग्रेस ने कैथल से आदित्य सुरजेवाला और कलायत से विकास सहारण को उम्मीदवार बनाया है.आदित्य कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला और विकास हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश के बेटे हैं. इस चुनाव से इन दोनों नेताओं ने अपने बेटों को लॉन्च किया है. सुरजेवाला और जयप्रकाश ने पिछला विधानसभा चुनाव इन्हीं सीटों से लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

विनेश फोगाट की राह में ये

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हरियाणा विधानसभा के चुनाव में इस बार कुछ खिलाड़ी भी अपनी राजनीति किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें ओलंपियन से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के खिलाड़ी शामिल हैं.राजनीतिक दलों ने चार खिलाड़ियों पर दांव खेला है.हरियाणा के चुनाव में इस बार सबसे अधिक नजर जिस सीट पर रहेगी, वो है जिंद जिले की जुलाना सीट. इसकी वजह यह है कि यहां से पेरिस ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहलवान विनेश फोगाट चुनाव मैदान में हैं. उन्हें कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है.उनकी ससुराल इसी इलाके में है.विनेश का जुलाना में मुकाबला भारत की पहली महिला डब्ल्यूडब्लयूई रेसलर कविता दलाल और एअर इंडिया के पूर्व कैप्टन योगेश बैरागी से है. वहीं निवर्तमान विधायक अमरजीत सिंह ढांडा को जननायक जनता पार्टी ने मैदान में उतारा है.कविता जिंद की ही रहने वाली हैं.कविता ने 2016 में 12वें एशियन गेम्‍स में वेट लिफ्टिंग में गोल्‍ड मेडल जीता था.इसके बाद वो द ग्रेट खली के कॉन्टिंनेंटल रेस्लिंग एंटरटेनमेंट से जुड़कर पेशेवर कुश्ती में आईं.यहां वह सलवार कुर्ता पहनकर रिंग में उतरीं. इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले ली. वो पार्टी की खेल विभाग की हरियाणा इकाई की प्रमुख हैं.  जुलाना में कविता के उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है. 

कबड्डी खिलाड़ी भी मैदान में

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बीजेपी ने भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दीपक राम निवास हुड्डा को मेहम से टिकट दिया है.रोहतक में 10 अप्रैल 1994 को एक किसान परिवार में पैदा हुए दीपक ने छोटी उम्र में ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था. डुबकी किंग के नाम से भी मशहूर हैं.महम में ही आने वाले निंदाना गांव में उनकी ननिहाल है.महम में उनका मुकाबला कांग्रेस के बलराम दांगी से है. 

शूटर का निशाना लगेगा?

बीजेपी ने अटेली विधानसभा सीट से अंतरराष्ट्रीय शूटर आरती राव को मैदान में उतारा है. वो बीजेपी और कांग्रेस से छह बार सांसद और चार बार विधायक रह चुके अहीरवाल के कद्दावर नेता राव इंद्रजीत सिंह की बेटी हैं.राव इंद्रजीत सिंह नरेंद्र मोदी की तीनों सरकारों में मंत्री रहे हैं. आरती ने चार एशियाई चैंपियनशिप पदक जीते हैं. वो हरियाणा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष भी हैं.उन्होंने 2017 में खेलों से संन्यास ले लिया था.अटेली में आरती राव का मुकाबला कांग्रेस की अनीता यादव और निर्दलीय संतोष यादव से होगा.आम आदमी पार्टी के सुनील राव मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाएंगे.संतोष टिकट ने मिलने से नाराज होकर बीजेपी छोड़कर निर्दलीय मैदान में कूद गईं हैं. वो 2014 में विधायक चुनी गईं थीं. 
 



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हरियाणा-J&K एग्जिट पोल के रिजल्‍ट कल, जानिए क्‍या होता है एग्जिट पोल और कहां-कैसे देखें 

Exit Polls 2024 : हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Elections) और जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा चुनाव (Jammu-Kashmir Assembly Elections) के लिए शनिवार शाम को एग्जिट पोल आएंगे. हरियाणा में सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होना है. इसके बाद ही एग्जिट पोल आने शुरू हो जाएंगे. हर किसी को इस बात का इंतजार है कि इन दोनों राज्‍यों में किसकी सरकार बनेगी और कौनसा दल सबसे ज्‍यादा सीटों पर जीत हासिल करेगा. इसके संकेत एग्जिट पोल देंगे. जम्‍मू कश्‍मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ है, इसलिए एग्जिट पोल को लेकर बेसब्री कुछ ज्‍यादा है. वहीं हरियाणा में पिछले 10 साल से भाजपा सत्ता पर काबिज है और वह हैट्रिक लगाएगी या नहीं, इस सवाल के जवाब का बहुत से लोगों को इंतजार है. 

क्‍या होता है एग्जिट पोल 

एग्जिट पोल एक तरह से चुनावी सर्वे होता है. देश भर की कई एजेंसियां, न्‍यूज चैनल और समाचार पत्रों की ओर से एग्जिट पोल किया जाता है. इसके जरिये जनता के रुझान को पता करने की कोशिश की जाती है. इसमें निश्चित प्रश्‍नों की एक सूची होती है, जिसके जरिये लोगों सवाल किये जाते हैं और फिर उन सवालों के जरिये यह पता लगाया जाता है कि जनता का रुझान किस तरफ है. साथ ही अनुमान लगाया जाता है कि कौनसा राजनीतिक दल कितनी सीटों पर काबिज हो सकता है और कौनसा दल सरकार बना सकता है. 

कहां देख सकते हैं एग्जिट पोल 

दोनों ही राज्‍यों के विधानसभा चुनावों के लिए शनिवार शाम से एग्जिट पोल के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे. एग्जिट पोल देखने के लिए आप एनडीटीवी इंडिया से जुड़ सकते हैं. साथ ही NDTV.in और https://ndtv.in/elections पर जाकर भी आप एग्जिट पोल के रुझानों को जान सकते हैं. 

हरियाणा में कल होना है मतदान 

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को मतदान होना है. राज्‍य की सभी 90 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इस चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा, कांग्रेस प्रत्याशी विनेश फोगाट और जजपा के दुष्यंत चौटाला सहित 1027 अन्य उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. सत्तारूढ़ भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता हासिल करने की कोशिश में है तो कांग्रेस एक दशक बाद सरकार में वापसी की उम्मीद कर रही है. हरियाणा में कुल 1,031 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें से 101 महिलाएं हैं. इन उम्मीदवारों में 464 निर्दलीय हैं. 

8 अक्‍टूबर को आएंगे चुनावी नतीजे 

वहीं जम्‍मू-कश्‍मीर में 18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्‍टूबर को सभी तीन चरणों की वोटिंग हो चुकी है. जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एक बयान में बताया कि तीनों चरणों के बाद कुल 63.45 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो हाल ही के लोकसभा चुनावों में दर्ज मतदान से अधिक है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण के मतदान में करीब 61.38 प्रतिशत, दूसरे चरण में करीब 57.31 प्रतिशत और अंतिम चरण में करीब 69.65 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. जम्मू कश्मीर विधानसभा में 75 वर्षों से मताधिकार से वंचित पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों, वाल्मीकि और गोरखाओं ने पहली बार मतदान किया है.

हरियाणा और जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 अक्‍टूबर को आएंगे. 



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Thursday, 3 October 2024

रजामंदी के साथ लंबे वक्त से चल रहे फिजिकल रिलेशन को नहीं माना जा सकता रेप : HC

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बालिग जोड़े के बीच लंबे समय तक सहमति से चले रिलेशनशिप को रेप नहीं माने जाने का आदेश दिया है. गुरुवार को हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के रेप से जुड़े एक मामले में याची की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "अगर लंबे समय से लगातार सहमति से शारीरिक संबंध बनाए जा रहे थे. साथ ही किसी रिश्ते में शुरुआत से ही धोखाधड़ी का कोई तत्व न हो, तो ऐसा रिश्ता रेप नहीं माना जाएगा." 

हाईकोर्ट ने रेप और जबरन वसूली के आरोपी याची के खिलाफ चार्जशीट और पूरी आपराधिक कार्यवाई को रद्द  करते हुए उसकी याचिका को मंजूर कर लिया. यह आदेश जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच ने श्रेय गुप्ता द्वारा दाखिल CrPC की धारा 482 की एप्लीकेशन को मंजूर करते हुए दिया है.

समझिए पूरा मामला?
याची श्रेय गुप्ता ने सेशन जज मुरादाबाद की कोर्ट में लंबित संपूर्ण आपराधिक कार्यवाई और चार्जशीट को रद्द करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता के खिलाफ साल 2018 में मुरादाबाद के महिला थाना में IPC की धारा 376 और 386 में मामला दर्ज हुआ था. आपराधिक कार्यवाई 21 मार्च, 2018 को शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुई थी. इसमें याची पर रेप और जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था. याचिका में कहा गया था कि 12 साल से अधिक समय तक चलने वाले सहमति से बने संबंध को सिर्फ शादी करने के वादे के उल्लंघन के आधार पर रेप नहीं माना जा सकता.

महिला ने लगाए ये आरोप
मुरादाबाद की एक महिला ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि याची ने उसके पति के गंभीर रूप से बीमार होने के दौरान उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की शुरुआत की. उसके पति की मौत के बाद उससे शादी करने का वादा किया. महिला के पति के गुजर जाने के बाद भी यह रिश्ता जारी रहा, लेकिन याची ने आखिरकार 2017 में दूसरी महिला से सगाई कर ली.

याची के खिलाफ शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि 17 जनवरी 2018 की शाम को याची श्रेय गुप्ता ने कथित रूप से महिला को फोन करके कहा कि वह रामपुर दोराहा आ जाए, जहां वह उससे मंदिर में शादी करेगा. बाद में वो कोर्ट में अपनी शादी को रजिस्टर्ड कराएंगे.

जान की धमकी देकर रेप का आरोप
FIR में आरोप लगाया गया कि याची के इस आश्वासन पर महिला रामपुर दोराहा पहुंच गई. वहां से याची महिला को रामपुर दोराहा स्थित एक गोदाम में ले गया. महिला का आरोप है कि याची ने सिर पर तमंचा लगाकर उसे जान से मारने की धमकी दी. फिर उसके साथ रेप किया. इसकी वीडियो क्लिपिंग भी तैयार कर ली. उसके बाद याची ने शादी करने से इनकार कर दिया. उसे धमकी दी कि इस घटना के बारे में किसी को बताया, तो उसकी वीडियो क्लिप इंटरनेट पर डाल दी जाएगी. 

50 लाख की डिमांड का भी आरोप
महिला ने ये भी आरोप लगाया गया कि याची ने उससे 15 दिन के अंदर 50 लाख रुपये की मांग की. उसे धमकी भी दी कि अगर उसकी मांग पूरी नहीं की गई, तो वह उसके दोनों बेटों को मार देगा. साथ ही वीडियो क्लिप सार्वजनिक कर देगा. 

इन आरोपों के बाद याची के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. मामले में पुलिस जांच में ये भी सामने आया की आवेदक और शिकायतकर्ता महिला के बीच एक करोड़ रुपये रुपये की राशि के संबंध में वित्तीय विवाद था. इससे बचने के लिए महिला ने FIR दर्ज कराई है. जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) रिपोर्ट भी जांच अधिकारी को मिली, जिससे जांच अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला कि  FIR में घटनास्थल पर आवेदक का होना और विपक्षी की CDR रिपोर्ट नेगेटिव है. मेडिकल रिपोर्ट ने भी रेप की घटना का समर्थन नहीं किया है.

व्यक्ति ने दी ये दलीलें
महिला के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए याची ने कहा कि यह रिश्ता पूरी तरह से आपसी सहमति से था. यह रिश्ता करीब 12-13 साल तक चला. इस दौरान शिकायतकर्ता के पति भी जीवित थे. कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों की दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने मामले के अभिलेख का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है. निर्विवाद रूप से इस मामले में स्वीकृत तथ्य यह है कि मामला दर्ज करवाने के समय शिकायतकर्ता की उम्र लगभग 49 वर्ष थी जैसा कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत उसके बयान से पता चलता है और आवेदक से बहुत छोटी थी. 

इस मामले में यद्यपि चार्जशीट धारा 376 के साथ-साथ 386 आईपीसी के तहत अपराधों के लिए दायर की गई थी, लेकिन मजिस्ट्रेट ने आवेदक के विरुद्ध केवल धारा 376 आईपीसी के तहत अपराध के लिए संज्ञान लिया है. इसलिए आगे बढ़ने से पहले धारा 375 और 376 आईपीसी के प्रावधानों पर ध्यान देना उचित होगा. 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के भी कई महत्वपूर्ण फैसलों के जिक्र किया और कहा कि यह स्पष्ट है कि यदि पक्षकार लंबे समय से लगातार सहमति से शारीरिक संबंध बना रहे थे. उसमें शुरू से ही धोखाधड़ी का कोई तत्व नहीं था तो ऐसा संबंध रेप नहीं माना जा सकता है.


 



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Wednesday, 2 October 2024

Exclusive: 'ईरान से डील करना आता है...' - अब क्या करेगा इजरायल? राजदूत ने बताया

Iran-Israel conflict: इजरायल के राजदूत ने कहा कि, ''ईरान का इजरायल पर हमला सिर्फ मिसाइलों की बौछार नहीं थी, यह 181 बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार थी, जिनमें से प्रत्येक में 700 से 1,000 किलोग्राम का वारहेड पेलोड था, जो कि पूरी बिल्डिंगों को नष्ट कर सकता है. यह हमारे युद्ध के इतिहास में अभूतपूर्व है.'' भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार (Reuven Azar) ने बुधवार को एनडीटीवी से बातचीत में यह बात कही.  

रूवेन अजार ने कहा कि, ''इजरायल को ईरान से डील करना आता है. खतरा अभी भी है, लेकिन हम खुद की सुरक्षा करना आता हैं. कई आतंकी संगठन हमें कमजोर समझते हैं. हम अपने दुश्मनों का बहुत नुकसान करने में सक्षम हैं. हम हमारे लोगों की रक्षा के लिए कुछ भी करने के लिए सक्षम हैं.'' 

उन्होंने कहा कि, ''इजरायल तनाव नहीं बढ़ाना चाहता था. हम युद्ध को गाजा पट्टी पर ही रोकना चाहते थे. हिज्बुल्लाह ने हमारी औरतों और बच्चों के साथ गलत किया. हमने 11 महीने तक शांति की कोशिश की. हिज्बुल्लाह को हमारे बॉर्डर एरिया से हटना होगा. उसने हटने से साफ मना कर दिया है. हिज्बुल्लाह को लगा कि इजरायल कमजोर है.'' 

अजार ने कहा कि, ''हमने कभी नहीं कहा कि ईरान को खत्म करना चाहते हैं. ईरान ने कई बार तबाही का ऐलान किया है. ईरान ने कई आतंकी संगठनों को फंडिंग की है. ईरान ने अब तक हम पर दो बार हमला किया है. ईरान को हमें कुछ भी सिखाने का कोई भी हक नहीं है. हमारे पास दुनिया का सबसे अच्छा डिफेंस सिस्टम है. ईरान की क्षमताओं के बारे में काफी शोध कर रहे हैं. इजरायल ईरान के इरादों से वाकिफ है. ईरान फसाद बनाने की कोशिश कर रहा है.''

उन्होंने कहा कि, ''हमारा विश्वास हमारे लोगों से आता है. इजरायल के लोग हमें मजबूत बनाते हैं. वे एक-दूसरे की मदद करते हैं. यह युद्ध इजरायल पर थोपा गया. बंधकों की रिहाई के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. ईरान के फैसले का विश्लेषण करना मेरे लिए मुश्किल है.''

एनडीटीवी से विशेष बातचीत में राजदूत अजार ने इजरायल के खिलाफ ईरान के हमले को "एक बहुत गंभीर स्थिति" बताया. उन्होंने कहा कि, "सौभाग्य से हमारे पास दुनिया की सबसे अच्छी मिसाइल रक्षा प्रणाली है, इसलिए अधिकांश मिसाइलों को रोक दिया गया और कोई बड़ी क्षति नहीं हुई. इजरायल में केवल वही मिसाइलें गिरीं जो खुले क्षेत्रों में लक्षित थीं, जो आमतौर पर संरक्षित नहीं होते."

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उन्होंने आगे कहा कि "यह पहली बार नहीं है, ईरान ने इजराइल को नष्ट करने की बार-बार कोशिश की है." उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल ईरान के लोगों के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह "ईरान के कट्टरपंथी शासन" के खिलाफ है. अजार ने कहा कि, "ईरानी शासन पिछले 30 सालों से विभिन्न आतंकवादी समूहों को फंडिंग कर रहा है. वे अपने लोगों से पैसा लेते हैं और उससे चरमपंथियों को फंडिंग करते हैं. इजरायल अपनी रक्षा करेगा और ईरानी शासन को सफल नहीं होने देगा."

नुकसान और जवाबी कार्रवाई

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) का हवाला देते हुए राजदूत ने कहा कि "सौभाग्य से इजरायल में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन दुर्भाग्य से ईरानी मिसाइल हमले से गाजा में एक फिलिस्तीनी नागरिक की दुखद मौत हो गई. ईरान की मिसाइल ने एक फिलिस्तीनी को मार डाला."

संभावित जवाबी हमले का ब्यौरा न देते हुए अजार ने कहा, "हमारे सामने एक चुनौती है, क्योंकि इस तरह के कट्टरपंथी लोगों को रोका नहीं जा सकता. हमने यह बार-बार देखा है. जब हमास ने हम पर आतंकी हमला किया या जब नसरल्लाह ने 11 महीने तक इजरायल पर हमला करने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने लोगों की भी परवाह नहीं की, उनकी जान को खतरे में डाल दिया. हमें इन चरमपंथियों पर कड़ा प्रहार करना होगा."

राजदूत ने आगे स्पष्ट किया कि इजरायल ईरान के लोगों के खिलाफ नहीं है, और न ही वह अन्य देशों में शासन करना चाहता है. उन्होंने कहा, "इजरायल केवल अपनी रक्षा करता है." उन्होंने कहा कि "हम अपने देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, न कि अन्य देशों में राजनीतिक वास्तविकताओं को बदलने के लिए."

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उन्होंने कहा कि "हमने अतीत में देखा है कि कैसे ईरानी लोगों ने कट्टरपंथी शासन के खिलाफ विद्रोह किया है. बदलाव बाहर से नहीं आएगा, अगर ऐसा होगा तो वह अंदर से ही होगा. जहां तक ​​इजरायल का सवाल है, हम केवल अपने लोगों की सुरक्षा के स्तर तक ही जुड़ेंगे."

अजार ने कहा कि, "इजरायल और ईरान के लोगों के बीच हजारों सालों से दोस्ताना संबंध रहे हैं. ईरान इजरायल का दुश्मन नहीं है. फारसी लोगों का एक समृद्ध इतिहास है, एक प्राचीन सभ्यता है, जिसका इजरायल के लोगों के साथ अद्भुत जुड़ाव हुआ करता था."

राजदूत ने कहा कि, "हम चाहते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमारे खतरों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. ऐसी स्थिति हो कि हमारे लोग उत्तरी इजरायल में अपने घरों को लौट सकें. हम ऐसी स्थिति चाहते हैं कि जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 और 1559 को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके. इजरायल लेबनान में एक कब्जा करने वाली ताकत नहीं बनना चाहता है, न ही इजरायल लेबनान के राजनीतिक भविष्य पर फैसला करना चाहता है." 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव से निराशा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के बारे में रूवेन अजार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र बहुत अच्छा काम कर रहा है, लेकिन "दुर्भाग्य से संयुक्त राष्ट्र के भीतर कुछ गुट हैं जो पक्षपातपूर्ण हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र में एक धांधली वाली व्यवस्था है, जिसमें अधिकांश देश संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हेरफेर कर सकते हैं. जैसे कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं जो मिसाइलों के इस भयानक हमले की निंदा नहीं कर रहे हैं. यह बहुत चिंताजनक है." उन्होंने कहा कि, "संयुक्त राष्ट्र को तटस्थ और निष्पक्ष होना चाहिए."

क्या भारत शांति लाने में भूमिका निभा सकता है? 

जब अजार से पूछा गया कि क्या भारत शांति लाने में कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है, तो उन्होंने कहा, "यह भारत को तय करना है. कूटनीति हमेशा काम कर सकती है. हमने 7 अक्टूबर के हमले के बाद शुरू में कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से मुद्दों को हल करने की कोशिश की, लेकिन यह काम नहीं आया. कभी-कभी जब चरमपंथी शासन होते हैं, तो खुद का बचाव करने के लिए, प्रभावी होने के लिए उनसे सख्ती से निपटना पड़ता है."

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उन्होंने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण प्लेयर और इजरायल का दोस्त है. नई दिल्ली निश्चित रूप से मिडिल-ईस्ट को "स्थिरता के गलियारा - जो एशिया और यूरोप को जोड़ता है" के रूप में फिर से बनाने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि भारत इजरायल का साझेदार है.

अरब देशों के साथ संबंध

इजरायली राजदूत ने बताया कि पश्चिम एशिया में लगभग एक साल से जारी संकट और खुद को सुरक्षित रखने के इजरायल के प्रयासों के बीच एक भी अरब देश ने इजरायल के साथ संबंध नहीं तोड़े हैं." उन्होंने कहा, "वास्तव में इस साल के दौरान इजरायल पूरे मध्य-पूर्व में अपने सुरक्षा सहयोग और खुफिया सहयोग का निर्माण कर रहा है. इससे क्या पता चलता है... कि जब यह संघर्ष समाप्त हो जाएगा, तो यह सभी देश जो एक शांतिपूर्ण और प्रगतिशील मध्य पूर्व के निर्माण में रुचि रखते हैं, इसे हासिल करने के लिए मिलकर काम करेंगे. यह दर्शाता है कि उग्रवाद, कट्टरता के खिलाफ एक विकल्प है."

राजदूत ने स्पष्ट किया कि "हमास अब इजरायल के लिए खतरा नहीं है, हिजबुल्लाह को गंभीर झटका लगा है और ईरान को अब अपने किए की कीमत चुकानी पड़ेगी."

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वाराणसी में 14 मंदिरों से हटाई गईं सांई बाबा की मूर्तियां, आहत साईं भक्‍त आए विरोध में

वाराणसी (Varanasi) के बड़ा गणेश मंदिर सहित चौदह मंदिरों से साईं बाबा (Sai Baba) की प्रतिमाओं को हटाया गया है. केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि "गणेश मंदिर में साईं का क्या काम?" उन्होंने लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर के पुजारी को फटकार लगाई, जिसके बाद साईं बाबा की मूर्ति को हटा दिया गया. शर्मा ने कहा कि अभी तक 14 मंदिरों से मूर्तियों को हटाया गया है और हम 28 और मंदिरों से मूर्तियां हटाने वाले हैं. दूसरी ओर, सांई सेवक दल भी इसके खिलाफ मुखर हो गया है. 

साईं बाबा की मूर्ति को लेकर उठे विवाद के बाद अब शहर के अन्य मंदिरों से भी साईं की मूर्तियां हटाने की चर्चा हो रही है. ब्राह्मण महासभा के अजय शर्मा ने यह भी कहा कि साजिशकर्ताओं ने आस्थावान सनातनधर्मियों को उनके मूल से अलग करने के लिए चांद मियां को साईं बाबा के रूप में प्रचारित किया है. उन्होंने बनारस के अन्य मंदिरों के महंतों आदि से अनुरोध किया कि वे साईं की मूर्ति को ससम्मान मंदिर परिसर से हटा दें. अभी तक हम काशी के केदार खंड से 14 मंदिरों से मूर्ति हटा चुके हैं. 

सांई बाबा की मूर्तियों को हटाने की मांग 

ब्राह्मण महासभा ने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार, किसी भी देवालय में मृत मनुष्यों की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में केवल पंच देवों - सूर्य, विष्णु, शिव, शक्ति, और गणपति के स्वरूपों की मूर्तियां स्थापित की जा सकती हैं. अजय शर्मा ने आग्रह किया कि जितनी जल्दी हो सके, साईं की मूर्तियों को मंदिरों से हटाया जाए. 

नाराज सांई भक्‍तों ने की बैठक 

वाराणसी के मंदिरों से साई बाबा की मूर्ति हटाए जाने से नाराज साईं भक्तों ने विरोध किया और इस मामले को लेकर बैठक की. सांई  मंदिर पर बैठक के बाद "श्री साईं सेवक बनारस दल" का गठन किया गया.

श्री सांई सेवक बनारस दल के अध्‍यक्ष अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने बैठक में साई मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सांई मूर्ति को हटाने के बहाने बनारस और देश का माहौल खराब किए जाने की आशंका जताई. उन्‍होंने कहा कि आगे से मंदिरों से मूर्तियां नहीं हटाई जाएं, इसके लिए पुलिस से लिखित में शिकायत की जाएगी. साथ ही मंदिरों की सुरक्षा के लिए पुलिस कमिश्नर से दल के सदस्य मुलाकात करेंगे और मंदिरों से प्रतिमा को नहीं हटाने का अनुरोध करेंगे. इस दौरान सांई भक्‍तों ने मूर्ति हटाए जाने से खुद को आहत बताया. 
 



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Tuesday, 1 October 2024

बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम को हरियाणा चुनाव से पहले फिर मिली पैरोल, चुनाव आयोग ने दी मंजूरी

बलात्कार के दोषी और 20 साल की जेल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले 20 दिन की पैरोल मिल गई है. राम रहीम बुधवार सुबह जेल से रिहा हो सकता है. पिछले दो साल में ये उसकी दसवीं पैरोल होगी. सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग से मंजूरी मिलने के बाद हरियाणा सरकार ने उसे एक बार फिर पैरोल दे दिया.

निर्वाचन आयोग ने राम रहीम को पैरोल देने के लिए कड़ी शर्तें लगाईं हैं, जिसमें हरियाणा में उसके प्रवेश, सार्वजनिक भाषण देने और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर प्रतिबंध शामिल है.

राम रहीम को 2017 में हरियाणा के सिरसा स्थित अपने आश्रम में दो महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया था.

हरियाणा जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखे पत्र में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रशासन के 30 सितंबर के उस पत्र का हवाला दिया, जिसमें दोषी द्वारा 20 दिन की पैरोल मांगते समय दिए गए आपातकालीन और आवश्यक कारणों का उल्लेख किया गया था.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा था, ‘‘इस पत्र के मद्देनजर, राज्य सरकार जिला जेल, रोहतक में बंद दोषी गुरमीत राम रहीम सिंह को पैरोल (20 दिन) देने के मामले पर विचार कर सकती है, बशर्ते कि आपके 30 सितंबर के पत्र में उल्लिखित आपातकालीन और आवश्यक कारणों से संबंधित तथ्य सही हों.''

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि पैरोल की शर्तें होंगी कि वो हरियाणा नहीं जाएगा, कोई सार्वजनिक भाषण नहीं देगा और इस दौरान किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा.

पत्र में चेतावनी दी गई कि इसके अलावा, दोषी की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए और ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह चुनाव संबंधी किसी गतिविधि में शामिल न हो.

इसमें कहा गया कि अगर राम रहीम किसी आपत्तिजनक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, तो उसकी पैरोल तुरंत रद्द कर दी जानी चाहिए.

इससे पहले कांग्रेस ने राम रहीम की रिहाई को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि उसकी रिहाई चुनाव से पहले लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगी. पिछले कुछ सालों में, एक स्थानीय धार्मिक नेता के रूप में उसने बड़े पैमाने पर अनुयायी बनाए हैं. ऐसी चिंता है कि चुनाव से पहले उसकी रिहाई पार्टी को करीबी मुकाबले की उम्मीद में नुकसान पहुंचा सकती है.

राज्य में पांच अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और आठ अक्टूबर को नतीजे आएंगे.

राज्य प्रशासन ने आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण निर्वाचन आयोग से पैरोल के संबंध में अनुमति मांगी थी.



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