Thursday, 5 September 2024

कंधार हाइजैक पर बनी Netflix की सीरीज IC 814 पर क्यों मचा हंगामा? हाइजैकर्स के हिंदू कोडनेम की क्या है सच्चाई?

OTT (ओवर द टाइम) प्लेटफॉर्म Netflix पर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की वेब सीरीज IC 814: The Kandahar Hijack को लेकर सोशल मीडिया में जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. ये वेब सीरीज 1999 में इंडियन एयरलाइंस के प्लेन IC-814 के हाइजैक पर आधारित है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लेन को हाईजैक करने वाले आतंकी मुस्लिम संप्रदाय से थे, लेकिन इस वेब सीरीज में आतंकियों के नाम बदल 'भोला' और 'शंकर' रखे गए हैं. विवाद इसी को लेकर है.

आइए जानते हैं क्या है IC-814-द कंधार हाइजैक वेबसीरीज को लेकर विवाद? 1999 में कैसे हुआ था ये प्लेन हाइजैक? क्या वाकई हिंदू आतंकियों का इससे था कनेक्शन:-

29 अगस्त को रिलीज हुई सीरीज
IC-814-द कंधार हाइजैक 29 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है. नेटफ्लिक्स की इस सीरीज के कंटेंट जर्नलिस्ट श्रींजॉय चौधरी और IC-814 फ्लाइट के कैप्टन रहे देवी शरण की लिखी गई किताब 'फ्लाइट इनटू फियर: द कैप्टन स्टोरी' से लिए गए हैं. ये किताब 1999 में हुई कंधार हाइजैक का पूरा ब्योरा देती है. ये किताब अमेजॉन पर आसानी से उपलब्ध है. 

सोशल मीडिया हो रहा बॉयकॉट
इस सीरीज के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे बॉयकॉट करने की मांग उठ रही है. सोशल मीडिया पर यूजर्स #BoycottNetflix, #BoycottBollywood और #IC814 का इस्तेमाल करते हुए इस वेबसीरीज का बॉयकॉट कर रहे हैं. कुछ यूजर्स ने कमेंट भी किए कि मेकर्स ने कथित तौर पर एक निश्चित समुदाय से संबंधित आतंकवादियों को बचाने के लिए हाइजैकर्स के नाम बदलकर 'शंकर' और 'भोला' कर दिए.

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मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स की कंटेंट हेड को किया तलब
इस विवाद के बीच सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने OTT सीरीज के विवादास्पद पहलुओं पर नेटफ्लिक्स इंडिया से जवाब मांगा है. साथ ही नेटफ्लिक्स की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल को तलब किया है. 

क्या है वेब सीरीज की कहानी?
नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई IC-814-द कंधार हाइजैक की कहानी 24 दिसंबर 1999 की सच्ची घटना पर आधारित है. 1999 में 5 आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस के प्लेन IC 814 को नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नई दिल्‍ली के लिए उड़ान भरते वक्त हाईजैक कर लिया था. प्लेन को टेकऑफ के महज 40 मिनट के अंदर हाइजैक कर लिया गया था. इस प्लेन में 191 यात्री सफर कर रहे थे. आतंकवादी प्लेन को अमृतसर, लाहौर, दुबई होते हुए कंधार में ले जाते हैं. आतंकियों ने अपनी मांगे मनवाने तक सभी यात्रियों को 7 दिन तक बंधक बना कर रखा था. हाइजैक कैसे होता है? बंधक बनाने के दौरान यात्रियों की क्या हालत होती है? सरकार कैसे आतंकियों की शर्त को मानने के लिए मजबूर होती है? सरकार के सामने इन यात्रियों को छुड़ाने के लिए क्या शर्त रखी जाती है? 6 एपिसोड की इस वेबसीरीज में यही सब दिखाया गया है.

इस वेब सीरीज में किसने निभाया कौन सा रोल?
इस सीरीज में नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर, विजय वर्मा, दीया मिर्जा, पत्रलेखा,अरविंद स्वामी और कुमुद मिश्रा ने मुख्य भूमिका निभाई है.
-विजय वर्मा (गली बॉय एक्टर) ने सीरीज में कैप्टन शरण देव का किरदार निभाया है.
-विदेश मंत्री विजयभान सिंह की भूमिका में पंकज कपूर दिखे हैं.
-वेटरन एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने भारत के कैबिनेट सेक्रेटरी और भारत के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के चीफ विनय कौल का किरदार निभाया है.
-विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव और DRS के रोल में अरविंद स्वामी दिखे हैं.
-कुमुद मिश्रा (थप्पड़ फिल्म के एक्टर) रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के ज्वॉइंट सेक्रेटरी रंजन मिश्रा का रोल निभाया है.
-मनोज पाहवा (आर्टिकल 15 फिल्म के एक्टर) ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर मुकुल मोहन का किरदार निभाया है.

विवाद क्या है?
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने डायरेक्टर अनुभव सिन्हा पर कंधार हाइजैक के तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और संभावित रूप से धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है. हाइजैकिंग के दौरान आंतकी एक दूसरे को कोडनेम से बुला रहे थे. वेबसीरीज में भी दिखाया गया है कि हाइजैकर्स एक-दूसरे को चीफ, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर के नाम से बुलाते हैं. लेकिन, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने भोला और शंकर के नामों को लेकर आपत्ति जाहिर की है. लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माता ने जानबूझकर अपहरणकर्ताओं का नाम हिंदू रखा, जबकि वो मुस्लिम थे.   

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कैसे हाइजैक हुआ था प्लेन?
नेपाल की राजधानी काठमांडू से नई दिल्ली जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट 814 को 24 दिसंबर 1999 को उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हाइजैक कर लिया गया था. पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन ने इस प्लेन को हाइजैक किया था. इस प्लेन में 191 पैसेंजर थे. यात्रियों के तौर पर बैठे आतंकियों ने हाइजैक के तुरंत बाद प्लेन का कंट्रोल ले लिया था. 

5 देशों के लगाए चक्कर
जर्नलिस्ट श्रींजॉय चौधरी और IC-814 फ्लाइट के कैप्टन रहे देवी शरण की लिखी गई किताब 'फ्लाइट इनटू फियर: द कैप्टन स्टोरी' के एक हिस्से के मुताबिक, आतंकियों ने इस प्लेन से 5 देशों के चक्कर लगाए. फ्यूल भरवाने के लिए हाईजैकर्स ने सबसे पहले प्लेन को लाहौर एयरपोर्ट पर उतारना चाहा, लेकिन अथॉरिटी ने एयरक्राफ्ट को लैडिंग की परमिशन नहीं दी. इसके बाद प्लेन को अमृतसर में उतारा गया, लेकिन कुछ दिक्कतों के चलते वहां भी फ्यूल नहीं भरा जा सका. इस दौरान एयरपोर्ट को सील रखा गया था. 

दबाव बनाने के लिए एक पैसेंजर को उतार मौत के घाट
इसके बाद आतंकियों ने प्लेन को 25 मिनट के इंतजार के बाद हाईजैकर्स ने एक पैसेंजर रूपिन कात्याल की हत्या कर दी, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके. इसके बाद आतंकी दोबारा लाहौर की ओर बढ़ गए. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान अथॉरिटी को एयरक्राफ्ट की लैंडिग के लिए मंजूरी देने के लिए कहा. पाकिस्तान ने लैंडिंग की मंजूरी दी और वहां प्लेन में फ्यूल डाला गया. इस दौरान एयरपोर्ट सील रहा. फ्यूल डालने के बाद प्लेन ने काबुल के लिए उड़ान भरी, लेकिन काबुल और कंधार में रात के वक्त लाइट्स का सही इंतजाम न होने के चलते इसे दुबई डायवर्ट कर दिया गया. 

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दुबई में हुई 25 पैसेंजरों की रिहाई
दुबई के अल-मिन्हत एयरफोर्स बेस में IC-814 प्लेन की लैंडिंग हुई. हाईजैकर्स ने खाने-पीने और मेडिसीन की मांग की. लेकिन यूएई के अधिकारियों ने खाने-पीने और मेडिसीन के एवज में बच्चों और महिला पैसेंजरों को रिहा करने की शर्त रख दी. आंतकियों ने शर्त मान ली. हाईजैकर्स ने 25 यात्रियों को रिहा किया. वहीं, रूपिन कात्याल का शव यूएई अथॉरिटी को सौंपा गया.

आखिर में कंधार में लैंडिंग
इसके बाद हाइजैकर्स 25 दिसंबर 1999 की सुबह प्लेन को दुबई से अफगानिस्तान के कंधार लेकर गए. वहां, पैसेंजरों को बंधक बनाकर रखा गया. फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत शुरू हुई.

आतंकियों की क्या मांगे थीं?
प्लेन के हाईजैकर्स ने भारत सरकार के सामने आंतकी मौलाना मसूद अजहर के अलावा जेल में बंद 35 आतंकियों को छोड़ने की डिमांड रखी. इसके साथ ही आतंकियों ने 20 करोड़ डॉलर की फिरौती की मांग भी की. हालांकि, बाद में हाईजैकर्स ने फिरौती की मांग और 35 आतंकियों को छोड़ने की मांग रद्द कर दी. सिर्फ 3 आतंकियों की रिहाई का सौदा किया गया. ये 3 आतंकी भारत की जेलों में बंद थे. इनके नाम आतंकी मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख हैं. 

सरकार ने क्या किया?
किताब 'फ्लाइट इनटू फियर: द कैप्टन स्टोरी' के एक हिस्से के मुताबिक, उस वक्त की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को सभी पैसेंजरों की जान बचाने के लिए हाइजैकर्स की मांग माननी पड़ी. सरकार ने इन तीनों आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया. तीनों आतंकियों को जेल से निकालकर कंधार ले जाया गया. इसके बाद 31 दिसंबर को पैसेंजर्स की रिहाई हुई, जिन्हें स्पेशल प्लेन से वापस लाया गया. 

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हाइजैकर्स के क्या कोडनेम थे?
6 जनवरी 2000 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कंधार हाइजैकर्स के असली नाम बताए थे. इनके नाम थे:-
-इब्राहिम अतहर (बहावलपुर) 
-शाहिद अख्तर सईद (कराची) 
-शनि अहमद काज़ी (कराची)
-मिस्त्री जहूर इब्राहिम (कराची)
-शाकिर, सुक्कुर सिटी (कराची)

गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, हाइजैकिंग के दौरान IC 814 प्लेन में सवार पैसेंजरों ने पूछताछ में बताया था कि हाइजैकर्स एक-दूसरे को बुलाने के लिए कोडनेम का इस्तेमाल कर रहे थे. वो एक-दूसरे को चीफ, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर नाम से बुला रहे थे.

BJP आईटी सेल के हेड ने भी जताई आपत्ति
इस वेब सीरीज को लेकर BJP आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी कमेंट किया है. अमित मालवीय ने X पर लिखा, "IC-814 के हाइजैकर्स खूंखार आतंकवादी थे. उनलोगों ने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाने के लिए कोडनेम रख लिए थे. फिल्म डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने गैर-मुस्लिम नामों को आगे बढ़ाकर उनके आपराधिक इरादे को वैध बना दिया है. इसका नतीजा ये होगा कि दशकों बाद लोग सोचेंगे कि हिंदुओं ने IC-814 का हाइजैक कर लिया था.'' 

अमित मालवीय ने आगे लिखा, ''पाकिस्तानी आतंकवादियों, सभी मुसलमानों के अपराधों को सफेद करने का वामपंथ का एजेंडा पूरा हुआ. यह सिनेमा की ताकत है, जिसका इस्तेमाल कम्युनिस्ट 70 के दशक से आक्रामक तरीके से करते रहे हैं.'' 

मसूद अजहर ने बनाया आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद
रिहाई के बाद अजहर तालिबान की मदद से अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान पहुंचा. उसने कश्मीर में इंडियन फोर्स से लड़ने के लिए आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद बनाया. उसे पाकिस्तानी फौज का भरपूर सपोर्ट हासिल है. भारत की संसद भवन में 2001 में हुए आतंकी हमले में आतंकी मसूद अजहर मुख्य आरोपी था. उस वक्त पाकिस्तान ने अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे भारत को सौंपने से इनकार कर दिया था.

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Wednesday, 4 September 2024

हिमाचल का भांग खेती बिल क्या है? जिसे जल्द किया जाएगा विधानसभा में पेश... यहां जानिए इसकी पूरी डिटेल

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजनीति गर्म है. राज्य सरकार की तरफ से भांग की खेती को लीगल करने की योजना बनायी जा रही है. राज्य सरकार का दावा है कि औषधीय उपयोग के लिए इसे लीगल किया जा सकता है. इसके लिए सरकार की तरफ से बिल तैयार किया गया है.  राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में 26 अप्रैल, 2023 को एक समिति का गठन हुआ था. राज्य सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने ऐलान किया है कि इसे लेकर जल्द ही एक बिल पेश किया जाएगा. उनका कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी. 

समिति के प्रस्तावों के आधार पर लाया जाएगा बिल
हिमाचल सरकार की तरफ से बनाए गए समिति ने कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिला का दौरा किया था और साथ कई राज्यों से भी संपर्क किया था.समिति ने पाया है कि इसके खेती से राज्य को राजस्व की प्राप्ति होगी. मंत्री ने भी दावा किया है कि राज्य की आबकारी नीति को फायदा होगा.

हिमाचल के सामने है आर्थिक संकट
हिमाचल प्रदेश हाल के दिनों में आर्थिक संकट से गुजर रहा है. राज्य के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने दावा किया है कि अगर सरकार कानूनी तौर पर इसकी खेती का आदेश देती है तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. उन्होने कहा कि हमें गंभीरता से सोचना चाहिए. छींटाकशी से बचने की आवश्यकता है. 

भारत में भांग की खेती अब तक है गैरकानूनी
भारत में पिछले 40 साल से अधिक समय से भांग की खेती को गैरकानूनी माना गया है. हालांकि हिमाचल सहित कई राज्यों में लोग गैरकानूनी तरीके से इसकी खेती करते रहे हैं. हिमाचल में जय राम ठाकुर की सरकार ने भी 2018 में इसे कानूनी रूप देने की घोषणा की थी. सरकार का दावा है कि इससे राज्य को लगभग 500 करोड़ रुपये की कमाई है. 1985- भारत में भांग की खेती को अपराध घोषित किया गया. 

भांग की पत्ती कई दवाओं में भी होता रहा है उपयोग
भांग को एक नशे के तौर पर देखा जाता है.भांग आयुर्वेदिक चिकित्सा में अहम भूमिका निभाता है और इसे मतली, उल्टी और शारीरिक दर्द सहित विभिन्न बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल लाया जाता है. हालांकि कई जगहों पर इसके औषधीय लाभ होने के भी दावे होते रहे हैं. माना जाता रहा है कि यह इम्यूनिटी बूस्टर  का काम करते हैं. इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. यही नहीं यह कोलेस्ट्रोल को कम करने में भी मदद करता है. यह हाई ब्लड प्रेशर को कम कंट्रोल करता है. आर्थराइटिस में आराम पहुंचाने और त्वचा संबंधित रोगों में निजात दिलाने में कारगर हो सकता है. 

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लॉन्च होते ही पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ Adani Enterprises का रिटेल बॉन्ड इश्यू

अदाणी एंटरप्राइजेस (Adani Enterprises) के पहले रिटेल बॉन्ड इश्यू को बुधवार को लॉन्च होते ही पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया. भारतीय स्टॉक एक्सचेंज (Indian Stock Exchange)के आंकड़ों ने यह जानकारी दी. यह इश्यू भारत के शेयर मार्केट में एक दुर्लभ घटना थी. साल 2016 के बाद यह पहली बार है, जब किसी गैर-वित्तीय कंपनी ने इस तरह का रिटेल बॉन्ड पेश किया है.

अदाणी ग्रुप ने जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद से इंस्टिट्यूशनल इंवेस्टर्स से फंड जुटाया है. अदाणी ग्रुप ने हिंडनबर्ग के सभी आरोपों को खारिज कर दिया था. इस विवाद के कारण अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 150 अरब डॉलर की भारी गिरावट आई थी. 

अब अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों ने काफी हद तक रिकवरी कर ली है. इसके बाद यह ग्रुप फिर से कैपिटल मार्केट में वापसी कर चुका है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी एंटरप्राइजेज का प्लान बॉन्ड सेल के जरिए 800 करोड़ रुपये जुटाने का है. इसमें 400 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन (Greenshoe Option) भी शामिल है. स्थानीय समय के मुताबिक, बुधवार शाम 5 बजे तक कंपनी को 717 करोड़ रुपये की बोलियां (Bids) मिली.

इससे पहले जुलाई में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने इंस्टिट्यूशनल शेयर सेलिंग के जरिए 1 बिलियन (100 करोड़ या एक अरब) डॉलर जुटाए थे. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अदाणी एंटरप्राइजेज भी 100 करोड़ की शेयर बिक्री की योजना बना रहा है.



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Tuesday, 3 September 2024

पीएम मोदी ने ब्रुनेई में प्रसिद्ध उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद का किया दौरा, सुल्तान के पिता ने करवाया था निर्माण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय ब्रुनेई यात्रा के दौरान बुधवार को वहां की प्रसिद्ध उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद का दौरा किया. इसे वर्तमान सुल्तान के पिता ने बनवाया था. धार्मिक मामलों के मंत्री पेहिन दातो उस्ताज अवांग बदरुद्दीन ने मस्जिद में प्रधानमंत्री का स्वागत किया.

पीएम ने मस्जिद के इतिहास को दर्शाने वाला एक वीडियो भी देखा. इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद ईशाम भी उपस्थित थे. पीएम मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "ब्रुनेई में उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद गया."

मस्जिद का नाम ब्रुनेई के 28वें सुल्तान उमर अली सैफुद्दीन तृतीय (वर्तमान सुल्तान के पिता, जिन्होंने इसका निर्माण भी शुरू कराया था) के नाम पर रखा गया है और इसका निर्माण 1958 में पूरा हुआ था. उन्हें आधुनिक ब्रुनेई का वास्तुकार माना जाता है.

मोदी द्विपक्षीय यात्रा पर ब्रुनेई जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. इससे पहले 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 11वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्रुनेई गए थे.

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इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर शहजादे अल-मुहतदी बिल्लाह ने स्वागत किया. उन्हें हवाई अड्डे पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया.

पीएम मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों, खासकर वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. मैं हवाई अड्डे पर मेरा स्वागत करने के लिए ‘क्राउन प्रिंस' हाजी अल-मुहतदी बिल्लाह को धन्यवाद देता हूं.''

प्रधानमंत्री ने भारतीय उच्चायोग में नए ‘चांसरी' परिसर का भी उद्घाटन किया और  भारतीय प्रवासियों से बातचीत की. ‘चांसरी' परिसर का उद्घाटन करते हुए मोदी ने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का संकेत बताया.

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प्रधानमंत्री ने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘भारतीय उच्चायोग के नये ‘चांसरी' परिसर का उद्घाटन करके प्रसन्न हूं. ये ब्रुनेई दारुस्सलाम के साथ हमारे मजबूत संबंधों का संकेत है. यह भारतीय मूल के लोगों की भी सेवा करेगा.''

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ‘चांसरी' परिसर भारतीयता की गहन भावना को दर्शाता है. उसने कहा कि सुरुचिपूर्ण आवरण और टिकाऊ कोटा पत्थरों का उपयोग, इसके सौंदर्य आकर्षण को और बढ़ाता है, जो पारम्परिक और समकालीन तत्वों का सामंजस्यपूर्ण सम्मिश्रण है. बयान के अनुसार, ये डिजाइन न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि एक शांत और आकर्षक वातावरण भी प्रदान करता है.

बयान के अनुसार, ब्रुनेई में भारतीयों के आगमन का पहला चरण 1920 के दशक में तेल की खोज के साथ शुरू हुआ था. वर्तमान में, लगभग 14,000 भारतीय ब्रुनेई में रह रहे हैं.
 



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Monday, 2 September 2024

RPSC से पेपर लीक कर बेटा-बेटी को बनवा दिया था SI, पुलिस बनने की जगह अब पहुंच गए जेल

राजस्थान पुलिस में उप निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य रामूराम राईका को अदालत ने सोमवार को पुलिस हिरासत में भेज दिया. रामूराम राईका की बेटी शोभा राईका ने 2021 में पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा में राज्य में 5वां स्थान हासिल किया था, वहीं बेटे देवेश ने 14वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन मामला सामने आने के बाद फिर से ली गई परीक्षा में उन्होंने पास मार्क्स भी हासिल नहीं किया.

दरअसल जिन पुलिस अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया था, उनका कहना था कि अकादमी में उसके बारे में कई तरह की बातें हो रही थीं कि उसने और उसके भाई देवाश ने गलत तरीके से परीक्षा पास की.

देवेश ने सब इंस्पेक्टर परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन वो भी पुलिस अकादमी में औसत प्रदर्शन से ऊपर नहीं था. 

इस घोटाले की जांच कर रहे विशेष अभियान समूह ने तब उन सभी उम्मीदवारों की दोबारा जांच करने का फैसला किया, जो 2021 की पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा के जरिए से आए थे और जयपुर तथा किशनगढ़ में पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे थे.

शोभा राईका जिसने मुख्य परीक्षा में हिंदी में 200 में से 189 अंक और सामान्य ज्ञान में 200 में से 155 अंक हासिल किए थे, वो दोबारा ली गई परीक्षा में उत्तीर्ण ग्रेड भी हासिल नहीं कर सकी. उसने दोबारा ली गई परीक्षा में हिंदी में 200 में से 24 अंक और सामान्य ज्ञान परीक्षा में 200 में से 34 अंक ही हासिल कर पायी.  

इसके बाद एसओजी ने कड़ियों को जोड़ना शुरू किया. उसके पिता रामूराम राईका 2018 से 2022 के बीच राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य थे. परीक्षा 2021 में आयोजित की गई थी. उनके दोनों बच्चों बेटी शोभा और बेटे देवेश ने एक साथ 2021 में पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा पास की थी.

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एसओजी ने अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ के दौरान सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर कबूल किया है कि उनके पिता रामू राम रायका ने उन्हें हाथ से लिखा प्रश्न पत्र दिया था। 

रामूराम राईका को पेपर कैसे मिला, ये अभी भी एक रहस्य है और एसओजी के सूत्रों ने ये खुलासा नहीं किया है कि क्या वो किसी नकल गिरोह के संपर्क में था, या उसने अपने बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया था, जो प्रश्न पत्र तैयार करती है और परीक्षा आयोजित करती है.

कहानी में एक और मोड़ है, बाबू लाल कटारा पर भी आरपीएससी स्रोत से होने वाले पेपर लीक का हिस्सा होने का आरोप है, उन्हें भी एक साल पहले एसओजी ने गिरफ्तार किया था. कटारा भी आरपीएससी के सदस्य थे. एसओजी अब उसे प्रोडक्शन वारंट पर जेल से बाहर ले आई है.

शोभा राईका ने एसआई परीक्षा के लिए जब अपना इंटरव्यू दिया तो उसने 50 में से 34 अंक हासिल किए थे, बाबू लाल कटारा उस पैनल में शामिल थे जिसने उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया था. इससे राईका परिवार के साथ उनका संबंध साफ जाहिर होता है.

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ये विडंबना है कि कटारा और रामूराम राईका, जिन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष सार्वजनिक सेवा परीक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी, वे खुद पेपर लीक के संदेह में हैं.

दिलचस्प बात ये है कि ये धोखाधड़ी करने वाले गिरोह पार्टी लाइनों से ऊपर उठकर काम करते हैं. अशोक गहलोत को उनके कार्यकाल के दौरान हुए पेपर लीक के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था. बाबू लाल कटारा को अक्टूबर 2020 में आयोग में नियुक्त किया गया था, जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, लेकिन रामूराम राईका को उस समय आयोग में शामिल किया गया, जब बीजेपी राजस्थान में शासन कर रही थी और वसुन्धरा राजे मुख्यमंत्री थीं.

राईका पश्चिमी राजस्थान में वंचित चरवाहों का एक समुदाय है, जबकि कटारा दक्षिण राजस्थान में आदिवासी समुदाय से है. दोनों सदस्य आयोग में पहुंचे क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों हाशिए पर मौजूद इन वोट बैंकों को मजबूत करना चाहते थे.

लेकिन कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि अशोक गहलोत ने कटारा को आरपीएससी में नियुक्त करने के लिए भारी कीमत चुकाई. पिछले साल राजस्थान चुनाव से छह महीने पहले उनकी गिरफ्तारी ने इस धारणा को और मजबूत कर दिया कि सरकार किसी तरह पेपर लीक से जुड़ी हुई थी और इसने निश्चित रूप से युवाओं के बीच राजस्थान में गहलोत सरकार के खिलाफ एक माहौल बनाने का काम किया. 

राईका की गिरफ्तारी को लेकर अतिरिक्त महानिदेशक (एसओजी) वीके सिंह ने बताया, 'आरपीएससी के पूर्व सदस्य राईका को उप निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा का पेपर अपने बच्चों को उपलब्ध कराने के आरोप में रविवार देर रात गिरफ्तार किया गया. उसे आज अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.'

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महावीर सिंह ने राईका को अदालत में पेश किया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मांडवी राजवी ने इस मामले में आगे की पूछताछ के लिए राईका को छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. सिंह ने बताया कि एसओजी ने रविवार को राईका के बेटे और बेटी के साथ-साथ तीन अन्य प्रशिक्षु एसआई को भी पेपर लीक मामले में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया.

उल्लेखनीय है कि उप निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में संलिप्तता के आरोप में रविवार को दो महिलाओं समेत पांच प्रशिक्षु उप-निरीक्षकों को गिरफ्तार किया गया था.

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सभी पांचों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें सात सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. एसओजी के आधिकारिक बयान के अनुसार गिरफ्तार किए गए प्रशिक्षुओं में रामूराम राईका की बेटी शोभा राईका और उसका बेटा देवेश राईका शामिल हैं.

बयान के अनुसार गिरफ्तार तीन अन्य प्रशिक्षु एसआई में मंजू देवी, अविनाश पलसानिया और विजेंद्र कुमार भी शामिल हैं. इन सभी पांचों प्रशिक्षुओं को शनिवार को राजस्थान पुलिस अकादमी (आरपीए) से हिरासत में लिया गया और पूछताछ के लिए एसओजी कार्यालय लाया गया.

उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा-2021 के पेपर लीक मामले में अब तक 61 आरोपियों के खिलाफ तीन अलग-अलग आरोप पत्र पेश किए जा चुके हैं. इन 61 आरोपियों में 33 प्रशिक्षु उप-निरीक्षक, चार चयनित उम्मीदवार और पेपर लीक गिरोह से जुड़े 24 लोग शामिल हैं. बयान के अनुसार इस मामले में 65 अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है.
 



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Sunday, 1 September 2024

पाकिस्तान में ओपनिंग डे के दिन ही लूट लिया मॉल, लाठी लेकर 'ड्रीम बाजार' पहुंची थी भीड़; वायरल हो रहा VIDEO

पाकिस्तान (Pakistan) के कराची में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. एक मॉल के द्वारा ओपनिंग डे के मौके पर भारी छूट का ऐलान किया गया था. भारी छूट के कारण मॉल के बाहर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. भीड़ इतनी अधिक हो गयी कि लोग लूटपाट करने लगे. खबरों के अनुसार इस मॉल में कपड़े और घरेलू समान मिलते हैं. लोगों के द्वारा किए गए लूटपाट के कारण मॉल को काफी नुकसान उठाना पड़ा. 

एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार मॉल के संचालकों के द्वारा लोगों की भीड़ को कंट्रोल करने के लिए दरवाजे को बंद करने की कोशिश की गयी लेकिन लाठी डंडे लेकर पहुंची भीड़ के ऊपर इसका कोई असर नहीं हुआ. लोगों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा को लेकर वहां पुलिस का बेहतर इंतजाम नहीं था इस कारण यह हादसा हुआ. 

घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे हैं. जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह लोग मॉल में अंदर जाने के लिए झगड़ रहे हैं. जानकारी के अनुसार कुछ लोग गाड़ियों में भरकर समान को ले गए. लोगों की भीड़ ने मॉल के दरवाजे को पत्थर से तोड़ दिया और मॉल के भीतर चले गए. 

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गुजरात में बाढ़ से नुकसान के आकलन के लिए गृह मंत्रालय ने गठित की टीम, 25 लोगों की हुई थी मौत

केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने गुजरात में बारिश (Gujarat Rain) और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की है. एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, टीम शीघ्र ही गुजरात के बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा करेगी, जहां 25 से 30 अगस्त के बीच भारी से बहुत भारी वर्षा हुई थी. 26 और 27 अगस्त को राज्य भर में बारिश से संबंधित घटनाओं में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई. बयान में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने गुजरात में वर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के कार्यकारी निदेशक के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (Inter-Ministerial Central Team) का गठन किया है. 

मध्य प्रदेश और राजस्थान भी भारी से बहुत भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं. इस साल हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से काफी नुकसान पहुंचा है. 

प्रभावित राज्‍यों के संपर्क में गृह मंत्रालय के अधिकारी 

बयान में कहा गया है कि गृह मंत्रालय इन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में है और यदि वे व्यापक नुकसान की सूचना देते हैं तो वहां भी आईएमसीटी को भेजा जाएगा. इस मानसून के दौरान कुछ अन्य राज्य भी भारी वर्षा, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं. 

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रभावित राज्यों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 

बिना बुलाए मौके पर जाकर नुकसान का आकलन 

बयान में कहा गया कि अगस्त 2019 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार गृह मंत्रालय ने इस वर्ष आईएमसीटी का गठन किया, जिसने बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित असम, केरल, मिजोरम और त्रिपुरा राज्यों का दौरा किया तथा उनके ज्ञापन का इंतजार किए बिना मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया. 

नगालैंड के लिए भी आईएमसीटी का गठन किया गया है, जो जल्द ही राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी. 

बयान में कहा गया है कि अतीत में आईएमसीटी राज्य सरकार से ज्ञापन प्राप्त होने के बाद ही आपदा प्रभावित राज्यों का दौरा करती थी. 
 



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