Tuesday, 30 May 2023

गहलोत-पायलट विवाद में अब भी सुलग रही चिंगारी? सुलह की कोशिश का होगा असर या फिर होगा घमासान

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके प्रतिद्वंद्वी सचिन पायलट के साथ बैठक के बाद कांग्रेस की एकता प्रदर्शित करने की कोशिश कई सवाल अनसुलझे सवाल छोड़ गई है. यह दर्शाता है कि कांग्रेस को इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी संभावनाओं को खतरे में डालने वाले झगड़े को सुलझाना बाकी है. सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के साथ कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के बीच चार घंटे की बैठक में सत्ता साझा करने के फॉर्मूले पर कोई सहमति नहीं बन पाई. 

बैठक के बाद अशोक गहलोत के बाहर निकलने वाले दृश्‍यों ने उन खबरों की पुष्टि की है, जिनमें पायलट के साथ उनकी अनबन हमेशा की तरह मजबूत है. 

गहलोत ने आज सुबह संवाददाताओं से कहा कि वह पायलट के साथ काम करेंगे और चुनाव जीतेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को "धैर्य" रखना चाहिए और सेवा के अवसर की प्रतीक्षा करनी चाहिए.

गहलोत ने कहा, "मुझे सोनिया गांधी के शब्द याद हैं, जिन्होंने कांग्रेस के अधिवेशन में पार्टी कार्यकर्ताओं को धैर्य रखने के लिए कहा था और वे किसी न किसी तरह से पार्टी की सेवा करेंगे. मैं इसे अपने दिल में रखता हूं और पार्टी कार्यकर्ताओं से कहता हूं कि धैर्य रखें. उन्हें किसी न किसी रूप में पार्टी की सेवा करने का अवसर मिलेगा. इसलिए मैं धैर्य, धैर्य, धैर्य का आह्वान करता हूं."

यह पूछे जाने पर कि क्या पायलट उनके साथ काम करेंगे, उन्होंने कहा: "अगर वह पार्टी में हैं तो क्यों नहीं? यह आलाकमान को तय करना है कि कोई क्या भूमिका निभाता है. यह हमारे ऊपर नहीं है, यह आलाकमान के ऊपर है.  मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है. मैं राजस्थान में तीन बार मुख्यमंत्री और इतनी बार ही केंद्रीय मंत्री रह चुका हूं. यह मेरा कर्तव्य है कि मैं वह करूं जो आलाकमान मुझसे चाहता है और वह है जीतना चुनाव."

सोमवार को खरगे के घर हुई बैठक के बाद कांग्रेस ने कहा कि दोनों नेताओं ने पार्टी के 'प्रस्ताव' पर सहमति जताई है और मिलकर चुनाव लड़ेंगे. 

'आलाकमान पर छोड़ा फैसला' 
पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने आगामी चुनावों के लिए 'शांति समझौते' या जिम्मेदारियों के विभाजन का कोई भी विवरण साझा नहीं करते हुए कहा, "दोनों नेताओं ने सर्वसम्मति से एक साथ काम करने का फैसला किया है और आलाकमान पर फैसला छोड़ दिया है."

मुलाकात के बाद की चुप्‍पी 
सूत्रों ने कहा कि खरगे और राहुल गांधी ने पहले गहलोत के साथ दो घंटे तक बातचीत की और फिर पायलट से अलग से मुलाकात की. बाद में सभी एक साथ बैठकर फोटो खिंचवाने लगे. हालांकि गहलोत और पायलट, वेणुगोपाल के साथ बाहर चले गए और चुप रहे. 

असहज करने वाली मांगें 
अपनी ही पार्टी को असहज करने वाली स्थिति में डालते हुए पायलट ने राजस्थान में कई मांगें की हैं, जिसमें गहलोत के भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई करने की मांग भी शामिल है. 

पीछे हटने से पायलट का इनकार!
पायलट ने कांग्रेस को यह घोषणा करते हुए नोटिस दिया है कि यदि इस महीने के अंत तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह राज्य भर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. बताया जा रहा है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बैठक में अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है.

'पद की पेशकश नहीं करेगा आलाकमान' 
गहलोत की कल की टिप्पणी भी कांग्रेस की मदद नहीं करेगी. गहलोत ने कल कहा था कि कांग्रेस आलाकमान मजबूत है और किसी नेता को शांत करने के लिए कभी भी किसी पद की पेशकश नहीं करेगा. 

2018 के बाद से जारी है घमासान 
राजस्‍थान में 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही गहलोत और पायलट के बीच सत्ता को लेकर घमासान जारी है.  हालांकि पायलट दूसरी भूमिका निभाने के लिए सहमत हुए, उन्होंने 2020 में बगावत कर दी और दिल्ली के पास कई दिनों तक डेरा डाले रखा. हालांकि गांधी परिवार के समाधान का आश्वासन देने के बाद यह मामला शांत हुआ. 80 से अधिक विधायकों ने गहलोत के साथ रहना चुना, जिसके कारण बगावत विफल हो गई. किसी भी वक्‍त पर पायलट अपने समर्थन में 20 से अधिक विधायक नहीं जुटा सके, जिससे पार्टी के लिए एक पक्ष चुनना कठिन हो गया है. पिछले साल करीब 72 विधायकों ने गहलोत को पार्टी अध्यक्ष बनाने के कांग्रेस के कदम के विरोध में इस्तीफा दे दिया. पार्टी के इस कदम का अर्थ था कि राजस्थान में उनकी जगह कोई और लेगा, शायद पायलट. 

अकेले ही शुरू कर दिया था अभियान 
इस साल की शुरुआत में पायलट ने राज्य में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के तुरंत बाद राजस्थान चुनाव के लिए एक अकेले ही अभियान शुरू किया. 

गहलोत ने पायलट पर बोला था तीखा हमला  
गहलोत ने पायलट पर लगातार हमलों के साथ यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेंगे. मुख्यमंत्री उन्‍हें गद्दार, निकम्मा और कोरोना वायरस तक बता चुके हैं. 
 



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Monday, 29 May 2023

ऑडी कार में चाय की दुकान लगाता है ये शख्स, चायवाले का स्वैग देख लोग हैरान, बोले- गरीब के लिए कुछ तो छोड़ दो...

ऐसा लगता है कि चाय बेचना बहुत सारे लोगों के लिए एक वैकल्पिक करियर विकल्प बन गया है. आपने शायद एमबीए चायवाला (MBA Chaiwala), बीटेक चायवाली (BTech Chaiwali) और यहां तक ​​कि क्रिप्टोकरंसी स्वीकार करने वाले चायवाले के बारे में भी सुना होगा. लेकिन क्या आपने किसी ऐसे चायवाले के बारे में सुना है जिसका स्टॉल एक महंगी लग्जरी कार से चलता है?

हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा है. मुंबई की ऑडी चायवाला (Audi Chaiwala) का एक वीडियो इंटरनेट पर खूब चर्चा में है. स्टॉल की शुरुआत अमित कश्यप और मन्नू शर्मा ने की. मुंबई (Mumbai) के लोखंडवाला बैकरोड पर हर रोज उनकी दुकान लगती है.

क्लिप में, दोनों को उनके निर्धारित स्थान तक ड्राइव करते और ऑन ड्राइव टी नाम से अपना स्टॉल लगाते हुए देखा जा सकता है.

देखें Video:

पोस्ट को कई हजार व्यूज और कई रिएक्शन मिले हैं. ऑन ड्राइव टी का अपना इंस्टाग्राम है जहां वे ग्राहकों से नियमित पोस्ट और रिव्यू शेयर करते हैं.

लीक से हटकर बिजनेस के बारे में लोगों के पास कहने के लिए बहुत कुछ था. जहां कुछ लोगों ने ऑडी से चाय बेचने वाले पुरुषों की काफी आलोचना की, वहीं बाकी लोगों को यह काफी दिलचस्प लगा.
 

वन विभाग, पुलिस अधिकारी मिलकर अरिकोम्बन हाथी को किया रेस्क्यू



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Delhi Murder Case: जानें कैसे एक फोन कॉल ने पकड़वाया प्रेमिका की हत्या के आरोपी साहिल को

पुलिस ने सोमवार को कहा कि नई दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके में एक नाबालिग लड़की की जघन्य हत्या के आरोपी को उसके पिता को फोन करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने साहिल को कैसे गिरफ्तार किया, इसका खुलासा करते हुए कहा गया है कि आरोपी फोन बंद करने के बाद छिप गया था.हालांकि आरोपी द्वारा अपने पिता को फोन करने के बाद उस पर तकनीकी निगरानी रखी गई. जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद आरोपी भाग गया था और छिपने के लिए बुलंदशहर में अपने रिश्तेदार के यहां चला गया था. 

पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी साहिल ने हत्या करने के बाद अपना मोबाइल बंद कर लिया था.पुलिस के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लड़की के सिर पर किसी मजबूत वस्तु से हमला किया गया था, जिससे उसे गंभीर चोट आई और उसकी मौत हो गई.

इस घटना का लगभग 90 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, जिसमें आरोपी एक हाथ से लड़की को दीवार की तरफ धकेलकर बार-बार उस पर चाकू से वार करता नजर आ रहा है. वह लड़की के जमीन पर गिरने पर भी नहीं रुकता है, उस पर 20 से अधिक बार चाकू से वार करता है, उसे कई बार लात मारता है और फिर सीमेंट के स्लैब से उस पर कई बार हमला करता है.

इस घटना का लगभग 90 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, जिसमें आरोपी एक हाथ से लड़की को दीवार की तरफ धकेलकर बार-बार उस पर चाकू से वार करता नजर आ रहा है. वह लड़की के जमीन पर गिरने पर भी नहीं रुकता है, उस पर 20 से अधिक बार चाकू से वार करता है, उसे कई बार लात मारता है और फिर सीमेंट के स्लैब से उस पर कई बार हमला करता है.

घटना के सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं. जहां आरोपी को लड़की पर कई बार चाकू से वार करते और फिर उसके सिर पर पत्थर से वार करते देखा जा सकता है. वहां कई स्थानीय लोग मौजूद देखे जा सकते हैं लेकिन किसी ने मामले में हस्तक्षेप नहीं किया. 

पुलिस ने मामले में शाहबाद डेयरी थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया है. सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता के हाथ पर एक टैटू भी था, जिसमें प्रवीण नाम लिखा हुआ था.

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘लड़की के 2021 से साहिल से संबंध थे, लेकिन बाद में अक्सर उनकी लड़ाई होने लगी, जिससे उनके रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे. लड़की ने साहिल से बात करना बंद कर दिया था और वह उसके साथ पूरी तरह से संबंध खत्म करना चाहती थी, लेकिन वह लड़की से संपर्क करता रहा और फिर से रिश्ता बनाना चाहता था.'' उन्होंने कहा, ‘‘शनिवार को भी दोनों का झगड़ा हुआ था, जिससे उनके संबंध और खराब हो गए. यह हत्या के पीछे का कारण हो सकता है.''

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दिल्ली में बारिश से मौसम हुआ सुहावना, चार जून तक 'लू' की संभावना नहीं

राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को फिर से तेज हवाओं के साथ बारिश होने और आसमान में बादल छाए रहने से मौसम सुहावना हो गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र ने कहा है कि चार जून तक राजधानी में 'लू' की स्थिति लौटने की संभावना नहीं है. आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि राजधानी में सोमवार दोपहर 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और कई इलाकों में हल्की बारिश हुई.

मौसम विभाग ने 'येलो' अलर्ट जारी किया है, जिसमें लोगों को यातायात बाधित होने और निचले इलाकों में पानी भरने की चेतावनी दी गई है. आईएमडी मौसम की चेतावनी के लिए चार कलर कोड का उपयोग करता है : हरा (कार्रवाई की जरूरत नहीं), पीला (देखें और अपडेट रहें), नारंगी (तैयार रहें) और लाल (कार्रवाई करें). दिल्ली के प्रमुख मौसम विज्ञान केंद्र सफदरजंग वेधशाला के मुताबिक सोमवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री कम 21.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया. जबकि अधिकतम तापमान के 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.

सामान्य रूप से 39.5 डिग्री सेल्सियस के औसत अधिकतम तापमान के साथ मई का महीना दिल्ली में सबसे गर्म महीना रहता है. लेकिन, इस बार मई में सामान्य से कम तापमान और अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है. मौसम विज्ञानियों ने इस घटना के लिए सामान्य से अधिक पश्चिमी विक्षोभ को जिम्मेदार ठहराया - एक ऐसी मौसम प्रणाली जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उत्पन्न होती है और इस मौसम में उत्तर-पश्चिम भारत में बेमौसम बारिश लाती है.

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, सफदरजंग वेधशाला ने मई में अब तक 86.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है. आम तौर पर पूरे महीने में राष्ट्रीय राजधानी में औसतन 19.7 मिलीमीटर बारिश होती है. दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में घने कोहरे का एक असामान्य घटनाक्रम भी देखा गया. चार मई को न्यूनतम तापमान गिरकर 15.8 डिग्री सेल्सियस हो गया था, जो आईएमडी द्वारा 1901 में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत करने के बाद से मई के महीने की तीसरी सबसे ठंडी सुबह थी.

शहर में अप्रैल में 20 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो 2017 के बाद से इस महीने में सबसे अधिक है. मई में केवल नौ दिनों के लिए दिल्ली में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया. आईएमडी के अनुसार, ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण सोमवार और मंगलवार को कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने के साथ ही बारिश होने और ओले गिरने की संभावना है.

अधिकतम तापमान के चार जून तक 40 डिग्री सेल्सियस से कम ही रहने के आसार हैं. इस महीने की शुरुआत में, मौसम कार्यालय ने मई में उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम अधिकतम तापमान और 'लू' की स्थिति वाले कम दिनों की भविष्यवाणी की थी.

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चुनावी रणनीति में माहिर PM नरेंद्र मोदी कैसे बन गए BJP की जीत की 'गारंटी'?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बारे में कुछ लिखते या बात करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (#9YearsOfPMModi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र एक साथ करना आम बात हो चुकी है. जनता के बीच मोदी की व्यापक लोकप्रियता और कुशल रणनीतिकार के तौर पर शाह की प्रतिभा को एक साथ जोड़कर या एक-दूसरे की पूरक मानकर व्यक्त किया जाता है. 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री  (9 Years of Modi Government) बनने के बाद से बीजेपी के लिए वह चुनाव में एक तरह से जीत की गारंटी बन चुके हैं. 

मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने पर NDTV खास डॉक्यूमेंट्री सीरीज (PM Modi Documentary Series Episode 6) लेकर आया है. आज सीरीज के छठें एपिसोड में जानें आखिर चुनाव में मोदी फैक्टर (#BJPpollmachinery) इतना मजबूत क्यों है?  ऐसा क्या है कि विपक्ष मोदी फैक्टर का कोई तोड़ नहीं ढूंढ पा रहा है?  (यहां देखिए, डॉक्यूमेंट्री सीरीज के छठें एपिसोड का पूरा वीडियो)

मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा. मैं भारत की प्रभुता और अखंडा का अक्षुण्ण रखूंगा. मैं संघ के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूंगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेश के बिना सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा.

नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री

2014 में 17 करोड़ मतदाताओं ने बीजेपी को चुना
26 मई 2014 को जो शुरुआत हुई थी, वो आज तक जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदार दास मोदी सबसे कामयाब राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी को 9 साल तक लगातार जीत दिलाते आए हैं. ये सफर अभी थमा नहीं है. 2014 में भारत में 82 करोड़ मतदाता थे. यूरोप, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को मिला दे तो, ये संख्या उनकी पूरी आबादी है. इनमें से करीब 55 करोड़ ने वोट डाले. इनमें से 17 करोड़ मतदाताओं ने बीजेपी को चुना. इतने लोग अगर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक खड़े हो जाए, तो इससे चार सीधी कतारें बन जाएंगी.

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2019 में बीजेपी को मिले 23 करोड़ वोट
2019 में भारत में 91 करोड़ मतदाता थे. यानी यूरोप, रूस और ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी के बराबर मतदाता. 2019 के चुनाव में बीजेपी को अगले 23 करोड़ वोट मिले, जो उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक लोगों की छह कतारों के बराबर है. मोदी के राजनीतिक दल बीजेपी ने आखिर ये कैसे किया? क्या ये अकेले मोदी का जादू है?

निश्चित रूप से ये पीएम मोदी का नेतृत्व बीजेपी की जीत में एक बड़ा और महत्वपूर्ण पड़ाव है.

भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
किताब 'द आर्किटेक्ट ऑफ द न्यू बीजेपी' के लेखक अजय सिंह कहते हैं, "मोदी फैक्टर महत्वपूर्ण है, इसमें तो कोई दोराय नहीं है. हमने जो किताब लिखी-'द आर्किटेक्ट ऑफ द न्यू बीजेपी'... उसमें हमने जिक्र किया है कि ऑर्गनाइजेशन की अहमियत को भी कम करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि ये भी एक बड़ा फैक्टर है. जहां एक इंडिविजुअल चार्म है,वहीं ऑर्गनाइजेशन का प्रभाव भी एक बड़ा फैक्टर है." 

लेखक, राजनयिक और पूर्व राज्यसभा सांसद पवन के वर्मा कहते हैं, "बीजेपी के पास एक मजबूत नेता, एक करिश्माई नेता और हर ऐतबार से एक लोकप्रिय नेता है. लोग उनसे सहमत हों या न हों... लेकिन वो अपनी पार्टी के निर्णायक नेता हैं."

लोकनीति-सीएसडीएस के सह निदेशक संजय कुमार कहते हैं, "2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह की जीत बीजेपी को मिली. साथ ही अन्य राज्यों के चुनाव में जो जीत बीजेपी को मिली... इसका श्रेय तो पीएम मोदी को जाता है. ऐसे राज्य हैं, जहां ऐसा लगता नहीं था कि बीजेपी जीत पाएगी... पार्टी वहां कमजोर दिखाई पड़ती थी, लेकिन पार्टी को जीत मिल गई. कई राज्यों के चुनाव ऐसे हैं जहां पीएम मोदी के कारण ही बीजेपी को जीत हासिल हुई."

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नई दिल्ली में बीजेपी का मुख्यालय, जहां सभी बड़े निर्णय लिए जाते हैं. जीत चाहे जितनी छोटी हो या जितनी बड़ी... जश्न यहीं मनाया जाता है. जब-जब चुनाव के नतीजे आते हैं, तब-तब शाम को बीजेपी के नेता यहां जमा होते हैं.

लोकनीति-सीएसडीएस के सह निदेशक संजय कुमार कहते हैं, "ये एक मौका होता है, जब पीएम मोदी अपने कार्यकर्ताओं के साथ बात करते हैं. वो अपने कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाते हैं. उन्हें धन्यवाद देते हैं. पीएम मोदी यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि बीजेपी के लिए हर जीत अहम है. आपने ध्यान दिया होगा कि जब पीएम मोदी ऐसे संदेश देते हैं, तो वो आने वाले चुनावों का भी जिक्र करते हैं. ये एक तरह से संगठन को मजबूत रखने का एक जरिया है." 

चुनाव दर चुनाव बीजेपी का स्ट्राइक रेट विपक्षी दलों के मुकाबले अच्छा रहा है. पिछले 4 दशकों में बीजेपी की सफलता की तस्वीर देश के नक्शे में देखी जा सकती है. इसीलिए सन 1984 में बीजेपी के पास 2 सांसद थे. 2019 में पार्टी अपने दम पर 300 के पार (303) पहुंच गई.

लोकतंत्र में पहली बात तो हार भी कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन हां... हर पार्टी जीतने के लिए चुनाव लड़ती है. बीजेपी में अमित शाह जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, तो उन्होंने पार्टी की सदस्यता के विस्तार के लिए एक बहुत बड़ा कैंपेन चलाया. पार्टी अध्यक्ष के नाते उन्होंने अपने कार्यकाल में लगभग तीन बार पूरे हिंदुस्तान का दौरा किया. देश के जिलों में रात गुजारी. कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं. जब शीर्ष नेतृत्व इतनी सहजता के साथ जिलास्तर पर उपलब्ध होता है,तो कार्यकर्ताओं में नैतिक बल भी खड़ा होता है और लड़ने की ताकत भी खड़ी होती है.

भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री

मोदी की पार्टी का दावा है कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है.पार्टी को अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं पर गर्व है. लेकिन अगर मोदी को इससे अलग कर दें, तो क्या भारी जीत का ये सिलसिला जारी रहेगा?

अजय सिंह कहते हैं, "मोदी जी हैं तो जीत है या ऑर्गनाइजेशन है तो जीत है... ये सवाल वैसा ही है कि पहले मुर्गी आई या अंडा. राजनीति में ऐसे सवाल का जवाब देना मुश्किल हो जाता है, लेकिन ज़ाहिर है दोनों की बराबर की महत्ता है. लेकिन, मेरे विचार में अगर आपका संगठन मज़बूत है, तो वो व्यक्तियों से अधिक लंबा चलता है. संगठन अपने समय के आदर्श खुद ईजाद करते हैं." 

लोकनीति-सीएसडीएस के सह निदेशक संजय कुमार बताते हैं, "मेरी राय में अब इस मशीन को मोदी के बिना कुछ करने में बड़ी मुश्किल आएगी. हमने विधानसभा और लोकसभा चुनावों का सर्वेक्षण किया. इस बारे में बहुत चर्चा होती रहती है कि प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी के लिए कितने बेशक़ीमती हैं. हमने उसको परिमाणित करने की कोशिश की. हमने ये पाया कि 2019 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को मिलने वाले हर 100 वोटों में से 36 प्रधानमंत्री मोदी की वजह से आए. ये मोदी का बीजेपी को तोहफ़ा था. मशीनरी की अहमियत है, गाड़ी की ज़रूरत होती है एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए, लेकिन गाड़ी चलाने के लिए एक अच्छा ड्राइवर चाहिए. मेरे विचार में प्रधानमंत्री मोदी इस मशीन को आगे ले जाने के लिए बहुत अच्छे चालक साबित हुए हैं."

बीजेपी अपनी संगठनात्मक शक्ति और आरएसएस के अलावा संघ परिवार के दूसरे संगठनों की मदद से भी सत्ता में है. मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, जाति की जटिलताओं की समझ और सबसे अहम बीजेपी की प्रमुख विचारधारा हिंदुत्व के बल पर आई. यही कारण है कि इस दल को राम मंदिर आंदोलन के दौरान जो समर्थन मिला, उसके बाद इसने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ज़ाहिर है पार्टी अपनी इस ताक़त को और मज़बूत कर रही है. 

क्यों जीतते हैं मोदी- जातिगत गणित
दो साल पहले नलिन मेहता की किताब 'द न्यू बीजेपी' बताती है कि मोदी की चुनावी जीत सिर्फ़ प्रचार और उत्साह के बल पर नहीं बल्कि, जातिगत गणित की गहरी और वैज्ञानिक समझ के हिसाब से उसके प्रबंधन का नतीजा है. इन अध्यायों में राज्य और ज़िले के स्तर पर अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के प्रतिनिधित्व की कुल संख्या की चर्चा है. ये हैरानी की बात नहीं कि बीजेपी गैर-जाटव दलितों को लुभाने की कोशिश करती है, जो बीएसपी के पारपंरिक वोटर हैं या यदुवंशियों के एक हिस्से को, जो पारंपरिक तौर पर सपा के वोटर रहे हैं। 2014 में, भारत के सबसे घनी आबादी वाले राज्य यूपी में बीजेपी को 80 में 70 से ज़्यादा सीटें मिलीं. और 2019 में जब सपा-बसपा एक होकर लड़े थे, तब भी बीजेपी 60 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. यही कहानी राज्य दर राज्य दोहराई जा रही है. कुछ राज्यों में पार्टी कामयाब है, कुछ में नहीं.

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संजय कुमार कहते हैं, "ये बीजेपी ने कोई नई बात नहीं की है, लेकिन उसने कई दूसरे दलों से इसे बेहतर तरह से किया है. आंकड़े देखें कि कैसे अलग अलग चुनावों में OBC ने वोट दिए. 2009 चुनावों में बीजेपी को मिलने वाले लगभग 12-14% वोट में से 20% वोट ओबीसी के थे. लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों में 44% ओबीसी वोट बीजेपी को मिले, यानी दोगुने. अगर देखें कि ये कौन से ओबीसी हैं जो अब बीजेपी को वोट दे रहे हैं तो ये ज़्यादातर निम्न ओबीसी में से हैं." 

संजय कुमार आगे कहते हैं, "बीजेपी को एहसास हुआ कि ओबीसी के साथ जातिगत तालमेल बनाना होगा. दलित भी अब बीजेपी को समर्थन देने लगे हैं, आदिवासी भी बीजेपी को वोट दे रहे हैं. देखिए जब द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं, तो उन्होंने इसका बड़े ज़ोरशोर से प्रचार किया कि बीजेपी सरकार ने ये काम किया है. तो बीजेपी को ये पता था कि स्थिर समर्थकों का आधार बनाने के लिए जाति गठबंधन बनाना पड़ेगा और ये वो पिछले 10 साल से सफलतापूर्वक करते रहे हैं."

क्या यही वजह है कि विपक्ष अब चाहता है कि सरकार जाति आधारित जनगणना करवाए? ताकि ये पता चल जाए कि ओबीसी और दूसरी जातियों की असल संख्या कितनी है? ये काम पिछली बार 1930 में अंग्रेज़ों के राज में हुआ था...2011 में सुगबुगाहट थी लेकिन कुछ हुआ नहीं. बीजेपी इस मामले पर खुल कर कुछ भी नहीं कह रही. 

मोदी अपने उपलब्धियों को रोज़ाना कई कई बार दोहराते हैं...सड़कों से लेकर हवाई अड्डों और बंदरगाहों का ज़िक्र करते हैं. विकास अहम है, लेकिन बीजेपी ये नहीं भूली है कि कामयाबी के इस नुस्ख़े में उसकी विचारधारा का सबसे बड़ा योगदान है.

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संजय कुमार कहते हैं, "मेरी इस बारे में ज़रा अलग राय है. बीजेपी को इतनी ऊंचाई पर हिंदुत्व ने नहीं पहुंचाया है. हिंदुत्व ने बीजेपी का आधार मज़बूत किया, लेकिव हिंदुत्व से ज़्यादा राष्ट्रवाद है. राष्ट्रवाद बीजेपी को नई ऊंचाइयों पर ले गया है. राष्ट्रवाद एक शब्द है और हिंदुत्व राष्ट्रवाद के साथ जुड़ जाता है. जब हम विश्व में भारत की छवि की बात करते हैं, तो वो भी राष्ट्रवाद के दायरे में आता है. तो हिंदुत्व से ज़्यादा, हिंदुत्व तो बीजेपी का वोट प्रतिशत 30%- 32% तक ले गया, लेकिन जब बीजेपी ने राष्ट्रीय गौरव की बात शुरू की तो उसने पार्टी को उन बुलंदियों पर पहुंचाया जो बीजेपी को हासिल हुई है, 2019 लोकसभा चुनावों में 37% वोट.

मोदी के सामने विपक्ष कैसा है? और अगर वो एकजुट हो गया तो क्या 2024 में उन्हें हरा पाएगा? इस सवाल के जवाब में संजय कुमार कहते हैं, "बीजेपी को तो एकजुट विपक्ष हरा सकता है, लेकिन मोदी को एकजुट विपक्ष नहीं हरा सकता. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि अगर आप लोकप्रियता के पैमाने पर प्रधानमंत्री मोदी का क़द देखें, तो विपक्ष में ऐसा कोई नेता नहीं है, जो प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का मुक़ाबला कर सके." 

संजय कुमार कहते हैं, "अब ये सवाल है कि क्या विपक्ष एक होता है, तो बीजेपी को हराया जा सकता है? अगर आप इस आधार पर ये हिसाब लगाएं कि सभी राजनीतिक दलों को उतने ही वोट मिलेंगे जितने 2019 में मिले थे. और अगर सारी ग़ैर बीजेपी पार्टियां एक साथ आ जाती हैं, तो ये संभावना है कि बीजेपी 220-230 सीटों तक सिमट जाए. स्थानीय दल 300 का आंकड़ा पार कर सकती हैं, लेकिन क्या ये व्यवहारिक लगता है? मुझे तो ऐसा नहीं लगता."

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बहरहाल, लोकसभा चुनाव में एक साल से कम समय बचा है. करिशमाई नेता नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपनी तैयारी कर रहे हैं.

डॉक्यूमेंट्री सीरीज के पहले 5 एपिसोड आप यहां देख सकते हैं:-

एपिसोड 1- कूटनीति

एपिसोड-2 महिला सशक्तीकरण

एपिसोड-3 कल्याणकारी योजनाएं

एपिसोड-4 इंफ्रास्ट्रक्चर

एपिसोड-5 बदल रहा कश्मीर



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चलती मेट्रो की गेट खोल कर कूद रहा था शख्स, फिर ऐसा हुआ कि देख कर दिल दहल जाएगा

Social Media Viral Video: कई बार लोग ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं. शॉर्ट कट के चक्कर में लोग अपनी जान भी दांव पर लगा देते हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स चलती मेट्रो की गेट खोल देता है. गेट खोलने के बाद वो सीधे प्लेटफॉर्म पर गिर जाता है. उसके बाद जो होता है, वो पूरी तरह से हैरान कर देने वाला होता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखने के बाद लोग दंग हो रहे हैं.

देखें वायरल वीडियो

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक शख्स चलती हुई मेट्रो की गेट को खोलने की कोशिश करता है और वो इसमें सफल भी हो जाता है, मगर गेट खुलने के बाद जो होता है, वो चौंकाने वाला होता है. सोशल मीडिया पर यह वीडियो पूरी तरह से हैरान कर देने वाला होता है. 

वायरल हो रहे इस वीडियो को देखने के बाद आप समझ गए होंगे कि इस धरती पर कितने बेवकूफ लोग होते हैं. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे शख्स गिर जाता है. इस तरह के स्टंट करने से किसी की जान भी जा सकती है. सोशल मीडिया पर यह बहुत ही हैरान कर देने वाला वीडियो है. वायरल हो रहे इस वीडियो को कई लोगों ने शेयर किया है.

इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया गया है. 39 लाख लोगों ने इस वीडियो को देखा है, वहीं इस वीडियो पर कई लोगों के कमेंट्स भी देखने को मिल रहे हैं. एक यूज़र ने कमेंट करते हुए लिखा है- ऐसे लोग बेवकूफी के कारण मर जाते हैं. एक अन्य यूज़र ने कमेंट करते हुए लिखा है- बहुत ही डरावना वीडियो है.

इस वीडियो को भी देखें



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Sunday, 28 May 2023

Surya Grahan 2023: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण किस दिन लगेगा और किन राशियों पर पड़ेगा इसका प्रभाव, जानिए यहां 

Surya Grahan 2023: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसका विशेष धार्मिक महत्व भी होता है. माना जाता है कि ग्रहण कई तरह से राशियों को प्रभावित करते हैं और जातक के जीवन पर असर डालते हैं. इस साल कुल 4 ग्रहण लगने वाले हैं जिनमें 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण हैं. इसी क्रम में पहला सूर्य ग्रहण बीते 20 अप्रैल के दिन लग चुका है जिसके बाद साल का पहला चंद्र ग्रहण 5-6 मई की रात लगा था. अब जल्द ही अक्टूबर के महीने में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) लगने जा रहा है. 

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साल 2023 का दूसरा सूर्य ग्रहण | Second Solar Eclipse Of Year 2023

इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 14 अक्टूबर, शनिवार के दिन लगने वाला है. यह सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा. वलयाकार सूर्य ग्रहण वह सूर्य ग्रहण होता है जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है. इस कारण सूर्य आग के रिंग की तरह यानी रिंग ऑफ फायर की तरह प्रतीत होता है और देखने में छोटा नजर आता है. 

इस सूर्य ग्रहण को संसार के कुछ हिस्सों से देखा जा सकता है. इन जगहों में अफ्रीका का पश्चिमी हिस्सा, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक, प्रशांत महासागर और आर्कटिक शामिल हैं. 

राशियों पर पड़ने वाला असर 

इस सूर्य ग्रहण को भारत से नहीं देखा जा सकेगा जिस चलते मान्यतानुसार भारत में इसका सूतक काल (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा. हालांकि, इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कुछ राशियों पर पड़ सकता है. 

कन्या राशि- इस राशि के लिए सूर्य ग्रहण शुभ नहीं माना जा रहा है. कन्या राशि (Virgo) के लोगों के परिवार व दोस्तों से मतभेद हो सकते हैं. इस चलते इन्हें सावधानी बरतने की आवश्यक्ता है. 

मेष राशि - सूर्य ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव मेष राशि के जातकों पर भी पड़ सकता है. इस राशि के लोगों को करीबियों से धोखा मिलने की संभावना है और साथ ही नौकरी के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. 

तुला राशि - सूर्य ग्रहण के प्रभाव से तुला राशि (Libra) के जातक मानसिक तनाव से गुजर सकते हैं. इससे चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. ऐसे में संभलकर रहने की सलाह है. 

वृषभ राशि - इस राशि के लोगों को धन हानि झेलनी पड़ सकती है. वाणी पर संयम रखना बेहद जरूरी है. साथ ही, कार्यस्थल पर उतार-चढ़ाव झेलने पड़ सकते हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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