Friday, 1 March 2024

90s तक करोड़ों में फीस लेने वाला पहला एक्टर है ये बच्चा, आज नेटवर्थ है 3000 करोड़ पार, पहचाना क्या

Amitabh Bachchan Unseen Photo: बॉलीवुड में कई सुपरस्टार हैं, जैसे राज कपूर, दिलीप कुमार, देवानंद, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन, जिन्होंने कई दशकों तक बॉलीवुड पर राज किया. लेकिन क्या आपने सुना है कि पहला कौनसा भारतीय एक्टर है, जिन्हें फिल्मों के लिए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा फीस दी गई. नहीं तो हम तस्वीर में दिख रहे इस स्टार के बारे में आपको बताने वाले हैं, जो एकमात्र ऐसे स्टार थे, जिन्हें करोड़ों में भुगतान किया जाता था. इतना ही नहीं आज के समय में उनका नेटवर्थ 3000 करोड़ पार हो गया है जबकि सालाना आय का तो आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते. 

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यह शख्स और कोई नहीं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन हैं, जिन्होंने 1969 में सात हिंदुस्तानी फिल्म से डेब्यू किया था. वहीं हाल ही में उन्हें इंडस्ट्री में 55 साल पूरे हुए हैं, जिसके चलते उन्होंने एक AI तस्वीर शेयर की थी. IMdb के अनुसार, अमिताभ बच्चन 1990 के दशक तक पहले और एकमात्र भारतीय एक्टर हैं जिन्हें फिल्मों के लिए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा फीस दी जाती थी. 

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इतना ही नहीं कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार एकमात्र बॉलीवुड सितारे हैं, जो लगातार 16 वर्षों तक यानी क्रमश 1976 से 1991 और 1948 से 1963 तक भारतीय बॉक्स ऑफिस के टॉप एक्टर्स की रैंकिंग में टॉप पर रहे. 

अमिताभ बच्चन की बात करें तो 1973 में सदी के महानायक ने जया बच्चन से शादी की. वहीं उनके दो बच्चे अभिषेक बच्चन और श्वेता बच्चन हैं. और बहू ऐश्वर्या राय बच्चन हैं. नेटवर्थ की बात करें तो लाइफस्टाइल एशिया की साल 2023 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, अमिताभ बच्चन का नेटवर्थ 3,190 करोड़ बताया गया है. जबकि सालाना आय 60 करोड़ तक है. अपकमिंग फिल्मों की बात करें तो कल्कि 2898एडी में सुपरस्टार का अलग लुक देखने को मिलने वाला है. 



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Google ने शुल्क विवाद को लेकर भारतीय मैट्रिमोनी ऐप्स को Play Store से हटाया

Google ने शुक्रवार को भारत में 10 कंपनियों के ऐप्स के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए इन्‍हें गूगल प्‍ले स्‍टोर से हटाना शुरू कर दिया है. Google ने सेवा शुल्‍क भुगतान विवाद के बाद यह कदम उठाया है. हटाए जाने वाले एप्‍स में भारत मैट्रिमोनी जैसे कुछ लोकप्रिय मैट्रिमोनी ऐप्स भी शामिल हैं, जिसके बाद स्टार्टअप फर्मों के साथ टकराव की आशंका जताई जा रही है. गूगल के इस कदम को लेकर कुछ भारतीय कंपनियों के संस्‍थापकों ने काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. Matrimony.com के संस्थापक ने गूगल के कदम को "भारतीय इंटरनेट का काला दिन" बताया है. 

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, यह विवाद कुछ भारतीय स्टार्टअप्स के Google को ऐप भुगतान पर 11 से 26 फीसदी शुल्क लगाने से रोकने की कोशिश को लेकर है. शुल्‍क की पुरानी प्रणाली में यह फीस 30 फीसदी तक थी. Google को जनवरी और फरवरी में दो अदालती फैसलों के बाद शुल्क वसूलने या ऐप्स हटाने की अनुमति मिल गई थी.  

Matrimony.com के डेटिंग ऐप्स भारत मैट्रिमोनी, क्रिश्चियन मैट्रिमोनी, मुस्लिम मैट्रिमोनी और Jodii को शुक्रवार को हटा दिया गया. Matrimony.com के संस्‍थापक मुरुगावेल जानकीरमन ने इस कदम को "भारतीय इंटरनेट का काला दिन" बताया. उन्‍होंने कहा, "हमारे ऐप्स एक-एक करके डिलीट होते जा रहे हैं."

Alphabet Inc की एक यूनिट ने भारतमैट्रिमोनी ऐप का संचालन करने वाली भारतीय कंपनी Matrimony.com और जीवनासाथी एप चलाने वाली Info Edge को प्ले स्टोर उल्लंघन के नोटिस भेजे हैं. दोनों कंपनियां नोटिस की समीक्षा कर रही हैं और इसके बाद अगले कदम पर विचार करेंगी. उनके अधिकारियों ने इस बारे में रॉयटर्स को बताया है. 

सिंघल ने की ईस्‍ट इंडिया कंपनी से की तुलना 

स्‍टेज एप के सीईओ और सह संस्‍थापक विनय सिंघल ने एक एक्‍स पोस्‍ट में लिखा, "एक ऐसी कंपनी के लिए जिसका आदर्श वाक्य था - बुरा मत बनो, Google इस समय सभी बुरी चीजें कर रहा है. STAGE ऐप को आज कुछ घंटों के नोटिस पर Google Plays Store से हटा दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमने ऐप के अंदर केवल उनके बिलिंग सिस्टम को अनुमति देने की उनकी एकाधिकारवादी नीति को मानने से इनकार कर दिया."

उन्‍होंने लिखा, "हम सभी ने पढ़ा है कि कैसे करीब 400 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने हमारे देश पर कब्जा कर लिया था, जब यह हो रहा था (और शायद 100 गुना अधिक) तो ऐसा ही महसूस हुआ होगा. 

उन्‍होंने लिखा, "Google ने CCI के सीधे आदेश की भी परवाह नहीं की, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि वे डेवलपर्स को तीसरे पक्ष के बिलिंग सिस्टम का उपयोग करने से प्रतिबंधित न करें. संदेश बड़ा और स्पष्ट है  - हम आपके लिए बहुत बड़े हैं और इस देश के कानून हम पर लागू नहीं होते."

साथ ही उन्‍होंने पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा, "हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया को इतनी बड़ी सफलता बनाने के लिए इतना प्रयास करते हैं, अगर Google जैसी डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनियां इस तरह से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म कर दें तो इसका क्या मतलब है." 

प्रतिक्रिया रणनीतिक होनी चाहिए : बिखचंदानी 

Info Edge के संस्‍थापक संजीव बिखचंदानी ने अपनी एक एक्‍स पोस्‍ट में लिखा, "भारतीय कंपनियां इसका पालन करेंगी - अभी के लिए. लेकिन भारत को एक ऐप स्टोर/प्ले स्टोर की जरूरत है, जो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा हो - जैसे यूपीआई और ओएनडीसी. प्रतिक्रिया रणनीतिक होनी चाहिए @पीयूष गोयल."

इस मामले में गूगल ने दिया स्‍पष्‍टीकरण 

Google ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि 10 भारतीय कंपनियों ने "Google Play से प्राप्त होने वाले अपार मूल्य" के लिए भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया है. कंपनी ने कहा, "वर्षों से किसी भी अदालत या नियामक ने Google Play के शुल्क लेने के अधिकार से इनकार नहीं किया है." साथ ही कहा कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसके ऐसा करने के अधिकार में "हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था."

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पश्चिम बंगाल के राजभवन में PM मोदी से मिलीं CM ममता बनर्जी, बताया शिष्टाचार भेंट

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की, उन्होंने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया. बनर्जी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान राज्य के लंबित बकाये का मुद्दा भी उठाया.

मुलाकात के बाद सीएम ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “मैंने प्रधानमंत्री से बातचीत करने के अलावा राज्य के मुद्दे भी उनके सामने रखे.”

केंद्र सरकार पर राज्य के बकाये के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर बनर्जी ने कहा, 'मैंने वह मुद्दा भी उठाया.'

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर आए मोदी रात्रि विश्राम राजभवन में करेंगे. प्रधानमंत्री के राजभवन पहुंचने के कुछ देर बाद बनर्जी का काफिला वहां पहुंचा.

राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने ‘एक्स' पर लिखा कि उन्होंने राजभवन में प्रधानमंत्री का स्वागत किया.

बोस आज आरामबाग में प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे, जहां मोदी ने 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण व शिलान्यास किया.

पिछले साल दिसंबर में, बनर्जी ने राज्य का बकाया जारी करने को लेकर दबाव बनाने के लिए नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी.

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के अनुसार, केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल का 1.18 लाख करोड़ रुपये बकाया है.



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'अमेरिका में दोस्‍त को गोली मार दी गई' : टीवी अभिनेत्री ने PM मोदी से मांगी मदद

टेलीविजन अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) ने मंगलवार को अमेरिका में अपने दोस्त की गोली मारकर हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है. भट्टाचार्जी ने कहा कि अमेरिका में उनका दोस्त शाम को टहल रहा था, जब "उसे एक अज्ञात (व्यक्ति) ने कई बार गोली मारी." उनकी यह पोस्‍ट ऐसे वक्‍त में आई है, जब हाल के महीनों में भारतीयों या भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं. 

भट्टाचार्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरे दोस्त अमरनाथ घोष की मंगलवार शाम को अमेरिका के सेंट लुइस एकेडमी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई."

उन्होंने कहा कि अमरनाथ घोष "परिवार में इकलौते थे, उनकी मां का 3 साल पहले निधन हो गया था और पिता बचपन में ही गुजर गए थे."

उन्‍होंने लिखा, "आरोपी की डिटेल और सब कुछ अभी तक सामने नहीं आया है या शायद उसके कुछ दोस्तों को छोड़कर उसके परिवार में उसके लिए लड़ने के लिए कोई नहीं बचा है. वह कोलकाता से था. बेहतरीन डांसर, वह पीएचडी कर रहा था. शाम की सैर करने निकला था जब अचानक किसी अज्ञात ने उन्‍हें कई बार गोली मारी."

38 वर्षीय महिला ने अपने पोस्ट पर अमेरिका में भारतीय दूतावास, पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को टैग करते हुए कहा कि अमेरिका में कुछ दोस्त शव पर दावा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई अपडेट नहीं है. 

भारतीय मूल के लोगों पर हमले बढ़े 

हाल ही में अमेरिका के राज्य उत्तरी कैरोलिना के न्यूपोर्ट शहर में एक बेघर शख्‍स ने एक भारतीय मूल के मोटल मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 

वहीं 10 फरवरी को वाशिंगटन में एक रेस्तरां के बाहर हमले के दौरान जानलेवा चोटें लगने से 41 साल के भारतीय मूल के एक आईटी एग्जिक्‍यूटिव की मौत हो गई थी.  

इससे पहले 25 वर्षीय भारतीय छात्र विवेक सैनी की जॉर्जिया के लिथोनिया में एक बेघर ड्रग्‍स के आदी शख्‍स ने हत्‍या कर दी थी. 

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Thursday, 29 February 2024

"भारतीय वैक्सीन कंपनियां पूरी दुनिया के लिए खजाना" : NDTV से बोले बिल गेट्स

टेक्नोलॉजी और लोक कल्याण के साथ काम करने वाले दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बिल गेट्स के पास मानवता को लेकर एक अद्वितीय दृष्टिकोण है, जिसे वो विश्व की कुछ सबसे गंभीर समस्याओं को हल करने की कोशिश में सामने लाते हैं. गुरुवार को एनडीटीवी के साथ खास इंटरव्यू में, माइक्रोसॉफ्ट और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के संस्थापक ने डिजिटल बुनियादी ढांचे में भारत के नेतृत्व और वैक्सीन के क्षेत्र में देश के शानदार काम से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक, कई मुद्दों पर बात की.

बिल गेट्स ने हैदराबाद में सोशल मीडिया सेंसेशन डॉली चायवाला की तैयार की गई चाय पर भी बात की.

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और देश की विकास गाथा में इसके योगदान पर, गेट्स ने कहा कि सरकारी भुगतान को सीधे बैंक खातों में स्थानांतरित करना एक बड़ा कदम है, क्योंकि बिचौलियों द्वारा इसमें से कुछ भी छीने बिना, लाभार्थियों को सीधे पैसा मिलता है. इससे सरकार को बड़ी बचत भी हुई है, जिसका उपयोग अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है.

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक ने कहा, "उदाहरण के लिए, मैंने ओडिशा में देखा, जहां सरकार ने किसानों का पंजीकरण किया था. उन्होंने किसान की जमीन और उनकी फसलों को लेकर समझाया. सरकार उन्हें एक नियमित सूचना भेज रहा है कि किसानों को फसलों को लेकर क्या करने की जरूरत है, तो ये एक ऐसा मामला है जहां भारत अग्रणी रहा है, भारत ने ये काम बड़े पैमाने पर किया है.''

उन्होंने कहा, "अभी, गोद लेने के विभिन्न चरणों में 15 अन्य देश भी हैं. जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जी20 बैठक का केंद्र बिंदु बनाया, उससे बहुत कुछ प्रभावित हुआ."

वैक्सीन की अवधि बढ़ाना
इस बात पर जोर देते हुए कि गेट्स फाउंडेशन भारतीय वैक्सीन उद्योग का सबसे बड़ा समर्थक है, गेट्स ने कहा कि देश की कंपनियों ने महामारी के दौरान टीके विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बिल गेट्स ने कहा, "सभी ने कोविड से निपटने में मदद करने के लिए अपना शानदार काम किया और अधिकांश टीके यहीं भारत में बने. हमारे पास टीकों में बहुत सी नई चीजें हैं जो हम चाहते हैं. हम तपेदिक, एचआईवी के लिए टीके चाहते हैं. इन कंपनियों के साथ काम करके उन्हें एमआरएनए अपनाने में मदद की जा रही है, जो एक ऐसी तकनीक है जिसके बारे में हमें लगता है कि ये बहुत उपयोगी होगी और इसलिए तथ्य ये है कि वे बहुत उच्च गुणवत्ता वाले हैं. जब उन्हें सही मात्रा मिलती है, तो उनकी लागत बहुत कम होती है, वे दुनिया के लिए एक खजाना हैं."

गेट्स ने कहा कि वो चाहेंगे कि टीकों द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा की अवधि, जिसमें कोविड भी शामिल है, उसे बढ़ाया जाए, ताकि समान सुविधाओं का उपयोग अन्य बीमारियों के लिए भी किया जा सके.

उन्होंने कहा, "हमें खसरा, तपेदिक और एचआईवी के लिए इसका उपयोग करने को लेकर उन्हीं सुविधाओं, विशेष रूप से समय की जरूरत है और इस एमआरएनए का बहुत सारा काम कैंसर के टीकों के लिए किया जा रहा है. हमारे पास भविष्य में आने वाली महामारी को अडॉप्ट करने की क्षमता बहुत अधिक तेज़ है, ऐसे में टेक्नोलॉजी में अपार संभावनाएं हैं."

नौकरी छूटने का डर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरी जाने की आशंकाओं पर एक सवाल के जवाब में, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक ने कहा कि दुनिया को जल्द ही लेबर की अधिकता देखने को नहीं मिलेगी और उत्पादकता बढ़ने से एक व्यापक समूह अपनी जैसी चीजों तक पहुंचने में सक्षम हो सकता है. बच्चों को व्यक्तिगत ट्यूशन मिल रहा है, जो अब तक केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही उपलब्ध थी.

उन्होंने कहा, "आज दुनिया में 100 साल पहले की तुलना में अधिक नौकरियां हैं, जब आपको मुश्किल से खाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी. तब 80% लोग किसान थे, इसलिए प्रगति ने हमारे जीवन को बहुत समृद्ध बना दिया है. हमने सप्ताह में काम के दिन कम कर दिए, लेकिन ये प्राथमिक बात नहीं है. मुख्य रूप से, जो भोजन हमें दिया जाता है, या मनोरंजन... आप जानते हैं, ये हमारी पिछली पीढ़ियों के सपने से भी कहीं अधिक समृद्ध है."

क्या दुनिया उस चरण में पहुंच रही है, जब एआई सिस्टम अनिवार्य रूप से इंसानों की तरह काम कर रहे हैं, गेट्स ने कहा कि इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, खासकर पिछले दो सालों में, लेकिन मशीनों का नजरिया इंसानों से अलग है.

उन्होंने कहा, "गणना जैसी चीजों में कंप्यूटर हमेशा बेहतरीन रहा है और हम ऐसे कई मील के पत्थर तक पहुंचे हैं, जैसे जब कंप्यूटर शतरंज में सर्वश्रेष्ठ था, या जब कंप्यूटर एक बोर्ड गेम में बेस्ट था. अब, यदि लिखने की ही बात हो तो आप जानते हैं, कि 99% लोग कविताएं, गीत या कुछ लिखने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं. ये एक अच्छी बात हो सकती है, लेकिन एआई स्पष्ट रूप से हम से अलग है, ये हमारी तुलना में कई गलतियां करता है."

एनीमिया ब्रेकथ्रू
भारत पर बीमारी के बोझ के बारे में बिल गेट्स ने कहा कि एनीमिया और कुपोषण दुनिया के लिए गेट्स फाउंडेशन की शीर्ष प्राथमिकताओं में से दो हैं और देश को उस क्षेत्र में एक चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत भी इन मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है और कुछ सफलताएं मिली हैं.

उन्होंने कहा, "एनीमिया के लिए, हम हमेशा से जानते हैं कि एक महिला गर्भावस्था के दौरान कई बार चेकअप के लिए आती है और इंजेक्शन लेती हैं. हम उस एनीमिया से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये बहुत महंगा और जटिल है. हालिया सफलता ये है कि एक सूत्रीकरण है कि एक महिला केवल एक बार ही आ सकती है, और फिर हम सुई लगाने में मदद के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं."

गेट्स ने कहा, "हम उस एक इनफ्यूजन की कीमत 10 डॉलर (लगभग 800 रुपये) से कम करने के लिए भारतीय भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं और इससे उन मां को लाभ होता दिख रहा है. उनकी मानसिक स्थिति अच्छी होती है और शिशु के मस्तिष्क का विकास भी काफी बेहतर होता है. एनीमिया को नाटकीय रूप से कम करना होगा और इसमें बहुत उम्मीद है."

जलवायु संकट
गेट्स ने कहा कि वो जलवायु संकट को कम करने के साथ-साथ देशों को अनुकूलन में मदद करने में भी शामिल हैं, जिसका काम गेट्स फाउंडेशन द्वारा किया जाता है. उन्होंने कहा, ऐसी चीजों के माध्यम से नवीनीकरण किया जाता, है जैसे नई फसलें उगाना जो उच्च तापमान और सूखे का सामना कर सकें.

जलवायु परिवर्तन में विकसित देशों की बड़ी भूमिका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "भारत एक बहुत ही जलवायु प्रभावित देश है. ये एक तरह से हास्यास्पद है कि नरम क्षेत्र के देश इस समस्या के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित नहीं हैं, क्योंकि पूर्ण तापमान इतना अधिक नहीं है और, आप जानते हैं, हमारी कारों में और हमारे घरों में एयर कंडीशनर हैं, इसलिए हम कुछ हद तक पहले से ही अनुकूलित हैं."

उन्होंने बताया कि भारत सहित अन्य देशों में अच्छी प्रथाएं अपनाई जा रही हैं, जो दिखा रही हैं कि तैयारी से क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीला बनाया जा सकता है.

'शानदार चाय'
हल्के-फुल्के अंदाज में, गेट्स से ये भी पूछा गया कि उन्होंने डॉली चायवाला द्वारा बनाई गई चाय पी थी और उसका स्वाद कैसा था.

अरबपति ने कहा, "मैं खुद को इसका सबसे अच्छा जज नहीं मानता, लेकिन वो अच्छा था. वहां सुबह हैदराबाद का एक सुंदर दृश्य था और उन्होंने मुझे बताया कि वे एक अच्छे चायवाले को लाए हैं, और वो बहुत फोटोजेनिक था, इसलिए वो मज़ेदार था."



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Wednesday, 28 February 2024

दिल्ली : 5 दिन से लापता युवती का मिला शव, हत्या के बाद दोस्त ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान - पुलिस

बाहरी-उत्तरी दिल्ली के नरेला इलाके में एक स्कूल चलाने वाली महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई. बुधवार दोपहर पांच दिनों बाद महिला का शव उसके ही स्कूल के दफ्तर से बरामद हुआ. महिला की पहचान 32 साल की वर्षा पंवार के रूप में हुई है. वर्षा पिछले पांच दिनों से गायब थी. उसके घरवालों ने नरेला थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई हुई थी.  हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस (Delhi Police) ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि वर्षा के कारोबारी पार्टनर और उसके करीबी दोस्त सोहन लाल ने सोनीपत के हरसाना के पास ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली है.

महिला की हत्या के बाद उसके मित्र ने की आत्महत्या
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में ऐसा लगता ही कि वर्षा की हत्या करने के बाद सोहन लाल ने खुदकुशी कर अपनी जान दे दी है. वहीं वर्षा के करीबियों का कहना है कि वह भाजपा की कार्यकर्ता थी.  उसने व सोहन ने साथ मिलकर प्ले स्कूल खोला था, जो अप्रैल में शुरू होने वाला था.  पुलिस के मुताबिक वर्षा परिवार के साथ स्वतंत्र नगर में रहती थी. वर्षा ने अपने करीबी दोस्त सोहन लाल के साथ मिलकर नरेला इलाके में टिनी ड्रीमबेरी प्ले स्कूल के नाम से स्कूल खोला था. स्कूल में लगभग सारा काम पूरा हो चुका था. इस बीच 23 फरवरी को किसी काम से जाने की बात कर वर्षा घर से स्कूटी लेकर निकल गई. इसके बाद वह वापस नहीं लौटी. घरवाले उसे कॉल करते रहे, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया. 

24 फरवरी को महिला के पिता ने दर्ज करवाया था केस
24 फरवरी को वर्षा के पिता विजय कुमार ने बेटी के मोबाइल पर कॉल किया तो किसी ने फोन रिसीव किया. उसने बताया कि जिसके पास यह मोबाइल फोन है, वह ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी करना चाहता है.  इसको मरने से रोका हुआ है. वीडियो कॉल की गई तो बदहवास सोहन लाल को लोगों द्वारा पकड़ते देखा गया. वर्षा का परिवार सोनीपत के हरसाना गांव पहुंचा. वहां पर सोहन तो नहीं मिला, लेकिन गांव के लोगों से वर्षा का मोबाइल फोन मिल गया. उन्होंने बताया कि सोहन लाल उनसे छुटकर भाग गया है. वर्षा के घरवाले उसी दिन वापस दिल्ली पहुचे. 24 फरवरी की शाम को नरेला थाने में वर्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई. 

स्कूल में मिला शव
पुलिस टीम वर्षा के स्कूल उसकी तलाश में पहुंची यहां स्कूल में बेसमेंट व बाकी जगह उसको देखा गया.  छोटे से ऑफिस पर लोहे का शटर लगा है, उसको खोलकर नहीं देखा गया। इस बीच परिजन सोहन को कॉल करते रहे, उसका भी नंबर नहीं लगा.  न ही वर्षा का कुछ पता चल पा रहा था. बुधवार को  नरेला में रहने वाले लोगों को स्कूल के अंदर से बदबू महसूस हुई. शटर खोला गया तो अंदर वर्षा का एक हाथ दिखाई दिया. इसके बाद पुलिस को खबर दी गई. इसके बाद पुलिस ने शव बरामद कर लिया. इसके बाद पुलिस ने सोहन की तलाश शुरू की. बुधवार शाम को दिल्ली पुलिस ने रेलवे पुलिस हरियाणा से संपर्क किया.जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को रेलवे पुलिस से पता चला कि 25 फरवरी को सोनीपत के पास रेलवे ट्रैक से एक शव बरामद हुआ है. शव सोहन लाल का ही बताया जा रहा है.  

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क्या राज्य खनिज संपदा वाली जमीन पर टैक्स लगा सकते हैं? केंद्र ने SC में हलफनामा दायर कर रोक लगाने की मांग की

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर राज्य सरकारों के द्वारा खनिज पर रॉयल्टी से अधिक टैक्स लगाने का विरोध किया है. केंद्र ने अदालत से - राज्यों द्वारा रॉयल्टी से अधिक टैक्स लगाने की अनुमति ना देने को कहा है. केंद्र सरकार ने  सुप्रीम कोर्ट से कहा कि खनिज समृद्ध राज्यों द्वारा लगाए गए टैक्स से मुद्रास्फीति बढ़ेगी. खनन क्षेत्र में FDI में बाधा आएगी. भारतीय खनिज महंगा हो जाएगा. व्यापार घाटे में वृद्धि और राज्यों के बीच विषम आर्थिक विकास के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा.

खनन मंत्रालय ने कहा है कि चूंकि खनिज अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे बिजली, स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम आदि के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं, इसलिए कीमतों में कोई भी वृद्धि राज्यों द्वारा लगाए गए अतिरिक्त उपकर के कारण ये खनिज देश में मुद्रास्फीति को बढ़ावा देंगे.

उदाहरण के लिए, यदि प्रमुख उत्पादक राज्यों में से एक द्वारा कोयले पर अतिरिक्त उपकर लगाया जाता है तो ऐसे राज्य से कोयला खरीदने वाले सभी राज्य बिजली शुल्क बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे.जो सीधे मुद्रास्फीति को प्रभावित करेगा. 78% कोयला संसाधन ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में केंद्रित हैं. भारत का 55% वाणिज्यिक ऊर्जा उत्पादन कोयले पर निर्भर है और उत्पादित कोयले का 68% बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है. हलफनामे में कहा गया है कि देश भर में सुव्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से विकास को आगे बढ़ाने के लिए, प्रतिस्पर्धी कीमतों पर देश भर में खनिज आधारित कच्चे माल (लौह अयस्क और स्टील सहित) की उपलब्धता आवश्यक है, जिसमें कुछ राज्यों में संसाधन व खनिज की एकाग्रता के प्रभावों को विधायी रूप से संबोधित करना शामिल है.

केंद्र सबके लिए समान रूप से काम करता है
केंद्र के पास खनिज संसाधन संचालित विकास के स्थानीयकृत हिस्से बनाने के बजाय, देश भर में सामंजस्यपूर्ण खनिज विकास सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सार्वजनिक हित को आगे बढ़ाने के कर्तव्य के साथ-साथ शक्ति भी है. एक गैर-सामंजस्यपूर्ण राजकोषीय व्यवस्था, कम खनिज संपन्न राज्यों को खनिज समृद्ध राज्यों से उच्च कीमतों पर कच्चे माल की खरीद करने के लिए मजबूर करेगी. केंद्र द्वारा निर्धारित रॉयल्टी की एक समान लेवी खेल के मैदान को समतल करती है, जिससे देश भर में घरेलू उद्योग को न्यायसंगत तरीके से बढ़ावा मिलता है.साथ ही राज्यों के लिए राजस्व सृजन भी सुनिश्चित होता है.

रॉयल्टी खनिजों की अंतरराष्ट्रीय कीमत के आधार पर तय होती है
रॉयल्टी खनिजों की अंतरराष्ट्रीय कीमत को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है ताकि निर्यात को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए इनकी लागत और ऐसे खनिजों का उपयोग करके तैयार उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी रखा जा सके .यह सुनिश्चित करना कि खनिजों पर राजकोषीय शुल्क लगाने की शक्ति केंद्र सरकार के लिए आरक्षित है.- इसलिए खनिज बाजारों में अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर त्वरित और लचीली प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मौलिक है.

सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि राज्य टैक्स लगाएंगे या नहीं?
दरअसल राज्यों पर असर डालने वाले मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों के संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू की है.राज्यों के टैक्स लगाने के अधिकार से जुड़ी 85 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई है. कोर्ट को यह तय करना है कि क्या राज्य खनिज संपदा वाली जमीन पर टैक्स लगा सकते हैं? यह मामला 25 साल से लंबित है. कोर्ट के फैसले से झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्व के खनिज समृद्ध राज्यों के कर राजस्व पर गंभीर असर पड़ सकता है.अदालत को टैक्स को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की शक्तियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों की महत्वपूर्ण व्याख्या करनी है.

ये मामला 2011 में 9 जजों की बेंच को भेजा गया था.तीन जजों की बेंच ने 9  जजों की बेंच को भेजे जाने के लिए 11 सवाल तैयार किए थे.इनमें महत्वपूर्ण टैक्स कानून के सवाल शामिल हैं जैसे कि क्या 'रॉयल्टी' को टैक्स के समान माना जा सकता है. क्या राज्य विधानमंडल भूमि पर टैक्स लगाते समय भूमि की उपज के मूल्य के आधार पर टैक्स का उपाय अपना सकता है.तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सीधे  9  जजों के पास  भेजा  था. क्योंकि इस मामले में पांच जजों और सात जजों के संविधान पीठ के फैसलों के बीच विरोधाभास था .

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